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अंतरिक्ष अन्वेषण

अंतरिक्ष अन्वेषण का तात्पर्य है खगोलविदों द्वारा उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से बाह्य अंतरिक्ष में आकाशीय पिंडों की निरंतर खोज और अन्वेषण करना.
Nov 28, 2014 15:02 IST
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अंतरिक्ष अन्वेषण का तात्पर्य है खगोलविदों द्वारा उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से बाह्य अंतरिक्ष में आकाशीय पिंडों की निरंतर खोज और अन्वेषण करना. इसके अंतर्गत खगोलविदों के द्वारा अंतरिक्ष की दूरबीन के द्वारा अध्ययन, और रोबोट के माध्यम से जांच-पड़ताल की जाती है. इस प्रक्रिया में मानव स्पेस-क्राफ्ट का भी इस्तेमाल किया जाता है.

कई बार अंतरिक्ष की खोज के साथ-साथ इन स्पेस-क्राफ्ट का इस्तेमाल शीत युद्ध के समय देशों के बीच एक एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

अंतरिक्ष अन्वेषण का इतिहास

  • 4 अक्टूबर 1957 को, पहले मानव निर्मित ऑब्जेक्ट स्पुतनिक-1 को पूर्व सोवियत संघ के द्वारा पृथ्वी की परिक्रमा के लिए लांच किया गया था.
  • 20 जुलाई 1969 को, अमेरिकन यान अपोलो-11 नें सर्वप्रथम चंद्रमा पर कदम रखा था.
  • वर्ष 1961 में सोवियत-संघ नें अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के अंतर्गत पहला मानव अंतरिक्ष यान वोस्तोक-1 को भेजा था जिसके साथ यूरी गागरिन भी गए थे.
  • अगले वर्ष 18 मार्च 1965 को अलेक्सेई लेनेव द्वारा प्रथम स्पेस-क्राफ्ट को लांच किया गया था. इसके बाद पहला स्वचालित लैंडिंग ऑब्जेक्ट 1966 ईस्वी में लांच किया गया. इसके बाद वर्ष 1971 में पहली बार अंतरिक्ष स्टेशन सैल्युत-1 को अंतरिक्ष में स्थापित किया गया.

बाद में, अंतरिक्ष की खोज के लिए ध्यान केंद्रित किया गया और अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम की शुरुआत की गयी.

वर्ष 1998 के दौरान प्रथम अमेरिकन अंतरिक्ष स्टेशन, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) को अंतरिक्ष में स्थापित किया गया. यह स्टेशन रूसी प्रोटोन और सोयुज रोकेट की ही तरह था. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) एक ऐसा प्रयोगशाला है जिसमे वैज्ञानिक समुदाय के माध्यम से अनेक खगोलिकी, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, आदि से सम्बंधित अनुसन्धान किये जाते हैं.

अक्टूबर 1942 को 3, जर्मन वैज्ञानिकों के द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वी-2 रॉकेट का परीक्षण करते समय, अंतरिक्ष ए-4 में एक कृत्रिम वस्तु को रखने में सफलता प्राप्त की गयी थी. इस युद्ध के बाद, अमेरिका ने भी जर्मन वैज्ञानिकों से अनुसंधान के क्षेत्र में उनके रॉकेट से मदद ली. 10 मई 1946 को  पहली ब्रह्मांडीय विकिरण प्रयोग अमेरिका के द्वारा वी-2 रॉट से लान्च किया गया. यह अंतरिक्ष से पृथ्वी की छवियों को लेने की पहली घटना थी. इसी तरह वैज्ञानिक अन्वेषण हेतु वर्ष 1947 में, पहली बार जानवर एवं मधुमक्खियों पर प्रयोग हेतु संशोधित वि-2s  यान को लांच किया गया.

वर्ष 1947 में ही रूस के वैज्ञानिकों ने जर्मनी के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर, अपने स्वयं के यान के साथ-साथ उप कक्षीय वी-2 रॉकेट का शुभारंभ किया. इस लांच का मुख्य उद्देश्य विकिरण का पशुओं पर प्रयोग था.