Search

अर्थक्रांति प्रस्ताव: 500/1000 के नोट बंद करवाने में इसका योगदान

अर्थक्रांति संस्थान के प्रमुख सदस्य “अनिल बोकिल” को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपनी बातें साझा करने का मौका दिया गया था। उन्हें अपनी बाते साझा करने के लिए सिर्फ 9 मिनट का समय दिया गया था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 2 घंटे अनिल बोकिल की बातें सुनी थी| अर्थक्रांति प्रस्ताव पुणे (महाराष्ट्र) में स्थित “अर्थक्रांति संस्थान” द्वारा दिया गया है, जो चार्टर्ड एकाउंटेंट्स और इंजीनियरों के एक समूह द्वारा गठित एक आर्थिक सलाहकार निकाय है| इस प्रस्ताव संस्थान द्वारा पेटेंट कराया गया है।
Nov 9, 2016 14:58 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon

अर्थक्रांति संस्थान के प्रमुख सदस्य “अनिल बोकिल” को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपनी बातें साझा करने का मौका दिया गया था। उन्हें अपनी बाते साझा करने के लिए सिर्फ 9 मिनट का समय दिया गया था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 2 घंटे अनिल बोकिल की बातें सुनी थी|

Jagranjosh

Source: www.arthakranti.org

"अर्थक्रांति प्रस्ताव" पुणे (महाराष्ट्र) में स्थित “अर्थक्रांति संस्थान” द्वारा दिया गया है, जो चार्टर्ड एकाउंटेंट्स और इंजीनियरों के एक समूह द्वारा गठित एक आर्थिक सलाहकार निकाय है| इस प्रस्ताव संस्थान द्वारा पेटेंट कराया गया है।

अर्थक्रांति प्रस्ताव काले धन की उगाही, महंगाई, भ्रष्टाचार, राजकोषीय घाटा, बेरोजगारी, फिरौती, सकल घरेलू उत्पाद और औद्योगिक विकास, आतंकवाद और सुशासन के लिए एक प्रभावी और गारंटी समाधान है|

अर्थक्रांति प्रस्ताव की प्रमुख बातें

    1. आयात शुल्क को छोड़कर सभी 56 करों को वापस ले लिया जाय|
    2. 1000, 500 और 100 रुपए के नोटों को समाप्त कर दिया जाय|
    3. सभी उच्च मूल्य के लेनदेन केवल चेक, डीडी, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से ही किये जाय|
    4. नकद लेनदेन के सीमा तय की जाय और नकद लेन-देन पर कोई कर नहीं लगाया जाय|
    5. सरकार के लिए राजस्व संग्रह के उद्देश्य से बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से केवल जमा धन पर “बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स (2% 0.7%)” नामक कर प्रणाली लागू की जाय|

    कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दें

    1. वर्तमान में कुल बैंकिंग लेन-देन प्रति दिन 2.7 लाख करोड़ से अधिक और सालाना 800 लाख करोड़ से अधिक है|
    2. वर्तमान में 20% से भी कम लेनदेन बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से होता है जबकि आज 80% से अधिक लेनदेन नकद के रूप में होता है, जिसकी जानकारी सरकार को नहीं होती है|
    3. वर्तमान में भारत की 78% से अधिक आबादी प्रति दिन 20 रूपये से भी कम खर्च करती है तो उन्हें 1000 रूपये के नोट की क्या जरूरत है?

    क्या होगा यदि आयकर सहित सभी 56 करों को समाप्त कर दिया जाय

    1. वेतनभोगी लोगों के घर और अधिक पैसा आएगा जिससे उनके परिवार की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी|
    2. पेट्रोल, डीजल सहित अन्य उपभोक्ता वस्तुएं 52% से 35% तक सस्ता हो जाएगी|
    3. टैक्स चोरी की घटना नहीं होने के कारण काले धन की उगाही नहीं होगी|
    4. व्यापार एवं स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा|

    भारत में रुपया कैसे, कहां बनता है और उसको कैसे नष्ट किया जाता है?

    यदि भारत में 1000/500/100 रुपये के नोटों को समाप्त कर दिया गया तो क्या होगा

    1. नकदी के माध्यम से भ्रष्टाचार 100% बंद हो जाएगा|
    2. काला धन को या तो सफेद करने के लिए परिवर्तित करना पड़ेगा या वह बाजार से गायब हो जाएगा, क्योंकि थैलों में छुपाकर रखे गए 1000/500/100 के अरबों नोट सिर्फ कागज के टुकड़े रह जाएंगे|
    3. भारी मात्रा में छिपाए गए नकदी के कारण आज “रियल एस्टेट” के दाम आसमान छू रहे हैं और मेहनत से  पैसे कमाने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है| 1000/500/100 के नोटों की समाप्ति के बाद यह प्रवृत्ति तुरंत  बंद हो जाएगी|
    4. अपहरण, फिरौती एवं  "सुपारी लेकर हत्या" की घटना बंद हो जाएगी|
    5. नकद लेनदेन के द्वारा आतंकवाद का समर्थन बंद हो जाएगा|
    6. बहुत कम रजिस्ट्री कीमत दिखाक्र नकदी के द्वारा उच्च मूल्य की संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगेगी|
    7. "जाली नोटों" के परिचालन पर रोक लगेगी क्योंकि कम मूल्य के नोटों की “नकली प्रति” की छपाई व्यवहार में नहीं है|

    बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स (2% से 0.7% तक) लागू करने के परिणाम:

    1. वर्तमान परिस्थिति में यदि “बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स” को कार्यान्वित किया जाता है तो सरकार को 800 x 2% = 16 लाख करोड़ रूपये प्राप्त होंगे जबकि वर्तमान कर प्रणाली के द्वारा सरकार को 14 लाख करोड़ रूपये से भी कम राजस्व मिल रही है|
    2. जब कुल लेनदेन का 50% अर्थात  2000 से 2500 लाख करोड़ रूपये की राशि “बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स” द्वारा कवर कर ली जाएगी तो सरकार को “बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स” को घटाकर 1% से 0.7% तक करने की  आवश्यकता होगी जिससे बैंकों द्वारा लेनदेन को पुनः कई गुना बढ़ावा मिलेगा|
    3. आयकर विभाग की तरह अलग से किसी मशीनरी की जरूरत नहीं होगी और टैक्स की राशि सीधे तुरंत राज्य / केंद्र / जिला प्रशासन के खाते में जमा कर दिया जाएगा।
    4. कोई कर चोरी नहीं होगी और सरकार को विकास और रोजगार सृजन के लिए बड़े पैमाने पर राजस्व मिल जाएगा।
    5. किसी विशेष परियोजनाओं के लिए राजस्व सृजन के लिए सरकार “बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स” को बढ़ाकर  1% से 1.2% कर सकती है जिससे सरकार को 4,00,000 करोड़ रूपये की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होगी|

    यदि वर्तमान परिस्थिति में इस प्रस्ताव को लागू किया जाता है तो क्या परिणाम होंगे

    1. सभी चीजों की कीमतें कम हो जाएगी|
    2. वेतनभोगी लोगों के हाथ में और अधिक नकदी आएगी|
    3. सोसायटी की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी।
    4. वस्तुओं की मांग में वृद्धि होगी जिससे उत्पादन और औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा और अंततः युवाओं को अधिक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे|
    5. प्रभावी स्वास्थ्य / शिक्षा / इन्फ्रास्ट्रक्चर / सुरक्षा / सामाजिक कार्यों के लिए सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा|
    6. बैंकों से सस्ता और आसान ऋण मिलेगा और  ब्याज दर कम होगी|
    7. स्वच्छ राजनीति के लिए राजनीतिक व्यवस्था को अतिरिक्त पैसामिलेगा|
    8. भूमि एवं संपत्तियों की कीमतें कम होंगी|
    9. अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त फंड होगा|
    10. समाज को "बुरी ताकतों” से मुक्त मिलेगी|

    भारत की करेंसी नोटों का इतिहास और उसका विकास |