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एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank)

एशियाई विकास बैंक 1960 के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् युद्ध से हुए नुकसान के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के प्रयासों को लागू करने के लिए स्थापित किया गया था.
Dec 8, 2014 12:33 IST
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इतिहास

एशियाई विकास बैंक 1960 के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् युद्ध से हुए नुकसान के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के प्रयासों को लागू करने के लिए स्थापित किया गया था. इस संस्था का मूल उद्देश्य ऐसी वित्तीय संस्थाओं का निर्माण करना था जोकि एशिया के आर्थिक गतिविधियों को बेहतर स्वरुप प्रदान कर सकें. और एशिया में मौजूद सबसे गरीब देश के आर्थिक विकास में मदद कर सके.

इस सन्दर्भ में एशियाई देशों के आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र के एशिया एवं सुदूर पूर्व आर्थिक आयोग की सिफारिश पर इस बैंक की स्थापना दिसंबर 1966 में की गयी थी. 1 जनवरी 1967 को एशियाई विकास बैंक ने कार्य प्रारंभ कर दिया. बैंक का मुख्यालय फिलिपिन्स की राजधानी मनीला में है. भारत इस बैंक के संस्थापक देशों में से एक है. उल्लेखनीय है कि भारत, इस बैंक के निदेशक मंडल का कार्यकारी निदेशक है. इसके अधिकार क्षेत्र में  भारत, बांग्लादेश, भूटान, लाओ पीडीआर और ताजिकिस्तान शामिल हैं. वित्त मंत्री एशियाई बैंक के बोर्ड आफ़ गवर्नर्स में भारत के गवर्नर हैं और सचिव इसके वैकल्पिक गवर्नर हैं.

अवलोकन

अपने उद्भव के बाद से इस बैंक ने एशिया एवं प्रशांत क्षेत्रों के देशों में गरीबों के जीवन में काफी कुछ सुधार किया है. साथ ही उनके जीवन स्तर में भी काफी इजाफा किया है. इस संस्था ने विकास परियोजनाओं और कार्यक्रमों तथा परामर्श सेवाएं तैयार करने और उन्हें लागू करने के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी काफी कुछ कार्य किया है.

इसकी सहायता के लिए मुख्य उपकरण हैं:

  • ऋण
  • नीति वार्ता
  • अनुदान
  • इक्विटी निवेश
  • तकनीकी सहायता

21 वीं सदी में एशियाई विकास बैंक

इस संस्था के द्वारा सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विकासशील देशों की सहायता की जा रही है. साथ ही संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों को पूरा करने में भी इसके द्वारा अच्छी भूमिका निभाई जा रही है. वर्ष 2003 में, एक सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम महामारी जैसे संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए एक क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता थी जिसमें इस संस्था द्वारा बेहरतीन भूमिका निभाई गयी. इस संस्था के द्वारा इस क्षेत्र में फैलने वाले सभी प्रकार के रोगों के खिलाफ एक जुटता का अभियान किया जाता है और सभी देशो को एवियन इन्फ्लूएंजा और एड्स/एचआईवी जैसे बढ़ते हुए महामारी के खिलाफ अभियान भी शुरू किया जाता है. ताकि इस क्षेत्र के सभी देशों के मध्य एकजुटता का स्तर कायम हो सके. और उन्हें अपने देश के अन्दर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने में सहूलियत हो.

एशियाई विकास बैंक ने दिसंबर 2004 में आये हुए एशियाई सुनामी से इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका और मालदीव के क्षेत्रों में अनेक पुनरुद्धार से सम्बंधित कार्यों को सम्पादित किया था. और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में एक समानांतर संस्था के रूप में अपनी भूमिका निभाई थी. इस संस्था नें इस क्षेत्र में इस आपदा के दौरान $ 850,000,000 से अधिक लोगों को बचाया था और उन्हें इमदाद पहुंचाई थी. इसके अलावा भी इस संस्था नून पाकिस्तान में अक्टूबर 2005 में आये हुए भूकंप के दौरान भी 1 अरब डॉलर से पीड़ितों की मदद की थी.

वर्ष 2008 की अवधि में इस संस्था के बोर्ड आफ़ डायरेक्टर्स नें एक दस्तावेज जारी किया जोकि दस्तावेज-2020 के नाम से जाना जाता है. इस दस्तावेज का मूल उद्देश्य वर्ष 2020 तक अपने सभी विकासपरक अभियान का संचालन करना है.

वर्ष 2009 में, एशियाई विकास बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स नें वैश्विक आर्थिक संकट को ध्यान में रखते हुए इस बैंक की धनराशि में काफी इजाफा किया है. यह राशि  $ 55 अरब डॉलर से बढाकर $165,000,000,000  की गयी है जोकि पूर्व की राशि से तीनगुना है. उल्लेखीय है की इस बैंक के द्वारा की गयी यह वृद्धि 200%  के आस-पास है. वर्ष 1994 में यह वृद्धि करीब 100%  के आस-पास की गयी थी.