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कान्हा राष्ट्रीय उद्यान: मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में सतपुड़ा के मैकाल रेंज में स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्व के रूप में लोकप्रिय है। यह मंडला और कालाघाट के दो जिलों में फैला हुआ है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को 1879 में एक आरक्षित वन घोषित कर दिया गया था और इसके बाद 1933 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में इसका पुनर्मूल्यांकन किया गया। 1955 में आगे चलकर एक राष्ट्रीय पार्क बना।
Jul 19, 2016 17:22 IST
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कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में सतपुड़ा के मैकाल रेंज में स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्व के रूप में लोकप्रिय है। यह मंडला और कालाघाट के दो जिलों में फैला हुआ है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को 1879 में एक आरक्षित वन घोषित कर दिया गया था और इसके बाद 1933 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में इसका पुनर्मूल्यांकन किया गया। 1955 में आगे चलकर एक राष्ट्रीय पार्क बना। सुरम्य कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना की प्रेरणा के पीछे रुडयार्ड किपलिंग की अविस्मरणीय क्लासिक रचना 'जंगल बुक' का योगदान था।

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फोटो स्त्रोत: raxacollective.wordpress.com

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कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का स्थान (लोकेशन):

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कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में बाघ:

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फोटो स्त्रोत: wildlifegetaways.com

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में बारहसिंघा:

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फोटो स्त्रोत: wildlifegetaways.com

  1. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश की पहाड़ियों की मैकाल श्रृंखला में 940 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।
  2. इस गरम भूमि की खोज की प्रेरणा स्त्रोत एक प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग की उत्कृष्ट रचना- "जंगल बुक' रही।
  3. कान्हा नेशनल पार्क वन्य प्राणियों की व्यापक प्रजातियों के लिए आदर्श घर है, यहां शक्तिशाली बाघों के अलावा बारहसिंघा और पौधों, पक्षियों, सरीसृप और कीड़ों की अनगिनत प्रजातियां निवास करती हैं।
  4. यहाँ का सबसे अच्छा स्थान बम्मी दादर है जिसे सनसेट प्वाइंट के नाम से भी जाना जाता है।
  5. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश का ऐसा एकमात्र जंगली उद्यान है जहां बड़ी मात्रा में प्रकृति की विभिन्न प्रजातियां रहती हैं और यहा स्थान जादुई फूल पौधों की 200 से अधिक प्रजातियों तथा पेड़ों की लगभग 70 प्रजातियों का घर है।
  6. कान्हा के ढलानों पर स्थित ऊंचे जंगल उष्णकटिबंधीय और नम शुष्क पर्णपाती व बांस के हैं जिन्हें यहां आसानी से देखा जा सकता है। सबसे लोकप्रिय इंडियन घोस्ट ट्री (कुल्लू) भी पर्णपाती क्षेत्र में देखा जा सकता है।
  7. कान्हा रिजर्व में पायी जाने वाली मुख्य वनस्पतियां - साल, साजा, लेंडिया, धावा, तेंदु, बिजा, महुआ, आंवला, अचार और बांस। इसके अलावा, वहाँ पर्वतारोही वनस्पति और घास की कई प्रजातियां भी देखी जा सकती हैं।
  8. यह एकमात्र ऐसा दुर्लभ स्थान है जहां की कठोर जमीन पर बारहसिंघा को अक्सर "कान्हा का गहना" कहा जाता है और सबसे प्रसिद्ध भारतीय बाघ भी यहां रहते हैं।
  9. स्तनधारी: बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, बारहसिंघा, काले हिरण, चौसिंघा, गौर, लंगूर, जंगली सुअर, सियार, आलसी भालू, जंगली कुत्ता।
  10. सरीसृप: अजगर, नाग, रसेल के सांप, भारतीय क्रेट, आम चूहा सर्प, आम सकिंक, इंडियन मॉनिटर, फैन थ्रोटेड लिजर्ड (छिपकली) और गार्डन लिजर्ड (छिपकली) आदि।
  11. मछलियां:जाइंट दानियो, कॉमन रसबोरा, मड परचीज, ब्राउन स्नेकहेड और ग्रीन स्नेकहैड।
  12. पक्षी: रिजर्व के चारों ओर पक्षियों की 300 प्रजातियां रहती हैं और सबसे अधिक देखे जाने वाले पक्षियों में काले पक्षी, कीडे-मकोड़ों का भक्षण करने वाले पक्षी, मवेशी, सफ़ेद बगुला, चमकीले सिर वाला तोता, तालाब में रहने वाला बगुला, ड्रोंगो, कॉमन चैती, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल, ग्रे हॉर्नबिल, इंडियन रोलर,  डजुटेंट सारस, लिटिल ग्रेब्स, लेजर डजुटेंट, लाल जंगली मुर्गी, वुड स्रिंक और व्हाइट ब्रेस्टेट किंगफिशर।

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यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय -

इस क्षेत्र की जलवायु उष्णकटिबंधीय है। गर्मियों में यहां बहुत अधिक गर्मी रहती है और अधिकतम ताममान 40.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 23.9 डिग्री सेल्सियस के साथ उमस भरा मौसम रहता है। जाड़ों में यहां अधितकम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11.1 डिग्री सेल्सियस रहता है जो भ्रमण के लिए उपयुक्त माना जाता है। वार्षिक वर्षा का औसत 152 सेमी है। मानसून के दौरान मध्य जुलाई से अक्टूबर के बीच पार्क बंद कर दिया जाता है।

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