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कृषि मजदूरों की संख्या में वृद्धि

ब्रिटिशों के आगमन से पूर्व भारत में कृषि मजदूरों का कोई अस्तित्व नहीं हुआ करता था|
Sep 11, 2014 15:26 IST
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ब्रिटिशों के आगमन से पूर्व भारत में कृषि मजदूरों का कोई अस्तित्व नहीं हुआ करता था| सन 1842 में सर थॉमस मुनरो ने कहा था कि इस देश में एक भी कृषि मजदूर नहीं हैं| अविवादित रूप से यह एक अतिशयोक्ति है| वर्ष 1881 के जंगड़ना के अनुसार उस वर्ष भूमिहीन कृषकों की संख्या 7.5 लाख थी| वर्ष 1921 में कृषि कामगारों की संख्या 21 लाख थी, जो कि कुल कामगारों की संख्या का 17.4% था|

सन 1921 में कृषि कामगारों की संख्या 27.5 लाख तथा 1961 में 31.5 लाख थी| 1981 की जनगड़ना के अनुसार कृषि कामगारों की संख्या  55.4 लाख थी जिसकें की 25.1% कुल कामगार थे| 1991 के जनसंख्या आकलन के अनुसार कृषि कामगारों की संख्या 73.7 लाख थी जिसमें की 26.5% कुल कामगार थे| उपर्युक्त तथ्य यह दर्शाते हैं की प्रत्येक चार में से 1 व्यक्ति हुमारे देश में कृषि कामगार है|

कृषि कामगारों में वृद्धि के कारण:

1. जनसंख्या में वृद्धि
2. कुटीर व ग्रामीण हस्तकला का पतन
3. भूमि से कृषकों का निकाला जाना
4. अनर्थिक क्रियाएँ
5. धन तथा विनिमय व्यवस्था के प्रयोग का विस्तारण
6. कर्ज़ में वृद्धि
7. पूंजीवादी कृषि