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केंद्रीय जांच (अन्वेषण) ब्यूरो

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में कार्य करती है। यह भारत में सबसे अग्रणी जांच करने वाली पुलिस एजेंसी है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख आपराधिक जांचों में शामिल रहती है। हालांकि, सीबीआई को कुछ आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। सीबीआई का एक निदेशक होता है जो एक आईपीएस अधिकारी होता है जिसका रैंक पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त (राज्य) के समकक्ष होता है। निदेशक की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।
Dec 16, 2015 15:25 IST
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भारत में इंटरपोल एजेंसी के रूप में भी कार्य करती है। सीबीआई की अपनी अकादमी भी है जो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित है। अकादमी की स्थापना सन 1966 में की गयी थी। पिछले कुछ वर्षों में यह एक प्रमुख पुलिस प्रशिक्षण संस्थान के रूप में उभरा है। सीबीआई ने कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में तीन क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी) भी खोले हुए हैं।

सीबीआई का विजन

  1. सीबीआई का आदर्श वाक्य "उद्योग, निष्पक्षता और अखंडता" है। सीबीआई का विजन निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना है:
  2. सावधानीपूर्वक जांच और अभियोजन पक्ष के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार से मुकाबला करना और आर्थिक और हिंसक अपराधों पर अंकुश लगाना।
  3. विभिन्न कानूनी अदालतों में सफल जांच और मामलों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रभावी प्रणाली तथा प्रक्रियाओं को विकसित करना।
  4. साइबर युद्ध और उच्च प्रौद्योगिकी अपराध में सहायता करना।
  5. काम करने के लिए एक स्वस्थ माहौल का निर्माण करना जिससे टीम निर्माण, मुक्त संचार और आपसी विश्वास को प्रोत्साहन मिल सके।
  6. राज्य पुलिस संगठनों और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग में कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करना, विशेष रूप से जांच और मामलों की पूछताछ के संबंध में।
  7. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ युद्ध में एक प्रमुख भूमिका निभाना।
  8. मानवाधिकारों की रक्षा करना तथा पर्यावरण, कला, प्राचीन वस्तुओं और हमारी सभ्यता की विरासतों की रक्षा करना।
  9. एक वैज्ञानिक सोच, मानवतावादी और जांच और सुधार की भावना को विकसित करना।
  10. कामकाज के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता और व्यावसायिकता के लिए प्रयास करना, जिससे संगठन उपलब्धि के उच्चतम स्तर को हासिल कर सके।

सीबीआई संगठन

सीबीआई का एक निदेशक होता है जो एक आईपीएस अधिकारी होता है जिसका रैंक पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त (राज्य) के समकक्ष होता है। निदेशक की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।

संशोधित विशेष दिल्ली पुलिस स्थापना अधिनियम सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति के लिए एक समिति का अधिकार देता है। समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल रहते हैं:

(1) प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)

(2) विपक्ष के नेता

(3) भारत के मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा सिफारिश किए गये अन्य उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश।

सीबीआई के कार्य

सीबीआई के व्यापक कार्य निम्न की जांच करना है:

1) केन्द्र सरकार के सभी, विभागों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और केंद्रीय वित्तीय संस्थानों के सरकारी कर्मचारियों द्वारा किये गए भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों की जांच करना।

 

2) बैंक धोखाधड़ी, वित्तीय धोखाधड़ी, आयात-निर्यात और विदेशी मुद्रा विनिमय उल्लंघन, बंडे पैमाने पर मादक पदार्थों, प्राचीन वस्तुओं, सांस्कृतिक संपत्ति की तस्करी और अन्य वर्जित पदार्थों की तस्करी आदि सहित आर्थिक अपराधों की जांच करना।

 

3) विशेष अपराध जैसे आतंकवाद के मामले, बम विस्फोट, सनसनीखेज हत्या, फिरौती के लिए अपहरण और माफिया/अंडरवर्ल्ड द्वारा किए गए अपराधों की जांच करना।

सीबीआई का अधिकार क्षेत्र

सीबीआई को जांच की कानूनी शक्तियां दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 (डीएसपीई) से प्राप्त हैं। यह अधिनियम केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों के साथ सीबीआई के सदस्यों को समवर्ती और समकालीन अधिकार, कर्त्तव्य, विशेषाधिकार और उत्तरदायित्व प्रदान करता है।  केन्द्र सरकार संघ शासित क्षेत्रों, संबंधित राज्य सरकार की सहमति के लिए जांच विषय के संदर्भ में सीबीआई के सदस्यों की शक्तियां और अधिकार क्षेत्रों के अलावा, किसी भी क्षेत्र में विस्तार कर सकती है। सीबीआई केवल डीएसपीई एक्ट के तहत केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित अपराधों की ही की जांच कर सकती है।

राज्य पुलिस बनाम सीबीआई

मुख्य रूप से राज्य में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य पुलिस की होती है। सीबीआई  निम्न मामलों में जांच कर सकती हैं:

  • वे मामले जो अनिवार्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों या केंद्र सरकार के विषयगत मामलों के खिलाफ हैं।
  • वे मामले जिनमें केंद्र सरकार के वित्तीय हित शामिल हैं।
  • वे मामले जो प्रवर्तन के साथ केंद्रीय कानूनों के उल्लंघन से संबंधित है जो कि भारत सरकार की चिंता का मुख्य विषय हैं।
  • धोखाधड़ी, बेईमानी, गबन के बड़े मामले और इसी तरह के अन्य मामले जहां इन मामलों को संगठित गिरोह या कई राज्यों में असर रखने वाले पेशेवर अपराधियों द्वारा चलाया जाता है।

वे मामले जिनका अंतर्राजीय और अंतर्राष्‍ट्रीय असर होता है और जहां इसमें कई सरकारी एजेंसियों को शामिल करना अनिवार्य होता है, ऐसे में एक एकल जांच एजेंसी जांच पडताल करने के लिए सर्वे-सर्वा होती है।

आलोचना

हालांकि सीबीआई ने देश के आर्थिक सेहत को बचाने और कई कठिन मामलों को सुलझाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन विभिन्न आधारों पर इसकी आलोचना भी की गई है। भाई-भतीजावाद, गलत तरीके से अभियोजन पक्ष और भ्रष्टाचार में उलझाने के लिए कई बार इसकी आलोचना हुई है। कई घोटालों पर अपने दुर्व्यवहार के लिए सीबीआई की आलोचना की गई है। केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए भी सीबीआई की आलोचना की गई है। कई राजनीतिक और संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई के पास स्वतंत्र जांच एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए स्वायत्तता की आवश्यकता का अभाव है। इसके अलावा, सीबीआई के अस्तित्व और ऑपरेशन को कोई भी कानूनी ढांचा प्राप्त नहीं हैं।