Search

कैशलेस सिस्टम क्या है और भारत में कौन कौन सी जगहें कैशलेस हैं?

अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने देश से काले धन के खात्मे के लिए पुरानी मुद्रा के प्रचलन को अवैध घोषित कर दिया है जिससे पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है| ऐसे में जनसामान्य की परेशानियों को कम करने के लिए सरकार लोगों से कैशलेस लेनदेन को अपनाने को कह रही है| लेकिन क्या आपको यह बात पता ही कि भारत में पहले से ही कैशलेस शहर और गांव मौजूद हैं?
Nov 28, 2016 20:09 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon

अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने देश से काले धन के खात्मे के लिए पुरानी मुद्रा के प्रचलन को अवैध घोषित कर दिया है जिससे पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है| ऐसे माहौल में लोगों की परेशानियों को कम करने के लिए सरकार लोगों से कैशलेस लेनदेन को अपनाने को कह रही है| इसलिये जनसामान्य की समझ को विकसित करने के लिए यह बताना जरूरी है कि आखिर यह कैशलेस लेनदेन क्या होता है|

कैशलेस लेनदेन का क्या मतलब होता है ?

कैशलेस लेनदेनों का मतलब ऐसे सौदों से होता है जहाँ पर किसी वस्तु या सेवा को खरीदने के लिए भुगतान “कैश” के रूप में न करके ऑनलाइन तरीकों जैसे मोबाइल बैंकिंग, इन्टरनेट बैंकिंग,चेक, ड्राफ्ट या किसी अन्य तरीके से जैसे मोबाइल वॉलेट Paytm इत्यादि से होता है|

कैशलेस सोसाइटी क्या होती है ?

इसका मतलब ऐसे देश, शहर, क्षेत्र के लोगों से होता है जहाँ कि लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भुगतान कैश के रूप में न करके ऑनलाइन तरीकों से करते हैं| इसलिये ऐसे समाज में रहने वाला कोई भी व्यक्ति कैशलेस सोसाइटी का सदस्य होता है|

भारत में कौन सी जगहें पूरी तरह से कैशलेस लेनदेन पर आधारित हैं :

भारत का पहला कैशलेस शहर तामिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 150 किमी दूर ऑरोविले शहर है, यहां नोटों का चलन पूरी तरह से बंद है| यहाँ इतनी जागरूकता है कि निरक्षर व्यक्ति भी अपने मोबाइल की मदद से कैशलेस लेनदेन करता है| इस शहर की आबादी 50 हजार है, यहां करीब 45 देशों के लोग रहते हैं, जिनमें भारतीयों की आबादी 30% है|

 यहाँ लेन देन कैसे होता है?

सन 1985-86 में यहां भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक फाइनेंशियल सर्विस सेंटर स्टार्ट किया जो एक बैंक की तरह काम करता है| यहां रहने वाले लोग अपना पैसा ऑनलाइन या ऑफ़लाइन जमा कराते हैं| इसके बदले ऑरोविले फाइनेंशियल सर्विस (एएफएस) एक अकाउंट नंबर देता है| देखा जाए तो यह डेबिट कार्ड की तरह काम करता है| यहां रह रहे नागरिक इसी कार्ड का इस्तेमाल कर भुगतान करते हैं|

भारत में दूसरी कैशलेस लेनदेन वाली जगह का नाम है गुजरात का अकोदरा गांव | करीब 1200 लोगों की आबादी वाले इस गाँव को साल 2015 में ICICI बैंक ने इस गांव को गोद ले लिया था| यहाँ के लोग सब्जी, सिगरेट से लेकर चाय तक का भुगतान अपने मोबाइल से करते हैं| गांव के सभी लोगों को मोबाइल नंबर से 24 घंटे बैंकिंग ट्रांजेक्शन सुविधा मुहैया करवाई गई है| लोगों को अकाउंट की मदद से मोबाइल पेमेंट करना सिखाया गया है|

"अभी हाल ही में ख़बरों में यह बात भी आई है कि देश का अगला कैशलेस लेनदेन वाला राज्य गोवा बनने जा रहा है | उम्मीद है कि यह 2017 से कैशलेस हो जायेगा "|

डेबिट कार्ड से कैसे धोखाधड़ी हो सकती हैः 5 कारण

समाज के कैशलेस होने के क्या फायदे हैं?

1. इसका सबसे बड़ा फायदा भ्रष्टाचार पर लगाम लगने के कारण एक भ्रष्टाचार रहित अर्थव्यवस्था का निर्माण होना है| इस प्रकार की व्यवस्था में भ्रष्टाचार इसलिए नही पनप पाता है क्योंकि हर एक लेनदेन पर सरकार की नजर होती है और उसका एक रिकॉर्ड दर्ज होता है |

2. दूसरा सबसे बड़ा फायदा करेंसी को छापने में होने वाली लागत से छुटकारा भी है| आपको यह जानकर काफी आश्चर्य होगा कि भारत सरकार (भारतीय रिज़र्व बैंक) को हर हाल नोटों की छपाई पर करोड़ों रुपये की स्याही, कागज इत्यादी विदेशों से आयात करनी पड़ती है| चूंकि नोट हर साल फट जाते हैं इसलिये इस पर किया जाने वाला खर्चा अनिवार्य ही होता है| इसलिए कैशलेस अर्थव्यवस्था होने से सरकार सहित पूरे देश को सिर्फ फायदा ही फायदा होगा|

3. वस्तुओं और सेवाओं के दामों में कमी भी होगी क्योंकि किस वस्तु या सेवा के लिए कितना भुगतान किया गया है इस बात को सरकार बड़ी ही आसानी से देख सकती है| अतः तय कीमत से अधिक कीमत लेने वालों की खैर नही होगी|

4. चूंकि इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में हर लेनदेन पारदर्शी होगा इस कारण सरकार की कर आय में भी बढ़ोत्तरी होगी, जिसको वह लोगों के कल्याण पर खर्च कर सकेगी|

Jagranjosh

image source:The Daily Stirrer

जानें काले धन/गुप्त धन पर टैक्स की गणना किस प्रकार होगी?

विश्व के कौन कौन से देश कैशलेस हो चुके हैं:

स्वीडन दुनिया का पहला कैशलेस देश बन गया है| इसके अलावा कनाडा में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के माध्यम से लगभग 70% पेमेन्ट होता है जबकि विश्व में कैशलेस लेनदेनों की संख्या 40% है|विश्व के अन्य देश जो कि कैशलेस बनने की राह पर अग्रसर हैं उनमे अफ्रीका का सबसे गरीब माने जाने वाले देश सोमालिया, केन्या और नाइजीरिया हैं | इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, हांगकांग, अमेरिका भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे है|

दरअसल आज विश्व के हर देश का कैशलेस होना मजबूरी नही बल्कि समय की मांग है| उपभोक्तावाद के ज़माने में यह कदम सभी के लिए आगे की राहें आसान बनाएगा| कैशलेस समाज की स्थापना से देश के हर एक नागरिक को आगे आने वाले समय में फायदा होगा| भारत के मामले में यह कदम थोडा चुनौतीपूर्ण जरूर है क्योंकि यहाँ की 70% आबादी अभी भी गावों में रहती है जो कि इतनी पढ़ी लिखी भी नही है कि आसानी से कैशलेस लेनदेन कर सके और उनके पास मल्टीमीडिया मोबाइल के साथ-साथ इन्टरनेट भी नही है| इसलिए भारत के परिपेक्ष्य में यह कदम चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन असंभव बिलकुल नही|

कौन कौन सी नीतिगत खामियों की वजह से काला धन सफ़ेद बन जाता है: एक विश्लेषण