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कोणार्क का सूर्य मंदिर: भारत का ‘ब्लैक पैगोडा’

'कोणार्क का सूर्य मंदिर' सूर्य देवता को समर्पित एक मंदिर है,जो भारत में पुरी (ओडिशा राज्य) के पास स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने 1250 ई. में कराया था| यूनेस्को ने वर्ष 1984 में इसे 'विश्व विरासत स्थल' का दर्जा प्रदान किया था| समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय में इसे 'ब्लैक पगोडा' कहते थे|
Mar 23, 2016 11:12 IST
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'कोणार्क का सूर्य मंदिर' सूर्य देवता को समर्पित एक मंदिर है,जो भारत में पुरी (ओडिशा राज्य) के पास स्थित है।यह ओडिशा की मध्यकालीन वास्तुकला का अनोखा नमूना है और भारत का प्रसिद्ध ब्राह्मण तीर्थ है। युनेस्को ने वर्ष 1984 में इसे 'विश्व विरासत स्थल' का दर्जा प्रदान किया था|'कोणार्क' शब्द, 'कोण' और 'अर्क' शब्दों के मेल से बना है, 'अर्क' का अर्थ होता है-'सूर्य' और 'कोण' का अभिप्राय संभवतः कोने या किनारे से रहा होगा|   

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कोणार्क के सूर्य मंदिर से संबन्धित रोचक तथ्य:

  • सूर्य मंदिर का निर्माण 13 वीं सदी में वर्तमान ओडिशा राज्य के कोणार्क नामक स्थान पर किया गया था,इसीलिए ‘कोणार्क का सूर्य मंदिर’ भी कहा जाता है|
  • ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने 1250 ई. में कराया था|
  • इस मंदिर के तीन हिस्से हैं-नृत्य मंदिर, जगमोहन और गर्भगृह|
  • यह सूर्य देवता के रथ के आकार में बना एक भव्य भवन है| इसके 24 पहिए सांकेतिक डिजाइनों से सज्जित हैं जिसे सात अश्‍व खींच रहे हैं। कोणार्क के सूर्य मंदिर के दोनों ओर 12 पहियों की दो कतारें है|

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  • कुछ लोगों का मत है कि 24 पहिए दिन के 24 घण्‍टों का प्रतीक है, जबकि अन्य का कहना है कि 12-12 अश्वों की दो कतारें साल के 12 माह की प्रतीक हैं। यहाँ स्थित सात अश्‍व सप्ताह के सात दिन दर्शाते हैं।
  • स्थानीय कथाओं के अनुसार राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बिसु महाराणा नाम के स्थापत्यविद को इस मंदिर के निर्माण कार्य की ज़िम्मेदारी सौंपी थी|
  • कोणार्क का सूर्य मंदिर न केवल अपनी वास्तुकलात्मक भव्यता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह शिल्पकला के गुंथन और बारीकी के लिए भी प्रसिद्ध है।
  • सूर्य मंदिर का निर्माण मूलतः चंद्रभागा नदी के मुहाने पर किया गया था, जोकि अब समाप्त हो गयी है|
  • मुख्य मंदिर के पश्चिम में मंदिर संख्या-2 के अवशेष हैं,जिन्हें ‘मायादेवी के मंदिर के नाम से जाना जाता है| ऐसा माना जाता है कि ‘मायादेवी’ भगवान सूर्य की पत्नियों में से एक थीं|
  • इस मंदिर का निर्माण खोण्डालाइट चट्टानों से किया गया है|
  • इस मंदिर के द्वार के दोनों ओर स्थित दो विशाल मूर्तियों में एक सिंह हाथी को दबोचे हुए है|

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  • समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय में इसे 'ब्लैक पगोडा' कहते थे, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह जहाज़ों को किनारे की ओर आकर्षित करता था और उनका नाश कर देता था।
  • स्थानीय लोगों का मानना है कि यहाँ के टावर में स्थित दो शक्तिशाली चुंबक मंदिर के प्रभावशाली आभामंडल के शक्तिपुंज हैं। कुछ लोगों के अनुसार शक्तिशाली चुम्बकों के कारण ही जहाजों को अपनी ओर आकर्षित करता था|
  • 15वीं सदी में आक्रमणकारियों की लूटपाट के दौरान, सूर्य मंदिर के पुजारियों ने यहाँ स्थपित सूर्य देवता की मूर्ति को पुरी में ले जाकर सुरक्षित रख दिया, लेकिन पूरा मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था। बाद में धीरे-धीरे इस मंदिर पर रेत जमा होने लगी और लंबे समय के बाद यह पूरी तरह से रेत से ढँक गया था। बाद में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत हुए मरम्मत कार्य में सूर्य मंदिर को पुनः खोजा गया।
  • यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर हैं, जहाँ ऊर्जा, ज्ञान और जीवन के प्रतीक सूर्य की मानवकार मूर्ति मिलती है| इसके अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में कटारमल नमक स्थान पर भी मिलता है,जिसे ‘कटारमल का सूर्य मंदिर कहा जाता है|

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  • वर्तमान में इस मंदिर का काफी भाग ध्वस्त हो चुका है,जिसका कारण अनेक विद्वान अलग-अलग बताते हैं अर्थात कोई इसका कारण मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा लूटपाट को बताता है तो कुछ का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो ही नहीं पाया था| कुछ लोग समुद्र की ओर से आने वाली खारे पानी की वाष्प युक्त हवा को इसके ध्वस्त हो जाने का कारण मानते हैं|
  • कोणार्क का सूर्य मंदिर कलिंग वास्तुकला की उपलब्धियों का उच्चतम बिन्दु है, जो भव्यता,उल्लास और जीवन के सभी पक्षों का अनोखा तालमेल प्रदर्शित करता है।

Image Source:asi.nic.in