क्या आप एलीफेंटा गुफाओं के बारे में ये रोचक तथ्य जानना चाहेंगे ?

एलीफेंटा की गुफाएं (स्थानीय भाषा में इन्हें घारापुरीची लेनी के रूप में भी जाना है, मूल रूप घारापुरी) महाराष्ट्र के एलिफेंटा द्वीप या घारापुरी (मुंबई) में स्थित मूर्ति गुफाओं का एक नेटवर्क (शाब्दिक अर्थ गुफाओं के शहर) है। यह द्वीप अरब सागर के किनारे स्थित है जहां गुफाओं के दो समूह हैं, पहला- पांच हिंदू गुफाओं का एक बड़ा समूह है, दूसरा- दो बौद्ध गुफाओं का एक छोटा समूह है। हिंदू गुफाओं में चट्टानों में पत्थर की मूर्तियां बनी हैं।
Created On: Jun 29, 2016 14:55 IST
Modified On: Jul 5, 2016 11:26 IST

एलीफेंटा की गुफाएं (घारापुरीची लेनी के रूप में भी जाना है, मूल रूप घारापुरी) महाराष्ट्र के एलिफेंटा द्वीप या घारापुरी (मुंबई) में स्थित मूर्ति गुफाओं का एक नेटवर्क (शाब्दिक अर्थ "गुफाओं के शहर") है। इसका ऐतिहासिक नाम घारपुरी है। यह नाम मूल नाम अग्रहारपुरी से निकला हुआ है। यह द्वीप अरब सागर के किनारे स्थित है जहां गुफाओं के दो समूह हैं,  पहला- पांच हिंदू गुफाओं का एक बड़ा समूह है, दूसरा- दो बौद्ध गुफाओं का एक छोटा समूह है। हिंदू गुफाओं में चट्टानों में पत्थर की मूर्तियां बनी हैं जिनमें शैव हिन्दू संप्रदाय, भगवान शिव को समर्पित दिखाया गया है।

सम्बंधित लेखों को पढने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें...

एलोरा की गुफाएँ: हिन्दू, जैन व बौद्ध धर्म से संबन्धित गुफाएँ

एलीफेंटा  की गुफाओं की तस्वीर:

Jagranjosh

             (20 फीट (6.1 m) ऊंची त्रिमूर्ति मूर्तिकला)

Jagranjosh

                               (पंचमुखी शिव)

Jagranjosh

              (शिव नटराज, कई हथियारों से लैस ब्रह्मांडीय नर्तकी)

एलीफेंटा गुफाओं के बारे में पंद्रह तथ्य:

1. जिस द्वीप पर एलीफेंटा की गुफाएं स्थित हैं उसे मूल रूप से घारापुरी कहा जाता था। एलिफेंटा नाम पुर्तगालियों द्वारा यहाँ पर बने पत्थर के हाथी के कारण दिया गया था।

2. यहां 6ठीं और 7वीं शताब्दी में खुदाई के दौरान सात गुफाएं मिली थी जो एलीफेंटा गुफा परिसर का एक हिस्सा थीं।

3. ऐसा माना जाता है कि एलीफेंटा की गुफाएं सिल्हारा राजाओं के समय के दौरान पायी गयी थीं।

4. किंवदंतियों में कहा जाता है कि चालूक्य वंश के राजकुमार पुलकेसिन द्वितीय ने अपनी विजय का जश्न मनाने के लिए भगवान शिव के मंदर का निर्माण किया था।

5. यह पाषाण-शिल्पित मंदिर समूह लगभग 6,000 वर्ग फीट (5,600 वर्ग मीटर) के क्षेत्र में फैला है, जिसमें मुख्य कक्ष, दो पार्श्व कक्ष, प्रांगण व दो गौण मंदिर हैं। इन भव्य गुफाओं में सुंदर उभाराकृतियां, शिल्पाकृतियां हैं।

6. एलीफेंटा की गुफाएं ठोस चट्टानों से बनी हैं।

7. इनमें शिव की त्रिमूर्ति प्रतिमा सबसे प्रमुख है। यह मूर्ति 20 फीट लम्बी है। इस मूर्ति में भगवान शंकर के तीन रूपों का चित्रण किया गया है। दूसरी मूर्ति शिव के पंचमुखी परमेश्वर रूप की है जिसमें शांति तथा सौम्यता का राज्य है। (तस्वीर ऊपर देखें)

8. बीच में स्थित शिव की त्रिमूर्ति दक्षिण की दीवार पर स्थित है और इसके बाईं ओर अर्धनारीश्वर से घिरी हुई है (शिव के रूप में एक आधा आदमी, आधा औरत) तथा इसके दायीं ओर गंगाधर है। (ऊपर तस्वीर देखें)

9. एलीफेंटा गुफाओं में भगवान शिव को भी योगऋषि के रूप में दिखाया गया है- भगवान योगी एक कमल पर विराजमान हैं और नटराज के रूप में शिव कई हथियारों से लैस ब्रह्मांडीय नर्तकी के रूप में हैं। (ऊपर तस्वीर देखें)

10. एक गुफा की चट्टानों में ब्राह्मणों की भूमिका को उकेरा गया है जो एलिफेंटा द्वीप पर सबसे प्रभावशाली गुफा है।

11. 1987 में, एलीफेंटा की गुफाओं को यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में नामित किया गया।

12. वर्तमान में इन गुफाओं की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया जाता है।

13. गुफाओं के अंदर अधिकांश मूर्तियां 17 वीं सदी में पुर्तगाली द्वारा निर्मित की गयी थीं जो इन्हें अपने लक्ष्य का अभ्यास करने के लिए इस्तेमाल करते थे।

14. महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (एमटीडीसी) द्वारा प्रति वर्ष फरवरी माह के दौरान एलीफेंटा द्वीप पर अद्भुत नृत्य महोत्सव आयोजित किया जाता है।

15. एलीफेंटा की गुफाएं सोमवार को छोड़कर सप्ताह के सभी दिन सुबह नौ बजे से शाम 5 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहती हैं।

Image sources: https: //en.wikipedia.org/wiki/Elephanta_Caves

यदि आप इसी तरह के और भी लेख पढना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ...

सांची स्तूप : भारत का प्रसिद्ध बौद्ध स्मारक

यदि आप विश्व विरासत स्थलों पर क्विज हल करना चाहते हैं तो नीचे क्लिक करें ...

GK Quiz on World Heritage Sites in India

Comment (0)

Post Comment

8 + 9 =
Post
Disclaimer: Comments will be moderated by Jagranjosh editorial team. Comments that are abusive, personal, incendiary or irrelevant will not be published. Please use a genuine email ID and provide your name, to avoid rejection.