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क्या आप बंदरों के बारे में ये तथ्य जानना चाहेंगे?

बंदर हैप्लोराइन (haplorhine)(dry-nosed) प्राइमेट्स (स्तनपायी प्राणियों में सर्वोच्च श्रेणी के जीव) होते हैं, ये पेराफाईलेटिक समूह है जिनमें आम तौर पर पूंछ होती है और इनकी लगभग 260 ज्ञात प्रजातियां हैं। बंदरों की ज्यादातर प्रजातियां दिन के समय में सक्रिए होती हैं। आमतौर पर नयी दुनिया के बंदरों को बुद्धिमान माना जाता है।
Jul 8, 2016 17:26 IST
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बंदर हैप्लोराइन (haplorhine)("dry-nosed") प्राइमेट्स (स्तनपायी प्राणियों में सर्वोच्च श्रेणी के जीव) होते हैं, ये पेराफाईलेटिक समूह है जिनमें आम तौर पर पूंछ होती है और इनकी लगभग 260 ज्ञात प्रजातियां हैं। लीमर (बंदर), लोरीसेस और गैलागोस बंदर नहीं होते, ये स्ट्रेपसिराइनी ("wet-nosed") प्राइमेट्स होते हैं। ज्यादातर प्रजातियां दिन (प्रतिदिन) के समय में भी सक्रिए होती हैं। आमतौर पर बंदरों, खासकर पूर्वजगत बंदरों को बुद्धिमान माना जाता है। बंदर वनमानुष प्राइमेट्स के तीन में से दो समूहों को बनाते हैं। अन्य समूह वानरों (apes) का है।

पुरानी दुनिया के बंदर (Old world monkeys): ये सेर्कोपिथेसिनिए कुल के होते हैं। पुरानी दुनिया के बंदरों के दो उपकुल होते हैं– सेर्कोपिथिसिनिए (थैली के समान गाल वाले बंदर) और कोलोबिनि (पत्तियां खाने वाले बंदर)। ये नवजगत बंदरों से बड़े हैं। वे दिन में सक्रिए रहने वाले (डाइअर्नल) होते हैं । साथ ही इनकी शारीरिक रचना भी अलग होती है।

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नयी दुनिया के बंदरः (New world monkeys) ये बंदर "नवजगत" के उष्णप्रदेशों के वनों में रहते हैं। इन्हें दो समूहों में बांटा जाता है– कैलिट्राईकेडि, इसमें छोटे अफ्रीकी बंदर आते हैं, और केबिडे बंदर, इसमें बंदरों की कापूचिन, घुग्घू (owl), टिटि, साकी, स्पाइडर, वूलि और कई अन्य पर्जातियां आती हैं। आकार की दृष्टि से नयी दुनिया के बंदरों में व्यापक रेंज मिलती है– कुछ बहुत छोटे होते हैं जैसे पिग्मी मार्मोसेट, यह 6 इंच का होता है और कुछ बड़े होते हैं जैसे – हॉलर मंकी, यह 3 फीट तक लंबा हो सकता है। नवजगत बंदरों को प्लेथाइरिनी (platyrrhines) कहा जाता है।

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1. "बंदर" शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई, यह स्पष्ट नहीं है। यह मोन्की (Moneke) से बना हो सकता है। मोन्की मध्ययुगीन पशु कहानी में मार्टिन वानर के बेटे का नाम था। यह डच मान्नाकीन (छोटा आदमी) मानीकिन से भी संबंधित हो सकता है।

2. बंदर वानर प्राइमेट के तीन समूहों में से दो समूह में शामिल होते हैं, नयी दुनिया के बंदर और पुरानी दुनिया के बंदर एवं अन्य समूह वानरों का है।

3. बंदरों की पूंछ के आधार पर उन्हें वानरों (APES) से बहुत आसानी से अलग किया जा सकता है। वानरों (APES) की पूंछ नहीं होती।

4. एक दूसरे के साथ बातचीत के लिए बंदर स्वरों के उच्चारण, चेहरे के भाव और शारीरिक गतिविधियों का उपयोग करते हैं।

5. जब बंदर अपने होंठ खीचतें हैं तो यह उनकी आक्रामकता को बताता है।

6. आमतौर पर बंदर एक दूसरे को संवारने के दौरान दूसरों के साथ अपने स्नेह और शांति का प्रदर्शन करते हैं।

7. बंदरों के समूह को "ट्रूप" कहते हैं।

8. पिग्मी मारमोसेट दुनिया का सबसे छोटा बंदर है। इसकी लंबाई  117-159 मिलीमीटर (साढ़े चार से लेकर छह इंच तक) और वजन 85 से 140 ग्राम (तीन से पांच औंस) होता है।

9. बंदरों में टीबी, हेपेटाइटिस और बंदर दाद बी जैसी बीमारियों का होना आम बात है।

10. एक पुरुष गिलहरी बंदर कभी– कभी अपने अधीनस्थों पर मूत्र कर अपना प्रभुत्व जताता है।

11. यह देखा गया है कि जब गुनोन बंदरों के समूह को नया नेता मिलता है, तो न्या अल्फा– नर कभी–कभी स्तनपान करने वाले सभी शिशु बंदरों की हत्या कर देता है– इसे किन चयन (kin selection) कहते हैं, जहां नर दूसरे नरों के बच्चों की हत्या कर अपने खुद के बच्चे पैदा करता है।

12. हॉलर बंदर सबसे जोर से बोलने वाले बंदर होते हैं। जंगल में इनकी आवाज करीब दो मील दूर से और खुले इलाके में करीब तीन मील दूर से सुनी जा सकती है।

13. कापुचीन बंदर विभिन्न प्रकार के हिंसक जानवरों की पहचान बताने के लिए अलग– अलग ध्वनि निकालते हैं। हिंसक जानवरों की तरफ बढ़ने के दौरान एक दूसरे को चेतावनी देने के लिए उन्हें एक दूसरे को पत्थरों से मार कर सचेत करते हुए भी पाया गया है।

14. वर्तमान में बंदरों की 264 प्रजातियां ज्ञात हैं।

15. बंदर बुद्धिमान जानवर होते हैं। इनका आईक्यू 174 होता है।

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