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खुशवंत सिंह: जीवनी

खुशवंत सिंह भारतीय लेखकों और पत्रकारों में हर समय सर्वोपरि रहने वालो में से एक थे। उनका जन्म पाकिस्तान के हदाली में वर्ष 1915 में हुआ था।
Jun 11, 2014 12:23 IST
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Khushwant Singhखुशवंत सिंह भारतीय लेखकों और पत्रकारों में हर समय सर्वोपरि रहने वालों में से एक थे। उनका जन्म पाकिस्तान के हदाली में वर्ष 1915 में हुआ था। उनका निंधन 20 मार्च 2014 को  99 वर्ष की आयु में उनके निवास स्थान दिल्ली में ह्रदय गति रुक जाने के कारण हुई थी। वह भारत के प्रीमियम इतिहासकारों और उपन्यासकारों में से थे। साथ ही राजनीतिक टीकाकार, स्तंभकार और एक असाधारण पर्यवेक्षक के रूप में प्रसिद्ध थे एवं एक सामाजिक आलोचक के रूप में चर्चित थे।

पारिवारिक विवरण

खुशवंत सिंह का परिवार एक  धनी परिवार था। उनके पिता का नाम सर शोभा सिंह था जोकि एक बिल्डर और ठेकेदार थे। उनकी माता का नाम लेडी वर्याम कौर था। उनका विवाह कवल मलिक से हुआ था जिनसे एक पुत्र राहुल सिंह थे, और एक पुत्री  माला थी। उल्लेखनीय है कि प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री अमृता सिंह उनकी भतीजी थी जोकि उनके भाई दलजीत सिंह की पुत्री है।

शिक्षा

वह लन्दन में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के किंग्स कॉलेज में  स्थित इनर मंदिर में और  लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज शिक्षा प्राप्त किये थे।

व्यवसाय

1939-1947: वह उच्च न्यायालय, लाहौर में एक अभ्यासरत वकील थे।

1947: उन्होंने शीघ्र ही स्वतंत्र हुए भारत के लिए एक राजनयिक के रूप में सेवा की।

1951: उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के साथ एक प्रतिष्ठित पत्रकार के रूप में अपना कैरियर शुरू किया।

1951-1953: वह योजना पत्रिका के संस्थापक और संपादक भी थे।

1969-1978: वह  वीकली आफ इंडिया, बाम्बे के संपादक भी थे।

1978-1979: वह नेशनल हेराल्ड के( नई दिल्ली) एडिटर-इन-चीफ भी थे।

1980-1983: वह हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक थे।

उनका शनिवार को हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित "एक और सभी के प्रति द्वेष के साथ" स्तंभ (कालम) अब तक का सबसे अच्छी तरह से पसंद स्तंभों(कालमों) में से एक था।

ऑनर्स और पुरस्कार

• 1974 में वह भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किए गए। हालांकि 1984 में उन्होंने भारतीय सेना के स्वर्ण मंदिर में घुसने और एक अभियान चलाने के कारण विरोध स्वरुप इस सम्मान को लौटादिया था।

• वर्ष 2007 में, खुशवंत सिंह को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

• वर्ष 2006 में उन्हे पंजाब सरकार द्वारा पंजाब रतन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

• जुलाई 2000 में उन्हें अपनी बहादुरी और ईमानदारी "प्रतिभाशाली तीक्ष्ण लेखन." के लिए सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस संगठन द्वारा "आनेस्ट मैन आफ द ईयर अवार्ड” दिया गया था। सम्मान समारोह के समय, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उन्हें "विनोदी लेखक और इश्वर के साथ-साथ मानव भलाई के लिए कट्टर आस्तिक और नास्तिक साथ ही एक देखभाल करने वाला और एक साहसी मन." वाले लेखक के रूप में वर्णित किया था।

• 2010 में उन्हे भारत के साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य अकादमी फेलोशिप पुरस्कार दिया गया था।

• 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें अखिल भारतीय अल्पसंख्यक फोरम वार्षिक फैलोशिप का अवार्ड दिया गया था।

• उन्हें आर्डर आफ खालसा (निशान- ए-खालसा) सम्मान दसे भी सम्मानित किया गया था।

उपलब्धियां

खुशवंत सिंह वर्ष 1986 से वर्ष 1980 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। कांग्रेस पुस्तकालय उनके 99 कार्यों जोकि खुशवंत सिंह द्वारा किए गए है रखे हुए है।

किताबें और वृत्तचित्र

खुशवंत सिंह ने अपनी रचना कल्पना और अकल्पना दोनों वर्गों में की थी। वह मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा करते थे। उनकी प्रमुख पुस्तकें ट्रेन टू पाकिस्तान (जिसका प्रकाशन 1953 में हुआ था) जोकि इंटरनेशनल अक्लेम और ग्रूव प्रेस अवार्ड पुरस्कार 1954 से पुरस्कृत थी। इस पुस्तक में 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन को दर्शाया गया है। उनका दूसरा प्रमुख काम भारत की इमरजेंसी पर निबंध के सन्दर्भ में ‘ह्वाई आई सपोर्ट इमरजेंसी’ (2004 में प्रकाशित) नाम से है। उनका तीसरा प्रमुख काम देल्ही:अ नावेल है। उन्होंने आई शैल नॉट हियर द नाईटेंगल (1959 में प्रकाशित) पुस्तक को भी लिखा है। पोर्ट्रेट आफ़ लेडी: कलेक्टेड स्टोरी एक लघु कहानी संग्रह के रूप में उन्होंने प्रस्तुत की थी।

उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह और सिख साम्राज्य के पतन के अलावा भी कई अन्य पुस्तकें लिखी।

इनके अलावा, उन्होंने  सिख इतिहास पर दो खंडों में एक क्लासिक किताब ‘हिस्ट्री आफ़ सिख’(1963 में प्रकाशित) लिखा था. उनके अन्य चर्चित कार्यों में ट्रुथ,लव एंड अ लिटिल मैलिस उनकी अत्मकथा के रूप में (2002 में प्रकाशित), सेक्स, स्कॉच एंड स्कालरशिप और इन द कम्पनी आफ ओमेन (1999 में प्रकाशित) है।

गौरतलब है कि 98 वर्ष की आयु में उनकी अंतिम लिखित द गुड,द बैड एंड द रेडीकुलस शीर्षक से थी। उन्होंने हुमारा कुरैशी के साथ कई पुस्तकों में सहलेखन कार्य किया था।

योगदान

साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय था। उन्होंने अपने व्यंग्य लेखन के माध्यम से अपने पाठकों का भरपूर मनोरंजन किया था।

वर्तमान खबर

खुशवंत सिंह की हृदय गति रुक जाने के कारण 20 मार्च, 2014 को  99 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

प्रकाश करात

उद्धव ठाकरे

मनमोहन सिंह

ममता बनर्जी