गैर नवीकरणीय संसाधन

गैर नवीकरणीय संसाधन वह खनिज हैं जो लाखों साल से स्थलमंडल में बनते आए हैं और एक संवृत प्रणाली का गठन किया | ये गैर नवीकरणीय संसाधन, एक बार इस्तेमाल में आते हैं, एक अलग रूप में पृथ्वी पर रहते हैं और जब तक पुनर्नवीनीकरण न हो जाये, ये अपशिष्ट पदार्थ बन जाते हैं। गैर नवीकरणीय संसाधनों में जीवाश्म ईंधन भी शामिल हैं जैसे तेल और कोयला, यदि इन्हे वर्तमान दर पर निकाला जाये तो ये जल्दी ही पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे |
Created On: Dec 11, 2015 12:56 IST

गैर नवीकरणीय संसाधन वह खनिज हैं जो लाखों साल से स्थलमंडल में बनते आए हैं और एक संवृत प्रणाली का गठन करते हैं | ये गैर नवीकरणीय संसाधन, एक बार इस्तेमाल में आते हैं, एक अलग रूप में पृथ्वी पर रहते हैं और जब तक पुनर्नवीनीकरण न हो जाये, ये अपशिष्ट पदार्थ बन जाते हैं। गैर नवीकरणीय संसाधनों में जीवाश्म ईंधन भी शामिल हैं जैसे तेल और कोयला, यदि इन्हे वर्तमान दर पर निकाला जाये तो ये जल्दी ही पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे |
अतः एक गैर नवीकरणीय संसाधन(जिसे सीमित संसाधन भी कहा जाता है ) वह संसाधन है जोकि मानव समय के ढांचे अनुसार सार्थक ढंग से सतत आर्थिक निकासी के लिए एक पर्याप्त दर पर खुद को नवीनीकृत नहीं करता है|एक उदाहरण है कार्बन आधारित, जैविक व्युत्पन्न ईंधन। मूल कार्बनिक पदार्थ, गर्मी और दबाव की सहायता के साथ, तेल या गैस के रूप में ईंधन बन जाते हैं। पृथ्वी खनिज और धातु अयस्क, जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस)और  जलवाही स्तर में कुछ भूजल सभी गैर-नवीकरणीय संसाधन हैं।

पृथ्वी खनिज और धातु अयस्क:

भूमि खनिज और धातु अयस्क गैर नवीकरणीय संसाधनों के अन्य उदाहरण हैं। धातु अपने आप में विशाल मात्रा मे भूपटल में मौजूद हैं और केवल मनुष्य द्वारा इनकी निकासी की जाती है जहां प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं (जैसे गर्मी, दबाव, जैविक गतिविधि, अपक्षय और अन्य प्रक्रियाओं के रूप में)  द्वारा संकेंद्रित होता है  इन सभी खनिजों का जुटाव प्राकृतिक भौगोलिक क्रियायों के कारण होता है। इन प्रक्रियाओं के होने में आम तौर पर प्लेट टेक्टोनिक्स, विवर्तनिक घटाव और क्रस्टल रीसाइक्लिंग का योगदान होता है ।  इन प्रक्रियाओं के होने में दशकों से लाखों साल तक का समय लगता है |

जीवाश्म ईंधन:

प्राकृतिक संसाधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम (कच्चा तेल) और प्राकृतिक गैस को   स्वाभाविक रूप से बनने में हजारों साल लगते हैं और इन्हें इतने शीघ्रता से नहीं  बदला जा सकता जितनी जल्दी इसे उपयोग में लाया जाता है | अंततः यह माना जाता है कि जीवाश्म आधारित संसाधन उत्पत्ति के लिहाज से काफी महंगे हो जाएँगे और मानव को अपनी निर्भरता को ऊर्जा के अन्य स्रोतों पर स्थानांतरित करना होगा । इन संसाधनों को नाम दिया जाना अभी बाकी है।
वर्तमान में, मनुष्यों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला मुख्य ऊर्जा का स्रोत, गैर नवीकरणीय जीवाश्म ईंधन है। 17 वीं सदी में आंतरिक दहन इंजन प्रौद्योगिकी के बाद से, पेट्रोलियम और अन्य जीवाश्म ईंधन निरंतर मांग में बने हुए हैं। नतीजतन, पारंपरिक बुनियादी ढांचे और परिवहन प्रणाली जो ज्वलन इंजन के लिए उपयुक्त हैं, दुनिया भर में प्रमुखता से बने हुए हैं। वर्तमान दर में जीवाश्म ईंधन के लगातार प्रयोग से ग्लोबल वार्मिंग बढ्ने का खतरा बन रहा है और अधिक गंभीर जलवायु परिवर्तन का कारण माना जा रहा है।

परमाणु ईंधन:

1987 में, पर्यावरण और विकास (WCED) पर (विश्व आयोग), एक संगठन संयुक्त राष्ट्र की ओर से गठित किया गया लेकिन संयुक्त राष्ट्र से स्वतंत्र था, जिसने  विखंडन रिएक्टरों को विभिन्न वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। एक वर्ग में वे रिएक्टर है जो मानव विकास के लिए उर्जा का विकास करते हैं और दूसरा वो वर्ग है जो परमाणु उर्जा का विकास करते हैं ।

यूरेनियम जो कि एक प्रमुख नाभिकीय ईंधन है परन्तु यह पृथ्वी में बहुत कम मात्र में पाया जाता है और दुनिया भर में केवल 19 देशों में इसकी खुदाई होती है । यूरेनियम 235 जो कि मुख्यतः ऊष्मा उत्पन्न करता है , का प्रयोग अंतिम रूप से विद्युत् टरबाइन को चलने में उपयोग किया जाता है और इसी से अन्ततः बिजली का उत्पादन होता है ।

परमाणु ऊर्जा दुनिया की ऊर्जा का कुल 6% और दुनिया की बिजली का 13-14% उत्पन्न करती है। परमाणु ऊर्जा उत्पादन ,संभावित खतरनाक रेडियोधर्मी संदूषण के साथ जुड़ा हुआ है क्योंकि यह अस्थिर तत्वों पर निर्भर करता है |  विशेष रूप से, दुनिया भर में हर साल परमाणु बिजली की सुविधा के अनुसार लगभग निम्न स्तर पर 200,000 मीट्रिक टन और मध्यवर्ती स्तर अपशिष्ट (LILW) और उच्च स्तर अपशिष्ट (HLW) (अपशिष्ट के रूप में नामित ईंधन खर्च सहित) के 10,000 मीट्रिक टन का उत्पादन करता है ।

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