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जैन तीर्थंकर, उनके प्रतीक चिन्ह एवं शिष्यों की सूची

जैन धर्म की स्थापना भारत के पहले चक्रवर्ती राजा भरत के पिता ऋषभदेव ने की थी| विष्णु पुराण और भागवत गीता में ऋषभदेव को नारायण के अवतार के रूप में वर्णन किया गया है। ऋषभदेव के बाद जैन धर्मं में 23 अन्य तीर्थंकर हुए| जैन धर्म 24 वें तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर के समय में अधिक लोकप्रिय हुआ| यहाँ हम जैन तीर्थंकरों, उनके प्रतीक चिन्ह एवं शिष्यों की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|
Oct 20, 2016 10:05 IST
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जैन धर्म की स्थापना भारत के पहले चक्रवर्ती राजा भरत के पिता ऋषभदेव ने की थी| विष्णु पुराण और भागवत गीता में ऋषभदेव को नारायण के अवतार के रूप में वर्णन किया गया है। ऋषभदेव के बाद जैन धर्मं में 23 अन्य तीर्थंकर हुए| जैन धर्म 24 वें तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर के समय में अधिक लोकप्रिय हुआ|

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यहाँ हम जैन तीर्थंकरों, उनके प्रतीक चिन्ह एवं शिष्यों की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

जैन तीर्थंकर, उनके प्रतीक चिन्ह एवं शिष्यों की सूची:

तीर्थंकर

प्रतीक चिन्ह

शिष्य

भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ)

सांड या बैल पुंडरिक

ब्राह्मी

अजितनाथ

हाथी सिंहसेना

फल्गु

सम्भवनाथ

घोड़ा चारू

श्यामा

अभिनन्दननाथ

बन्दर वज्रनाभा

अजिता

सुमतिनाथ

चकवा या लाल हंस

काश्यपी

पद्मप्रभु

कमल प्रद्योतना

रति

सुपार्श्वनाथ

स्वस्तिक विदिर्भा

सोमा

चन्द्रप्रभु

चन्द्रमा दिन्ना

सुमना

पुष्पदन्त

मगरमच्छ वाराहक

वारूणी

शीतलनाथ

कल्पवृक्ष

सुजसा

श्रेयान्सनाथ

गैंडा कश्यप

धरणी

वासुपुज्य

भैंस सुभूमा

धरणी

विमलनाथ

सूअर मंडरा

धारा

अनन्तनाथ

साही जस

पद्मा

धर्मनाथ

वज्रदण्ड अरिष्ट

अर्थशिवा

शांतिनाथ

हिरण चक्रयुद्ध

सूची

कुन्थुनाथ

बकरी संबा

दामिनी

अरहनाथ

मछली कुम्भ

रक्षिता

मल्लिनाथ

कलश अभिक्षक

बन्धुमति

मुनिसुव्रतनाथ

कछुआ मल्लि

पुष्पावती

नमिनाथ

नीलकमल शुभ

अनिला

नेमिनाथ

शंख वारादत्ता

यक्षदिन्ना

पारसनाथ

सर्प आर्यदिन्ना

पुष्पचूड़ा

महावीर

सिंह इन्द्रभूति

चन्द्रबाला

सभी तीर्थंकरों का संबंध क्षत्रिय कबीले और शाही परिवार से था| जैन धर्म के अनुसार, मोक्ष या निर्वाण की प्राप्ति तीर्थंकरों की सबसे महत्वपूर्ण इच्छा थी|

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