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जैन धर्म के तीर्थंकर पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी सेट I

विश्व के सबसे प्राचीन धर्म जैन धर्म को श्रमणों का धर्म कहा जाता है। जैन धर्म का संस्थापक ऋषभ देव को माना जाता है, जो जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे और भारत के चक्रवर्ती सम्राट भरत के पिता थे। इस लेख में हमने जैन धर्म के तीर्थंकर पर आधारित 10 सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी दिया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
Jan 21, 2019 13:21 IST
    GK Quiz on Ancient Indian History: Jain Dharma and Tirthankar Set I HN

    विश्व के सबसे प्राचीन धर्म जैन धर्म को श्रमणों का धर्म कहा जाता है। जैन धर्म का संस्थापक ऋषभ देव को माना जाता है, जो जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे और भारत के चक्रवर्ती सम्राट भरत के पिता थे। जैन पुराणों के अनुसार जो संसार सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते है, वह तीर्थंकर कहलाते हैं।

    1. निम्नलिखित में से किस जैन तीर्थंकर को जैन साहित्य में प्रजापति, आदिब्रह्मा और आदिनाथ के रूप चित्रित किया गया है?

    A. ऋषभनाथ

    B. अजीतनाथ

    C. सम्भव नाथ

    D. अभिनंदन नाथ

    Ans: A

    Explanation: ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। ऋषभदेव जी को आदिनाथ भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम दिगम्बर जैन मुनि थे। इसलिए, A सही विकल्प है।

    2. ऋषभनाथ को आदिब्रह्मा क्यों बोला जाता है?

    A. अपने लंबे कद की वजह से

    B. सबसे पहले मोक्ष मार्ग बताने की वजह से

    C. धार्मिक रूपांतरण करने की वजह से

    D. आजीविका का मार्ग दिखाने की वजह से

    Ans: B

    Explanation: जैन धर्म के धर्मोपदेशक तीर्थंकर या जिन कहलाते हैं। जैन धर्म के सबसे पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थें जिन्हें ऋषभनाथ, बृषभदेव या आदिनाथ भी कहा जाता है। इनको आदिब्रह्मा भी बोला जाता है क्योंकी ये पहले जैन तीर्थंकर थे जिन्होंने मोक्ष मार्ग बताया था। इसलिए, B सही विकल्प है।

    3. निम्नलिखित में से कौन सा प्रतीक चिह्न ऋषभदेव तीर्थंकर का है?

    A. गाय

    B. बैल

    C. हाथी

    D. टाइगर

    Ans: B

    Explanation: ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। इनका प्रतीक चिह्न बैल है। इसलिए, B सही विकल्प है।

    4. अपने दाहिने पैर के निशान के कारण ऋषभनाथ तीर्थंकर को क्या नाम दिया गया था?

    A. हिरण्यगर्भ

    B. प्रजापति

    C. ऋषभ

    D. वृहद देव

    Ans: C

    Explanation: ऋषभनाथ तीर्थंकर दाहिने पैर पर बैल के निशान की वजह से इनको ऋषभ नाम दिया गया था। इसलिए, C सही विकल्प है।

    5. ऋषभनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम क्या था?

    A. नाभिराय

    B. सम्भवनाथ

    C. सुमितनाथ

    D. वासुपूज्य

    Ans: A

    Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, ऋषभनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम राजा नाभिराज था। इसलिए, A सही विकल्प है।

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    6. अपने पिता नाभिराय के कारण ऋषभनाथ तीर्थंकर को क्या नाम दिया गया था?

    A. धर्म नाथ

    B. अनंतनाथ

    C. चन्द्र प्रभु

    D. नभिसुनु

    Ans: D

    Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, ऋषभनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम राजा नाभिराज था और अपने पिता नाभिराय नाम के कारण ऋषभनाथ तीर्थंकर को नभिसुनु भी बोला जाता था। इसलिए, D सही विकल्प है।

    7. ऋषभनाथ की माता का नाम क्या था?

    A. तारा

    B. श्रेमेस्था

    C.  मरुदेवी

    D. अनुराधा

    Ans: C

    Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, ऋषभनाथ की माता का महारानी मरूदेवी नाम था। इसलिए, C सही विकल्प है। 

    8. निम्नलिखित में से कौन सी शिक्षा ऋषभनाथ द्वारा युग के आदि में लोगों को दी गई थी?

    A. कृषि

    B. मासी

    C. असी

    D. उपरोक्त सभी

    Ans: D

    Explanation: कुलकरों की कुल परंपरा के सातवें कुलकर नाभिराज और उनकी पत्नी मरुदेवी से ऋषभदेव का जन्म चैत्र कृष्ण की अष्टमी-नवमी को अयोध्या में हुआ था। इन्होने युग के आदि में लोगों को कृषि, मासी और असी जैसे विषयों पर शिक्षा दी था। इसलिए, D सही विकल्प है। 

    9. मसि का अर्थ क्या है?

    A. अध्यापन

    B. रक्षा

    C. कृषि

    D. बिजनेस

    Ans: A

    Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, मसि का शाब्दिक अर्थ अध्यापन होता है। इसलिए, A सही विकल्प है। 

    10. युग के आदि में ऋषभनाथ द्वारा कृषि, स्याही, तलवार, शिल्प और सेवा के अलावा अंतिम कर्म पर किस विषय पर शिक्षा दिया गया था?

    A. व्यापार

    B. मत्स्य

    C. युद्ध

    D. उपरोक्त सभी

    Ans: A

    Explanation: युग के आदि में भगवान आदिनाथ का जन्म हुआ था इसीलिए भगवान ऋषभनाथ को आदिनाथ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने इस सृष्टि को असि, मसि,विद्या,वाणिज्य और शिल्पकला की तालीम दी और संसार से वैराग्य धारण कर अंत में अष्टापद से मोक्ष अर्थात निर्वाण की प्राप्ति की। । इसलिए, A सही विकल्प है।

    प्राचीन भारत की क्षत्रप प्रणाली पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

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