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जैवनाशक (Biocide) और कृन्तकनाशक (Rodenticides) का प्रयोग किसलिए किया जाता है?

जैवनाशक (Biocide) एक सक्रिए रासायनिक अणु है, जिसका प्रयोग जैवनाशी उत्पाद में जीवाणुओं की वृद्धि को नियंत्रित करने या उन्हें मारने के लिए किया जाता है। ब्लीच, एथिल एल्कोहॉल, नमक, आयोडीन, पेरॉक्साइड आदि आम जैवनाशक हैं। कृन्तकनाशी (Rodenticides) वैसे रसायन होते हैं, जिनका प्रयोग फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कृन्तकों, जैसे-चूहों  को मारने के लिए किया जाता है।
Mar 17, 2016 17:21 IST
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जैवनाशक (Biocide) जीवों के लिए एक जहरीला पदार्थ है, जिसका प्रयोग जैवनाशी उत्पाद (Biocidal Product) में जीवाणु (Bacteria) की वृद्धि को नियंत्रित करने या उन्हें मारने के लिए किया जाता है, जबकि कृन्तकनाशी (Rodenticides) वैसे रसायन होते हैं जिनका प्रयोग फसलों में कृन्तकों (Rodents)  को मारने के लिए किया जाता है।

Jagranjosh

जैवनाशक

जैवनाशक एक सक्रिए रासायनिक अणु है, जिसका प्रयोग जैवनाशी उत्पाद में जीवाणु (Bacteria) की वृद्धि को नियंत्रित करने या उन्हें मारने के लिए किया जाता है|

जैवनाशक के कार्य

  • जैवनाशक वैसे रसायनिक कारक (Agents) होते हैं, जिनका प्रयोग स्वास्थ्य एवं मृदा की रक्षा हेतु सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) को मारने के लिए किया जाता है। ब्लीच, एथिल एल्कोहॉल, नमक, आयोडीन, पेरॉक्साइड आदि कुछ ऐसे उत्पाद हैं, जिनमें जैवनाशक पाये जाते हैं।
  • जीवाणु को मारने के लिए रोगाणुरोधी/सूक्ष्मजीवीरोधी (Antimicrobial) का प्रयोग किया जाता है, लेकिन कई बार उनके गुणक स्वभाव (Multiplying Nature) के कारण वे उन्हें मारने में असमर्थ रहते हैं। ऐसे में जैवनाशकों का प्रयोग किया जाता है।
  • कई कार्य करने वाले जीवाणु को मारने के लिए, अलग–अलग रूपों में मिलाए गए जैवनाशकों का प्रयोग प्रभावकारिता को कम करने में किया जाता है। जैवनाशी उत्पादों में कई अणु होते हैं, जो जीवाणु के कार्यप्रणाली को नियंत्रित कर सकते हैं। मिलाए जाने कुछ उत्पाद, जैसे-आर्द्रक (Surfactants) और झिल्ली पारगम्यक (Membrane Permeabilisers), जीवाणु की प्रभावकारिता को कम कर देते हैं।

जैवनाशकों के उपयोग

  • जैवनाशकों का प्रयोग कीटाणुनाशक (Disinfectants) या रोगाणु-रोधक (Antiseptics) के तौर पर किया जा सकता है। इसका मानव शरीर पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। 
  • खाद्य उत्पादों में इन्हें संरक्षक (Preservatives )या सूक्ष्मजीवीरोधी (Antimicrobials) के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • जीवाणु या कवक को मारने के गुण के कारण जैवनाशक सौंदर्य उत्पादों को बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।
  •  कपड़ों को जीवाणु के संक्रमण से बचाने के लिए भी जीवनाशकों का प्रयोग किया जाता है। सिंथेटिक कपड़ों में ट्रोकोल्सन (Trocolson) मुख्य घटक है।
  • जैवनाशकों का प्रयोग पशु चारा रक्षक (Animal Feed Preservatives) के रूप में किया जाता है क्योंकि यह चारे को सूक्ष्मजीवों के कारण से खराब होने से बचाता है।
  • जैवनाशकों का प्रयोग मछली पालन और पशु खाद्य मूल (Animal Food Origin)  के तौर पर किया जाता है।
  • पानी के उपचार के लिए भी अब जैवनाशकों को पसंद किया जाता है, क्योंकि पूर्व में इस्तेमाल किए जाने वाले क्लोरीन के दुष्प्रभाव (Side Effects) भी होते हैं।

कृन्तकनाशी

ये वैसे रसायन होते हैं, जिनका प्रयोग फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कृन्तकों, जैसे-चूहों, को मारने के लिए किया जाता है। कृन्तक खाद्य उत्पादों, भवनों और फसलों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। कृन्तकनाशियों को आम तौर पर इस तरह बनाया जाता है कि वे कृन्तकों को अपनी ओर आकर्षित कर सकें।

कृन्तकनाशी के प्रकार

  • स्कंदकरोधी (Anti Coagulant): ये ऐसे कृन्तकनाशी हैं, जो रक्त के थक्के को बनने से रोकते हैं। ब्रोमाडीयोलोन, क्लोरोफासीनोन, डिफेथिएलोन, ब्रोडिफाकम सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ स्कंदरोधी कृन्तकनाशी हैं।
  • गैरस्कंदरोधी (Non Anti-Coagulant): कुछ स्कंदरोधी कृन्तकनाशी अलग तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं। उनमें से कुछ हैं: जिंक, फॉस्फाइड, ब्रोमेथालिन (bromethalin), कॉलेकैल्सिफेरॉल (cholecalciferol)और स्ट्रीक्नीन (strychnine)।

ज्यादातर कृन्तकनाशी जहरीले होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ का स्वास्थ्य या त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। फंसाने (trapping ) जैसी पद्धतियों के प्रयोग द्वारा कृन्तकनाशी का प्रयोग प्रतिबंधित है। ग्लू बोर्ड ट्रैप (Glue board trap) फंसाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले गैरविषाक्त तरीकों में से एक है।

कृन्तकनाशी कृन्तकों को मारता है। ये कृन्तक फसलों को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि अगर उन्हें नहीं हटाया गया तो ये सड़ जाएंगे और मिट्टी में मिल कर प्रतिकूल प्रभाव पैदा कर सकते हैं। हालांकि, कृन्तकनाशी तैयार करने में सावधानियाँ बरती जाती हैं।

कम विषाक्त कृन्तकनाशी

कम विषाक्त कृन्तकनाशी में 500 से 5000 किग्रा. शरीर के भार के बीच LD50 होता है और इसमें रेड स्क्विल (Red Squill), नॉर्म बाइड्स (Norm Bides) और वारफारिन (Warfarin) प्रकार के कृन्तकनाशी होते हैं।

  • रेड स्क्विलः इसमें कई प्रकार के यौगिक होते हैं, जिनके गुण डिजिटालिस ग्लाइकोसाइड्स (Digitalis Glycosides) के जैसे ही होते हैं। वमन गुणों (Emetic Properties) के कारण उनमें अवशोषण और मारने की क्षमता कम होती है। रेड स्क्विल मानव विषाक्तता से जुड़ा हुआ नहीं है।
  • नॉर्म बाइडः इसका प्रयोग सिर्फ चूहों पर किया जाता है। इसमें इस्कीमिक नेक्रोसिस (Ischaemic Necrosis) होता है, जो सिर्फ चूहों में पाया जाता है। इसकी थोड़ी सी खुराक ही बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के चूहों को मार सकती है।
  • हेमरिज (Haemorrhage): यह स्कंदकरोधी कृन्तकनाशी का प्रकार है, जो कृन्तकों के रक्तस्राव (Bleeding) का कारण नहीं बनता है। कम विषाक्तता के कारण इनका प्रयोग बार– बार किया जा सकता है।

कृन्तकनाशी कीटनाशक (Pesticides) होते हैं और इनका इस्तेमाल कीटनियंत्रक (Pest Controller) के रूप में होता है और इसका अनुमोदन चिकित्सा वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है। हालांकि, विषाक्तता महत्वपूर्ण कारक है, जिसे प्रयोग से पहले मापा जाना चाहिए। जिन कृन्तकनाशकों के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती, उनकी खुराक फसलों के लिए खतरनाक साबित होती है। इसके बाद फसलों से कृन्तकों को हटाने के लिए फंसाने वाली पद्धति (Trapping methods) बहुत अच्छी होनी चाहिए। कृन्तकों का रक्तस्राव मिट्टी के साथ मिश्रित नहीं चाहिए और इससे बचने के लिए उचित उपाय करने चाहिए।