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टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (मुंबई और जेएनपीटी हार्बर)

5 जून 2015 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीटी), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) और न्हावा तथा उरण में ओएनजीसी की सुविधा के लिए भारत में अपने तरह के पहले टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (ओएसआरसी) का उद्धाटन किया। इस केंद्र की स्थापना के पीछे का उद्देश्य समुद्री पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में तेल बहाव का पता लगाना और रिपोर्टिंग के लिए उपयुक्त और प्रभावी प्रणाली विकसित करना है ।
Dec 23, 2015 15:17 IST
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5 जून 2015 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीटी), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) और न्हावा तथा उरण में ओएनजीसी की सुविधा के लिए भारत में अपने तरह के पहले टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (ओएसआरसी) का उद्धाटन किया।

पहले टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर केंद्र की स्थापना के पीछे का उद्देश्य समुद्री पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में तेल बहाव का पता लगाना और रिपोर्टिंग के लिए उपयुक्त और प्रभावी प्रणाली विकसित करना है ।

ओएसआर केंद्र तेल नियंत्रण और प्रदूषण से निपटने के लिए त्वरित और उचित प्रतिक्रिया की तकनीक को सुनिश्चित करेगा तथा एक पर्यावरणीय स्वीकार्य ढंग से बरामद सामग्री का निपटारा करेगा। सुविधाओं में विभिन्न योजनाएं जैसे आकस्मिक योजना, स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण योजना भी शामिल हैं।

इस केंद्र की स्थापना का उद्देश्य समुद्री पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में तेल बहाव का पता लगाना और रिपोर्टिंग के लिए उपयुक्त और प्रभावी प्रणाली विकसित करना है ।

ओएसआरसी की मुख्य विशेषताएं:

700 टन तक तेल से भरे हुए टीयर I की सुरक्षा करने और तेल विस्तार के लिए, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा कल्याण व समुद्री पर्यावरण की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित कराने के परिचालन में ओएसआरसी राज्य के अत्याधुनिक उपकरणों के साथ तत्परता से सुसज्जित है।

  • भाग लेने वाली तेल कंपनियों (POCs) के द्वारा सुविधा का वित्त- पोषण किया जाता है और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी मुंबई पोर्ट ट्रस्ट केंद्र की है।
  • इस पर 24/7 के आधार पर निगरानी रखी जाएगी और तेल रिसाव के बचाव के लिए यह कुशल और प्रशिक्षित कर्मियों तथा वायरलैस जैसी संचार सुविधाओं से सुसज्जित है।
  • यह केंद्र तेल नियंत्रण और प्रदूषण से निपटने के लिए त्वरित और उचित प्रतिक्रिया की तकनीक को सुनिश्चित करेगा तथा एक पर्यावरणीय स्वीकार्य ढंग से बरामद सामग्री का निपटारा करेगा।
  • इसमें विभिन्न योजनाएं जैसे आकस्मिक योजना, स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण योजना भी शामिल हैं।
  • तेल फैलने की स्थिति में इसे सीधे शिपिंग द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।
  • चेतावनी मिलने के बाद अधिकतम प्रतिक्रिया का समय 30-40 मिनट का होगा।
  • डेनमार्क की कंपनी द्वारा उपकरणों की आपूर्ति की गई है जो इस क्षेत्र में अग्रणी मानी है।
  • यह और मुंबई के बंदरगाह के आसपास और पानी के सामने 400 वर्ग किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र को कवर करेगा।

पृष्ठभूमि:

यद्यपि नेशनल ऑयल स्पिल डिजास्टर कॉनटिंनगेसी प्लान (एनओएस-डीसीपी) को भारतीय तटरक्षक बल द्वारा तैयार किया गया था और 4 नवंबर, 1993 को भारत सरकार ने इसे मंजूरी दी थी लेकिन 2011 में एमवी चित्रा आपदा जैसी प्रतिक्रिया केंद्र के बाद से इसकी जरूरत और ज्यादा महसूस की गयी।

आपदा में यह पाया गया कि इस प्रकार की कोई ओएसआर सुविधा नहीं होने के कारण समुद्र तट, समुद्री जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र में 800 मीट्रिक टन तेल रिसाव होने से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था।

टीयर -1 ऑइल स्पील (तेल रिसाव)

टीयर -1 तेल रिसाव तीन श्रेणियों के स्तर पर हुआ एक तेल रिसाव था। ये रिसाव हल्के होते हैं क्योंकि स्थानीयकृत क्षति आमतौर पर कंपनी के खुद की नजदीकी सुविधाओं के कारण होती हैं। ज्यादातर मामलों में, इस प्रकार के तेल रिसाव का कारण कंपनी की खुद की गतिविधियां रहीं हैं।