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दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) और आसियान

दक्षिण एशियाई वरीयता व्यापार समझौता (साप्टा) को 1995 में लागू किया गया। जो कि 2004 से साफ्टा में बदल गया था । इन दोनों समझौते का लक्ष्य दक्षिण एशिया में व्यापार संबंधी बाधाओं को दूर करना है और सार्क देशों के बीच अधिक उदार व्यापार व्यवस्था कायम किए जाने का प्रावधान है।
May 23, 2016 11:44 IST
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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित 12वें सार्क शिखर सम्मेलन (4–6 जनवरी, 2004) की सबसे मुख्य बात, ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया जाना रही । भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालद्वी, नेपाल और श्रीलंका के नेताओं ने दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) को बनाने पर सहमत हुए थे।

दक्षिण एशियाई अधिमान्य व्यापार समझौता (साप्टा) की जगह लेकर साफ्टा 1 जनवरी 2006 से प्रभावी हो गया। यह 7 दिसंबर 1995 से सार्क देशों के बीच काम कर रहा था। साप्टा 1995 में नई दिल्ली में आयोजित आठवें सार्क सम्मेलन की सफलता का परिणाम था जहां साप्टा की नई रियायती व्यापार प्रणाली को मंजूरी दी गई थी।

साफ्टा व्यापार एवं टैरिफ प्रतिबंधों के सभी प्रकारों को हटाने की अपेक्षा रखता है। आखिरकार यह आम मुद्रा के साथ साझा बाजार के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा। सार्क के सात सदस्य देशों ने 2016 तक 0– 5 फीसदी तक टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है। साफ्टा समझौता किसी भी देश को किसी भी समय इससे बाहर होने की अनुमति देता है।

दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संगठन (आसियान)

आसियान दक्षिण– पूर्व एशियाई देशों का संघ है। इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, सिंगापुर और थाइलैंड ने मिलकर इस संघ की स्थापना 8 अगस्त 1967 को की थी। ब्रुनेई 1984 में आसियान में शामिल हुआ था। जुलाई 1995 में वियतनाम को भी इसकी सदस्यता दी गई थी। लाओस और म्यांमार को इसकी सदस्यता 1997 में मिली। 30 अप्रैल 1999 को कंबोडिया भी आसियान के सदस्य देशों में शामिल हो गया। वर्तमान में, आसियान के दस सदस्य हैं– इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, कंबोडिया और म्यांमार। आसियान का उद्देश्य दक्षिण– पूर्व एशिया में आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के साथ– साथ इस क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित करना है। इसका मुख्यालय जकार्ता में है लेकिन आसियान का एक सचिव प्रत्येक सदस्य देश की राजधानी में होता है। आसियान के जनरल सेक्रेट्री का पद वर्णानुक्रम के अनुसार प्रत्येक सदस्य देशों के बीच, प्रत्येक दो वर्षों के बाद, घूमता है।

23 जुलाई 1996 को, आसियान ने भारत को सलाहकार का दर्जा दिया था। इसके अलावा भारत, चीन और रूस को भी यह दर्जा प्राप्त है। अमेरिका को यह दर्जा पहले मिला था। भारत अपने भौगोलिक स्थिति की वजह से आसियान का सदस्य नहीं बन सकता। भारत दक्षिण एशिया का हिस्सा है लेकिन आसियान दक्षिण– पूर्वी एशियाई देशों का संगठन है। दस सदस्यों वाले दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के इस संघ (आसियान) के नेता सिंगापुर में बैठक करते हैं।

आसियान 2015 तक 'मुक्त व्यापार क्षेत्रएफटीए' बनाएगा

दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) ने सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण के लिए कदम उठाने शुरु कर दिए हैं ताकि वह चीन एवं भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं से प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बना सके। इंडोनेशिया, थाइलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, ब्रुनेई, वियतनाम, म्यांमार, कंबोडिया औऱ लाओ के समूह आसियान ने आखिरकार प्रस्तावित आसियान आर्थिक समुदाय के ब्लूप्रिंट पर हस्ताक्षर करने का फैसला कर लिया है जो 2015 में प्रभावी होगा। इस ब्लूप्रिंट में आसियान को वस्तुओँ, सेवाओं, निवेश और प्रतिभाशाली मानवशक्ति के साथ 550 मिलियन से अधिक लोगों के लिए एकल बाजार में बदलने हेतु विशेष लक्ष्यों को निर्धारित किया जाएगा।
आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए आसियान ने कई योजनाएं बनाई हैं। इनमें 2015 तक एकल बाजार का बनाया जाना, इलाके के देशों के साथ मुक्त आकाश संधि और कई एफटीए की शुरुआत शामिल है। इलाके में एकल बाजार को बढ़ावा देने के काम में आसियान ने दिसंबर 2008 तक ओपन स्काईज एग्रीमेंट (मुक्त आकाश समझौता) को लागू करने का फैसला किया है जिसके अनुसार सदस्य देशों के एयरलाइन्स (विमान कंपनियां) एक दूसरे की राजधानी,शहरों के लिए उड़ान भर सकती हैं। इस क्षेत्र में 2015 तक उदारीकरण का विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्र की विमान कंपनियां आसियान देशों के बीच किसी भी गंतव्य के लिए उड़ान भर सकें।