दुनिया भर में सरकारों द्वारा लगाये गए 11 अजीब प्रतिबंध

विश्व के विभिन्न देशों ने अपनी जरुरत और संस्कृति के हिसाब से कुछ सेवाओं, खानपान और फैशन पर प्रतिबन्ध लगाया हुआ है. कुछ देशों ने जीन्स को बैन किया हुआ है तो कुछ ने गूगल और फेसबुक और ऊबर जैसी कंपनियों पर भी प्रतिबन्ध लगाया हुआ है. आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि किन देशों ने किस चीज पर बैन लगाया हुआ है.
May 3, 2019 18:29 IST

    विश्व में लगाये गए कुछ अजीब बैन इस प्रकार हैं;

    1. उत्तरी कोरिया में नीली जींस बैन: उत्तरी कोरिया अपने सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन के तानाशाही भरे निर्णयों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं.

    किम जोंग-उन ने अपने देश की संस्कृति को बढ़ावा देने और संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ जारी शीत युद्ध के कारण अपने देश में 2016 से पश्चिमी सभ्यता के प्रतीक “नीली जीन्स” के पहनने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था, हालाँकि यहाँ पर काली जीन्स को पहनने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है.

    ध्यान रहे कि उत्तरी कोरिया में विदेशी पर्यटकों के लिए नीली जीन्स पहनने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है.

    उत्तर कोरिया में प्रेस और अन्य वेबसाइट को बहुत आजादी हासिल नहीं है उपर्युक्त फैक्ट वहां गए पर्यटकों के अनुभव के आधार बताया गया है.

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    2.  चीन में गूगल बैन: चीन ने वर्ष 2009 में गूगल को अपने देश में बैन कर दिया था.

    इसका तात्कालिक कारण यह था कि यूट्यूब पर एक वीडियो दिखाया जा रहा था जिसमें चीनी सैनिक तिब्बती व्यक्तियों को पीटते हुए दिखाई दे रहे थे.

    इसके अलावा चीन ने गूगल को इसलिए भी बैन किया है क्योंकि गूगल एक अमेरिकी कंपनी है और चीन को लगता है कि यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी अमेरिका को भेजता है.

    ज्ञातव्य है कि चीन में गूगल की जगह पर उसका खुद का सर्च इंजन बायडू (Baidu) चलता है.

    baidu china

    3. भारत में जारवा जनजाति से आम लोगों की मुलाकात पर बैन: भारत के केंद्र शासित प्रदेश अंडमान में रह रही "जारवा जनजाति" (Jarawa Tribe) मानव सभ्यता की सबसे पुरानी जनजातियों में से एक है. अंडमान की "जारवा जनजाति" हिन्द महासागर के टापुओं पर पिछले 55,000 वर्षों से निवास कर रही है. जारवा जनजाति के लोग हजारों साल पहले अफ्रीका से यहां आकर बस गये थे. सरकार ने इस जनजाति के लोगों से आम नागरिकों या पर्यटकों के मिलने पर पाबन्दी लगा रखी है क्योंकि सरकार चाहती है कि इन लोगों की संस्कृति पर आधुनिक संस्कृति प्रभाव ना पड़े.

    सरकार ने यह बैन "अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (पर्यटन व्यापार) विनियमन, 2014" के आधार पर लगाया है.

    jarwa TRIBE andaman

    4. बुल्गारिया में ऊबर बैन: अगली बार जब आप बुल्गारिया में हों, तो आप यह उम्मीद ना करें कि ऊबर आपको हवाई-अड्डा से पिक और ड्राप की सुविधा देगा.

    ऊबर पर बैन लगाने का फैसला वहां के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2015 में लिया गया था. ऊबर ने यहाँ पर ड्राइवर्स को बिना ऑफिसियल टैक्सी लाइसेंस के टैक्सी चलाने की अनुमति दी थी. इस कारण इसे पूरे देश में बैन कर दिया गया था.

    ऊबर; अपने ड्राइवरों को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के रूप में भुगतान करता है, कर्मचारियों के रूप में नहीं. इसके कारण ऊबर को कर्मचारी की किसी भी तरह की जिम्मेदारी भी नहीं उठानी पड़ती है. जिससे उसे टैक्स, ओवरटाइम जैसे अन्य बेनेफिट्स नहीं चुकाने के कारण बहुत फायदा होता है इसी कारण इसे कई अन्य देशों ने बैन कर दिया है.

    बुल्गारिया के अलावा ऊबर को हंगरी, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क ने भी बैन कर दिया है.

    5. यूरोप के कई देशों में बुर्का बैन: देश में सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए यूरोप के बहुत से देशों ने  मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. बुर्का पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला यूरोपीय देश फ्रांस था.फ़्रांस ने यह कदम यह 2004 में उठाया था. इसके बाद बेल्जियम, स्विट्ज़रलैंड, स्पेन, इटली, टर्की और नीदरलैंड ने भी अपने यहाँ बुर्का पहनने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है.

    6. विश्व में प्लास्टिक बैन: विश्व के बहुत से देशों ने प्लास्टिक के कारण बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए या तो अपने देश में प्लाटिक को पूरी तरह से बैन कर दिया है या उस पर भारी कर लगा दिया है. अफ्रीका महाद्वीप के 15 देशों ने प्लास्टिक बैन कर दिया है. यूरोप के देश डेनमार्क ने सबसे पहले 1994 में प्लास्टिक पर टैक्स लगाया था. एशिया में चीन ने 2008 ओलंपिक खेलों से पहले अपने देश में प्लास्टिक पर बैन लगा दिया था. एशिया के अन्य देशों ने या तो प्लास्टिक को बैन कर दिया है या उस पर भारी टैक्स लगा दिया है. ये देश हैं; बांग्लादेश, कंबोडिया, हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया और ताइवान.

    7. सिंगापुर में च्यूइंग गम बैन:  दक्षिणपूर्व एशिया में यह एक देश है जहां लोग च्यूइंग गम चबाते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है. यहाँ पर केवल चिकित्सकीय कामों के लिए च्यूइंग गम खाने की अनुमति है.

    यहाँ की सरकार ने 2004 में च्यूइंग गम चबाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. इस देश में साफ़ सफाई को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यहाँ पर च्यूइंग गम के अलावा थूकने, नाक छिड़कने, कहीं पर पेशाब करने पर भी प्रतिबन्ध लगाया हुआ है. यदि यह एक सार्वजनिक शौचालय है, तो आपको इसे फ्लश करने की आवश्यकता है.

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    8. भूटान में स्मोकिंग बैन: 22 फरवरी 2005 को भूटान में सभी सार्वजनिक स्थानों में धूम्रपान अवैध हो गया है. सार्वजनिक स्थानों में स्मोकिंग बैन करने वाला भूटान दुनिया का पहला देश है. भूटान का तंबाकू नियंत्रण अधिनियम 16 जून, 2010 को संसद द्वारा पारित किया गया था.

    9. नॉर्वे में रेडियो प्रसारण पर बैन:

    एफएम रेडियो प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने वाला नॉर्वे पहला देश बन गया. 11 जनवरी 2017 को नॉर्वे एनालॉग फ्रीक्वेंसी के माध्यम से प्रसारित होने वाले रेडियो प्रसारण रोक दिया है. एफएम रेडियो प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने के पीछे मुख्य कारण पूरी आबादी को बेहतर रेडियो सेवा (डिजिटल सिग्नल के माध्यम से) प्रदान करने का सरकार का प्रयास है.

    10. मलेशिया में पीले कपड़े पहनने पर बैन -

    फरवरी 2016 में, प्रधानमंत्री नजीब रजाक के इस्तीफे की मांग करते हुए पीली टी-शर्ट पहनने वाले प्रदर्शनकारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया था. जिसके कारण देश के गृह मंत्री अहमद जहिद हामिदी ने पीले रंग के कपड़े पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था. अब मलेशिया में पीले कपडे विरोध के प्रतीक बन गये हैं जैसे भारत में काले कपड़े पहनना विरोध का प्रतीक माना जाता है.

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    11. ईरान में पश्चिमी हेयर स्टाइल पर बैन:

    ईरान में सरकार ने वर्ष 2010 में पश्चिमी स्टाइल के बाल बांधने या सजाने पर रोक लगा दी है. विशेष तौर से स्पाइक्स, चोटी और मलेट टाइप के स्टाइल वाले बाल रखने की सख्त मनाही है. इतना ही नहीं सरकार ने सैलूनों को कैटलॉग भी भेजे हैं जिनमें यह साफ बताया गया है कि किस तरह के बाल काटने हैं और किस तरह के नहीं. जो भी इस नियम तोड़ता है उसको कैद या जुर्माना भुगतना होगा.

    लेख में ऊपर दिए गए प्रतिबन्ध इस बात की पुष्टि करते हैं कि कुछ देशों की सरकारें इस तरह से शासन करतीं हैं कि वो ये भी तय करना चाहतीं हैं कि लोग क्या पहनें, क्या खाएं और किस तरह के कपडे पहनें. लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में इस तरह को कोई कानून नहीं है क्योंकि यहाँ के संविधान ने लोगों को मूलभूत अधिकार दिए हैं.

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