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पर्यावरण के क्षेत्र मे गैर सरकारी संगठन और वकालत संस्थान

हमारे देश मे कई सरकारी और गैर सरकारी संगठनो ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनो के रख रखाव मे बढ़ती रुचि के लिए नेतृत्व किया है। बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास संस्था (BNHS)/ समाज, विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारत के वन्य जीवन संस्थान, देहरादून इत्यादि कुछ प्रमुख संस्थाएं है जो पर्यावरण और वन्य जीवन संरक्षण के क्षेत्र मे तेजी से कार्य कर रहे है।
Dec 29, 2015 10:35 IST
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पूरे विश्व और भारत मे पर्यावरण को इसकी दुर्दशा से बचाने के लिए इस क्षेत्र मे बहुत सारे संस्थाएं और गैर सरकारी संगठन कार्य कर रहे है। कुछ भारतीय गैर सरकारी संगठन और संस्थाए निम्नलिखित है:

बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास सोसाइटी (बीएनएचएस), मुंबई: बीएनएचएस 1833 मे 6 सदस्यो की एक छोटी सी सोसाइटी के रूप मे प्रारम्भ हुई । वन्य जीवन नीति निर्माण, अनुसंधान, लोगो के लोकप्रिय प्रकाशन और कार्रवाई पर प्रभाव बहुआयामी समाज की अनूठी विशेषता बन चुकी है। यह भारत की सबसे पुरानी संरक्षण अनुसंधान पर आधारित गैर सरकारी संगठन है, और प्रजातियों एवं परिस्थितिकी तंत्र के (क्रान्ति) लड़ाई मे सबसे आगे काम किया है।

1. बीएनएचएस एक होर्नबिल नाम की लोकप्रिय पत्रिका का प्रकाशन करती है और इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध प्राकृतिक इतिहास पर पत्रिका का भी प्रकाशन करती है।

2. इसके अन्य प्रकाशनों मे पक्षियो पर सलीम अली की हस्तपुस्तिका, जेसी डैनियल की भारतीय सरीसृप की पुस्तक, एसएच प्रेटर की भारतीय स्तनधारियों की पुस्तक और पी वी बोल की बुक ऑफ इंडियन ट्री (भारतीय पेड़ो की पुस्तक) शामिल है।

प्रकृति के लिए विश्व व्यापी निधि (डबल्यूडबल्यूएफ़ –I), नई दिल्ली : डबल्यूडबल्यूएफ़ - I का आरंभ 1969 मे मुंबई मे हुआ था इसके बाद पूरे भारत मे कई शाखा कार्यालयो के साथ इसके मुख्यालय को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था। प्रारम्भ के वर्षो मे वन्य जीवन शिक्षा और जागरूकता पर ध्यान केन्द्रित था। यह स्कूल के बच्चो के लिए नेचर क्लब ऑफ इंडिया के कार्यक्रम सहित कई कार्यक्रम चलाता है और पर्यावरण और विकास मुद्दे के लिए विचार मंच और प्रकोष्ठ दल के रूप मे कार्य करता है।

विज्ञान और पर्यावरण के लिए केंद्र बिन्दु (सीएसई), नई दिल्ली : इस केंद्र के क्रिया कलापों मे आंदोलन का आयोजन, कार्यशालाओ और सम्मेलनों का आयोजन, और पर्यावरण से संबन्धित प्रकाशनों का उत्पादन करना शामिल है। इसने भारत के पर्यावरण की स्थिति पर प्रमुख लेखो का प्रकाशन किया है, यह पर्यावरण पर एक नागरिक के सूचना के रूप मे प्रस्तुत करने का अपनी तरह का पहला तरीका था। सीएसई भी ‘डाउन टू अर्थ’ नाम के लोकप्रिय पत्रिका का प्रकाशन करती है जो विज्ञान और पर्यावरण की पाक्षिक पत्रिका है।

सीपीआर पर्यावरण शिक्षा केंद्र (ईईसी), मद्रास : सीपीआर ईईसी की स्थापना 1988 मे हुई थी। यह पर्यावरण के प्रति जागरूकता के प्रसार के लिए कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करती है और और आम जनता के मध्य संरक्षण के प्रति रुचि पैदा करती है।

पर्यावरण शिक्षा केंद्र (सीईई), अहमदाबाद : पर्यावरण शिक्षा केंद्र, अहमदाबाद का आरंभ 1989 मे हुआ था। इसके पास पर्यावरण पर आधारित कार्यक्रमों की विस्तृत शृंखला है और कई प्रकार के शैक्षिक सामाग्री का उत्पादन करता है। पर्यावरण शिक्षा (टीईई) कार्यक्रम मे सीईई के प्रशिक्षण मे कई पर्यावरण शिक्षको को प्रशिक्षित किया गया।

भारती विद्यापीठ पर्यावरण शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (बीवीआईईईआर), पूणे : यह भारती विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय का एक हिस्सा है। इस संस्थान मे पीएचडी और पर्यावरण विज्ञान मे स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम है। यह पर्यावरण शिक्षा मे सेवारत शिक्षको के लिए एक उन्नत डिप्लोमा भी प्रदान करता है। यह बड़े स्तर के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करता है जिसके अंतर्गत 135 से अधिक विद्यालय आते है जिसमे ये शिक्षको को प्रशिक्षित करते है और पाक्षिक पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन करते है।

उत्तराखंड सेवा निधि (यूकेएसएन), अल्मोणा : यह संगठन एक केन्द्रीय संस्था है जो गैर सरकारी संगठनो को पर्यावरण से संबन्धित क्रियाकलापो के लिए धन की आवश्यकता के लिए सहता प्रदान करती है। इसका मुख्य कार्यक्रम शिक्षको को उनके स्थानीय विशिष्ट पर्यावरण शिक्षा कार्यपंजी कार्यक्रम के प्रयोग से सुनियोजित और प्रशिक्षित करना है।

कल्पवृक्ष, पूणे : यह गैर सरकारी संगठन प्रारम्भ मे दिल्ली मे आधारित, अब पुणे से काम कर रहा है और भारत के कई अन्य भागो मे सक्रिय है। कल्पवृक्ष शिक्षा और जागरूकता ; जांच और अनुसंधान ; प्रत्यक्ष कार्रवाई और पैरवी ; और पर्यावरण और विकास के मुद्दे के संबंध मे मुक़दमेबाज़ी जैसे विभिन्न (विषयों) मोर्चो पर कार्य करता है। कल्पवृक्ष 2003 मे विकासशील भारत के राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति के लिए जिम्मेदार था।

सलीम अली पक्षी विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास के केंद्र (एसएसीओएन), कोयम्बटूर : यह संस्थान डॉक्टर सलीम अली का सपना था जो केवल उनके निधन के बाद ही वास्तविकता बना । वह स्थायी तौर पर प्रतिबद्ध संरक्षण वैज्ञानिको के समूह को समर्थन देना चाहते थे। प्रारम्भ मे बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास संस्था (बीएनएचएस) के एक शाखा के रूप मे स्थापित किया गया जो कि बाद मे 1990 मे कोयम्बटूर स्थित एक स्वतंत्र संगठन के रूप मे विकसित हुआ।

भारतीय वन्यजीव संस्था (डबल्यूआईआई), देहरादून : यह संस्था 1982 मे वन विभाग के अधिकारियों और वन्य जीव प्रबंधन मे अनुसंधान के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान के रूप मे स्थापित हुई थी। इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रकाशन ‘भारत के लिए वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र तंत्र की योजना’ (रोडर्स एवं पनवर, 1988) है। इसके पास एक पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) इकाई भी है। यह पर्यावरण के विकास, वन्यजीव जीव विज्ञान, वास प्रबंधन और प्राकृतिक विवेचन कर्मियों को प्रशिक्षित करता है।

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) : भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण की स्थापना 1890 मे कोलकाता के रॉयल बोटानिक गार्डेन मे मे हुई थी। हालाँकि, इसे 1939 के बाद कई वर्षो के लिए बंद कर दिया गया था और 1954 मे इसे पुनः खोला गया। 1952 मे बीएसआई के पुनर्निर्माण और इसके उद्देश्यों को निरूपित करने के लिए योजनाए बनाई गयी थी। 1955 तक बीएसआई का मुख्यालय कोयम्बटूर, शिलोंग, पुणे और देहरादून के क्षेत्रीय कार्यालय के साथ कलकत्ता मे था। 1962 और 1979 के बीच, कार्यालयो को इलाहाबाद, जोधपुर, पोर्ट ब्लेयर, इटानगर और गंगटोक मे स्थापित किया गया। वर्तमान मे बीएसआई के पास 9 क्षेत्रीय केंद्र है। यह अलग अलग क्षेत्रो मे संयंत्र संसाधनो का सर्वेक्षण करता है।

भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (ज़ेडएसआई) : ज़ेडएसआई की स्थापना 1916 मे हुई थी। इसका मुख्य जनादेश भारत मे जीव जन्तुओ का एक व्यवस्थित सर्वेक्षण करना था। इसके पास वर्षो से एकत्रित किए गए ‘नमूनो के प्रकार’ है जिसके आधार पर वर्षो तक हमारे पशुओ के जीवन का अध्ययन किया गया है। इसके मूल संग्रह कलकत्ता मे भारतीय संग्रहालय पर आधारित थे, जिसकी स्थापना 1875 मे हुई थी।

पर्यावरण अनुसंधान और शिक्षा केंद्र (सीईआरई) मुंबई आधारित एक अलाभकारी संगठन है, जो कार्रवाई उन्नमुख शिक्षा, जागरूकता और वकालत के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। सीईआरई की स्थापना 2002 मे डॉक्टर (श्रीमति) राशनेह एन पारदीवाला, एडीनबर्ग विश्वविद्यालय से परिस्थितिकी – वैज्ञानिक और श्रीमति किटयून रुस्तम, पर्यावरण शिक्षाविद के द्वारा की गई थी। सीईआरई कॉर्पोरेट स्थिरता और कार्बन प्रबंधन प्रणाली के क्षेत्र मे भी अग्रणी है जहाँ वे संगठनो को उनके फूटप्रिंट्स के नक्शे, अंतर्राष्ट्रीय रेपोर्टिंग मानको को पूरा करना, कम लागत कार्बन कटौती रणनीतियों को लागू करना, मे सहायता प्रदान करते है जो अधिक वित्तीय बचत को सुनिश्चित करती है और कर्मचारियो को  जागरूकता गतिविधियो मे संलग्न रखती है।

पर्यावरण सुरक्षा की नीव (एफ़ईएस) एक पंजीकृत गैर लाभ संगठन आनंद, गुजरात, भारत ग्रामीण समुदायो के केन्द्रित और सामुहिक प्रयासो के माध्यम से पारिस्थितिक रूप से देश के कमजोर, पदावनत और अधिकारहीन क्षेत्र की परिस्थितिकी बहाली और भूमि और जल संसाधनो का संरक्षण के बारे मे कार्य कर रही है। एफ़ईएस सार्वजनिक भूमि संसाधन संपत्ति के बहाली, प्रबंधन और प्रशासन मे सहायता के लिए 1986 से संलग्न है।