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पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक 2015

वाशिंगटन स्थित विश्व संसाधन संस्थान (WRI) द्वारा 20 मई 2015 को वर्ष 2015 का प्रथम पर्यावरण लोकतन्त्र सूचकांक जारी किया | सूचकांक में मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर 70 देशों में पर्यावरण लोकतंत्र का मूल्यांकन किया गया  है | सूचकांक मूल्यांकन करता है कि क्या सरकारें  पर्यावरण निर्णय लेने में पारदर्शिता, जवाबदेही, और नागरिक भागीदारी  को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कानूनों का पालन कर रहे हैं ।  पहले पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक में 70 देशों की सूची में भारत को  24 वां  स्थान मिला है |
Nov 17, 2015 15:03 IST
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वाशिंगटन स्थित विश्व संसाधन संस्थान (WRI) द्वारा 20 मई 2015 को वर्ष 2015 का प्रथम  पर्यावरण लोकतन्त्र सूचकांक जारी किया | सूचकांक में मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर 70 देशों में पर्यावरण लोकतंत्र का मूल्यांकन करता है |

पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक के बारे में:

पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक (ईडीआई) एक पर्यावरण के संदर्भ में प्रक्रियात्मक अधिकार को मापने के लिए विशेष रूप से बनाया गया प्रथम  व्यापक सूचकांक है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP ) बाली दिशानिर्देश , पर्यावरण संबंधी मामलों में न्याय करने के लिए जन भागीदारी और राष्ट्रीय कानून के विकास के लिए  राष्ट्रीय कानूनों का, अंतरराष्ट्रीय मानकों के सपेक्ष आकलन किया जा सकता है, जो पर्यावरण लोकतन्त्र सूचकांक प्रदान करते हैं |

सूचकांक मूल्यांकन करता है कि  क्या सरकारें  पर्यावरण निर्णय लेने में पारदर्शिता, जवाबदेही, और नागरिक भागीदारी  को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कानूनों का पालन हो रहा है । इसका आकलन व  विश्लेषण  140 से अधिक   अंतरराष्ट्रीय वकीलों और विशेषज्ञों द्वारा  किया गया  है।

पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक की मुख्य विशेषताएं:

I. लगभग 79% मूल्यांकित देशों में  जनता की भागीदारी को खराब रेटिंग्स मिली हैं जिसका कारण है कई राष्ट्र नागरिकों को  बुनियादी पर्यावरणीय जानकारी उपलब्ध कराने में पीछे रह गए हैं |

II. करीबन आधे देश (46 प्रतिशत) अपनी राजधानी का वायु गुणवत्ता से संबंधित किसी भी प्रकार डेटा का ऑनलाइन प्रदान नहीं करते हैं |

III.  दुनिया की 73%  देशों में, अदालतें पर्यावरण मामले की सुनवाई करते हैं । परंतु कुछ ही देशों में उपक्षित समूहों को मदद मिली है |

IV. लगभग 64% देश जिनके पास कानून के ऊपर किताबें हैं उन्होनें प्रदूषण उत्सर्जन या अपशिष्ट निर्वहन  पर किसी भी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जोकि  मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्रभावित करते हैं  |

V. केवल 14%  देशों में कानूनी तंत्र हैं जोकि महिलाओं को अदालतों में मदद पहुंचाते हैं (जब उनके पर्यावरण अधिकारों का उल्लंघन हो रहा होता है) |

VI. पर्यावरण सूचना के अधिकार को 93% मूल्यांकित देशों  में लागू किया गया है।.

पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक में कई अनूठी विशेषताएं शामिल हैं:

I. देश के बारे में विस्तृत जानकारी : देश में घटित घटनाएं देश के बारे में गहराई से जानकारी व गणना उपलब्ध कराते हैं जिसमें सामर्थ्य का संक्षिप्त विवरण होता है|

II. देश की तुलना : उपयोक्ता कई स्तरों पर देश  के प्रदर्शन की तुलना कर सकते हैं और पर्यावरण लोकतंत्र के उपायों पर डेटा डाउनलोड कर सकते हैं।

III.  श्रेणियाँ : देश पर्यावरण लोकतंत्र को प्राप्त करने में उनकी प्रगति के अनुसार अपने राष्ट्रीय कानूनों के आधार पर क्रमबद्ध हैं।

IV. सरकार की प्रतिक्रिया : देश में घटित प्रत्येक  घटना  सरकार को देश के मूल्यांकन पर प्रतिक्रिया  करने के लिए एक अवधि प्रदान करता है । सूचकांक में सभी देशों को  राय देने के लिए आमंत्रित किया जाता  है।

V. सार्वजनिक और नागरिक समाज के बीच वचनबद्धता : यह मंच सूचना और संवाद को साझा करने के लिए एक स्वतंत्र, सार्वजनिक जगह बनाता है।

देशों की रैंकिंग नीचे दी गई है:

20 मई 2015 को वाशिंगटन स्थित विश्व संसाधन संस्थान (WRI) द्वारा जारी पहले पर्यावरण लोकतंत्र सूचकांक (ईडीआई) में 70 देशों में से भारत का 24वां स्थान है जिसमें लिथुआनिया सबसे ऊपर है |

1. लिथुआनिया

2. लातविया

3. रूस

4. अमरीका

5. दक्षिण अफ्रीका

6. यूके

7. हंगरी

8. बुल्गारिया

9. पनामा

10. कोलम्बिया