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पाल साम्राज्य

पाल साम्राज्य का संस्थापक गोपाल था. उसने इस साम्राज्य की स्थापना 750 ईस्वी में की की थी.
Aug 1, 2014 12:34 IST
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पाल साम्राज्य का संस्थापक गोपाल था. उसने इस साम्राज्य की स्थापना 750 ईस्वी में की की थी. वह प्रारंभ में एक सरदार था लेकिन कालांतर में बंगाल का शासक बना. वास्तव में वह बंगाल का पहला बौद्ध शासक था. गौड़ साम्राज्य के कामरूप पर से प्रभुत्वा समाप्त होने के पश्चात् उसने कामरूप पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया. उसके मृत्यु के समय बंगाल और बिहार का अधिकांश भाग उसके साम्राज्य के अंतर्गत शामिल था. गोपाल को बिहार के ओदंतपुरी में एक बौद्ध मठ बनवाने का श्रेय प्राप्त है.

गोपाल के पश्चात् धर्मपाल उसका उत्तराधिकारी बना. उसने 770 ईस्वी से लेकर  810 ईस्वी तक शासन किया. उसके कार्यकाल में पाल साम्राज्य ने उत्तरी और पूर्वी भारत के अधिकांश भागों  में अपना अधिकार स्थापित किया था.

धर्मपाल ने गुर्जर-प्रतिहारो और राष्ट्र्कुटो के खिलाफ लम्बे काल तक संघर्ष किया था. गुर्जर शासक नागभट्ट द्वितीय से वह पराजित हुआ. उसने पाल साम्राज्य की महत्ता को लम्बे काल तक बनाये रखी और पाल साम्राज्य को बिहार और बंगाल के अधिकांश भागो तक विस्तृत किया.

धर्मपाल एक धर्मपरायण बौद्धिष्ठ शासक था. उसने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना करवाई थी जोकि भारत में बौद्ध शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र था. यह विश्वविद्यालय बिहार के भागलपुर में अवस्थित कहलगाँव में निर्मित किया गया था.

धर्मपाल का उत्तराधिकारी देवपाल था. देवपाल के शासनकाल में पाल साम्राज्य आसाम, उड़ीसा और कामरूप तक फ़ैल चुका था. इसके अलावा उसके शासन काल में पाल सेना ने विभिन्न महत्वपूर्ण एवं सफल अभियान किये थे.

देवपाल के पश्चात् पाल सिंहासन विभिन्न छोट-छोट शासक बैठे. उसके पश्चात महिपाल शासक बना. उसने 995 ईस्वी से लेकर 1043 ईस्वी तक शासन कार्य किया. उसे पाल साम्राज्य के दूसरे संस्थापक के रूप में जाना जाता है. इसने पाल साम्रज्य के अधिकांश हारे क्षेत्रो को पुनः प्राप्त किया.

देवपाल के पश्चात् पाल साम्राज्य के अंतर्गत बहुत छोटे-छोटे शासक हुए जोकि पाल साम्रज्य की चमक को बरक़रार न रख सके.