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पूर्व की ओर (बंगाल की खाड़ी) की नदी परियोजनाए

भारत में बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को कृषि के लिए सिंचाई, उद्योगों के लिए बिजली और बाढ़ नियंत्रण की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शुरू किया  गया । जवाहर लाल नेहरू ने बांधों को आधुनिक भारत का मंदिर' कहा है, इस तथ्य से उस समय में बांधों के महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है । भारत की आर्थिक योजनाओं में बांध निर्माण को एक उच्च प्राथमिकता दी गई है ।
Jul 28, 2016 16:14 IST
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भारत में बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को कृषि के लिए सिंचाई, उद्योगों के लिए बिजली और बाढ़ नियंत्रण की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शुरू किया  गया । जवाहर लाल नेहरू ने बांधों को "आधुनिक भारत का मंदिर' कहा है, इस तथ्य से उस समय में बांधों के महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है ।भारत की आर्थिक योजनाओं में  बांध निर्माण को एक उच्च प्राथमिकता दी गई है । पूर्व की दिशा में बहने वाली नदियों से संबंधित परियोजनाओं जो बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है, नीचे चर्चा की गयी है:

  • हीराकुंड परियोजना: इस परियोजना को ओडिसा में महानदी पर बनाया गया है जो दुनिया की सबसे लंबी नदी का बांध (4.8 किमी)  है।  महानदी के डेल्टा क्षेत्रों में इस परियोजना ने हाइड्रो बिजली, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण  शुरू कर दिया गया है।
  • बेलिमला  परियोजना: यह परियोजना ओडिसा  में नदी सिलेरू पर निष्पादित किया गया है।  सिलेरू नदी सबरी नदी की सहायक नदी है जो अपने आप में गोदावरी की सहायक नदी है ।
  • निजाम सागर परियोजना: यह परियोजना तेलंगाना के मेडक जिले में नदी मंजर जो  गोदावरी की सहायक नदी है पर निष्पादित किया गया है।
  • रामागुंडम परियोजना: यह गोदावरी नदी पर करीमनगर जिले, तेलंगाना में  बनाया गया है।
  • मचकुण्ड परियोजना: यह आंध्र प्रदेश और ओडिसा  की संयुक्त परियोजना है। यह  आंध्र प्रदेश (कोरापुट जिले में) और  ओडिसा (विशाखापत्तनम जिला)  की सीमा पर मचकुण्ड नदी पर बनाया गया है।
  • पोचमपद परियोजना: गोदावरी नदी के पार श्रीराम सागर परियोजना एक बहुउद्देशीय बांध संरचना है और उत्तरी तेलंगाना के लिए एक जीवन रेखा के रूप में मानी   जाती है। श्री राम सागर परियोजना  वारंगल, करीमनगर, आदिलाबाद, नलगोंडा और खम्मम जिलो में  सिंचाई की जरूरत के लिए कार्य करती है।
  • टाटा हाइडल पावर प्रोजेक्ट: यह महाराष्ट्र में लोनावला  (भोरघाट से ऊपर) के पास टाटा समूह द्वारा बनाया गया है। इस  परियोजना से पश्चिमी घाट पर झीलों के  अत्यधिक बारिश के पानी को इकट्ठा करके हाइड्रो बिजली  उपज की जाती है। बिजली स्टेशन- कोहली, भिवपुरी  और भीरा  पर बनाया  गया है।
  • कोयना हाइडल पावर प्रोजेक्ट: यह महाराष्ट्र में सबसे बडे  बांधों में से एक है।  इसका  मुख्य उद्देश्य आसपास के इलाकों में कुछ सिंचाई के साथ हाइड्रो बिजली पैदा करना है। भारत में कोयना जल विद्युत परियोजना  सबसे बड़ी पूरी  होने वाली हाइड्रो बिजली संयंत्र है।  कोयना नदी अपनी संभावित बिजली  पैदा करने के कारण 'महाराष्ट्र की जीवन रेखा' के रूप में मानी जाती है।
  • नागार्जुन सागर परियोजना: यह आंध्र प्रदेश में  कृष्णा नदी के पार प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में  से एक है। इस परियोजना पर काम वर्ष 1955 में शुरू किया गया था।  ये  परियोजना कृष्णा नदी के पार एक बांध के साथ  दो मुख्य नहरों को दोनों तरफ से एक दूसरे से दूर ले जाती है ,नागार्जुन सागर दाहिनी मुख्य नहर सिंचाई क्षमता पैदा करने के लिए प्रयोग की जाती है ।
  • श्रीशैलम परियोजना: यह कृष्णा नदी पर तेलंगाना (महबूबनगर जिले)  और आंध्र प्रदेश (कुरनूल जिला) की सीमा पर  पर बनाया गया है।
  • अलमाटी  परियोजना: यह  कर्नाटक में कृष्णा नदी पर बनाया गया है।
  • तुंगभद्रा परियोजना: इस परियोजना कर्नाटक में तुंगा और भद्रा के संगम पर बनायी गया है। यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
  • भद्रा परियोजना: यह कर्नाटक में नदी भद्रा पर स्थित है।
  • घटप्रभा परियोजना: यह कर्नाटक में नदी घटप्रभा पर स्थित है।
  • शिवसमुन्द्रम परियोजना: यह भारत की सबसे पुरानी हाइड्रो बिजली परियोजना है जो 1902 में  कर्नाटक में कावेरी पर बनायी  गयी थी।  कृष्णराज सागर जलाशय भी इस बांध पर स्थित है।
  • मेत्तूर परियोजना: यह तमिलनाडु में कावेरी नदी पर स्थापित किया गया है। स्टेनली जलाशय भी इस बांध के पीछे स्थित है।
  • पापनाशम परियोजना: यह तमिलनाडु में नदी ताम्रपर्णी पर स्थापित किया गया है।
  • पाइकारा  परियोजना: यह नदी पाइकारा , तमिलनाडु पर स्थापित किया गया है।
  • कुंदा परियोजना: यह तमिलनाडु में  कुंदा नदी पर स्थापित किया गया है।