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बैंक ड्राफ्ट

विनिमय-पत्र को ही एक रूप में एक ड्राफ्ट की संज्ञा दी जाती है.
Dec 8, 2014 14:13 IST
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विनिमय-पत्र को ही एक रूप में एक ड्राफ्ट की संज्ञा दी जाती है. जब यह विनिमय-पत्र किसी एक बैंक के द्वारा या दुसरे बैंक के द्वारा आपस में या किसी और बैंक को दिए जाते हैं तो इन्हें बैंक ड्राफ्ट कहते हैं. इसे एक रूप परक्राम्य लिखत के रूप में भी माना जाता है. इसे कुछ परिवर्तनों के साथ चेक के रूप में भी जाना जाता है. एक बैंक ड्राफ्ट बैंक के द्वारा ही दूसरे बैंक के लिए जारी किया जाता है या कभी-कभी स्वयं भी जारी किया जाता है. इसे इतनी आसानी से रद्द नहीं किया जा सकता है. यह ड्राफ्ट धारक को देय नहीं बनाता है.

दूसरे शब्दों में, विनिमय बिल, एक बैंक द्वारा स्वयं तैयार किया जाता है. या किसी दूसरे देश या शहर में एक सहयोगी बैंक द्वारा इसे तैयार किया जाता है. बैंक ड्राफ्ट आम तौर पर अन्य बैंकों के साथ व्यवहार में बैंकों द्वारा उपयोग किया जाता है, या एक विक्रेता या लेनदार द्वारा किसी दूसरे शहर या देश में एक खरीदार या देनदार से एक साधारण चेक स्वीकार करने में किया जाता है. इसे अक्सर जब बैंक का एक ग्राहक अपने बैंक से इस सन्दर्भ में आग्रह करता है तो इसे जारी किया जाता है और उसे उसकी उपस्थिति में उसके खाते में हस्तांतरित कर दिया जाता है. सामान्य परिस्थितियों में, जब एक मसौदा का भुगतान किया जाना तय होता है, तो इस कारण से भी इसे नकदी समकक्ष के रूप में स्वीकार किया जाता है.