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बॉन सम्मेलन, वाशिंगटन और रामसर सम्मेलन

जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आधारित सम्मेलन (यह सीएमएस या बॉन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है, बॉन समझौते के साथ भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है) का लक्ष्य स्थलीय, समुद्री और एवियन (उड़ने वाली) प्रजातियों का संरक्षण करना है। सीआईटीईएस (वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आधारित सम्मेलन) को वाशिंगटन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है जिसकी शुरूआत 1963 में की गयी थी। रामसर सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय महत्व की झीलों पर आधारित सम्मेलन है।
Nov 17, 2015 15:28 IST
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जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आधारित सम्मेलन (यह सीएमएस या बॉन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है, बॉन समझौते के साथ भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है) का लक्ष्य स्थलीय, समुद्री और एवियन (उड़ने वाली) प्रजातियों का संरक्षण करना है।

बॉन सम्मेलन

जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आधारित सम्मेलन (यह सीएमएस या बॉन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है, यहां पर बॉन समझौते के साथ भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है) का लक्ष्य स्थलीय, समुद्री और एवियन (उड़ने वाली) प्रजातियों का उनकी संपूर्ण सीमा में संरक्षण करना है। यह एक अंतर-सरकारी संधि है जो वैश्विक स्तर पर वन्य जीवन और निवास के संरक्षण के साथ जुड़े संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तत्वावधान में संपन्न हुई थी। जब से यह सम्मेलन अस्तित्व में आया है तब से अफ्रीका, मध्य और दक्षिण अमेरिका, एशिया, यूरोप और ओशिनिया से 100 से अधिक दलों के इसमें शामिल होने से इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। 1979 में बॉन में सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए थे (इसलिए नाम) और 1983 में यह अस्तित्व में आया था।

अभी तक सीएमएस के तत्वाधान में सात समझौतों संपन्न हो चुके हैं। ये इस प्रकार हैं:

I. यूरोपीय चमगादड़ की आबादी
II. भूमध्य सागर, काला सागर और समीपवर्ती अटलांटिक क्षेत्र के केटासियन
III. बाल्टिक और उत्तरी समुद्र की छोटी केटासियन
IV. वैडन सागर के सील
V. अफ्रीकी-यूरेशियाई प्रवासी जल पक्षी
VI. एलबेट्रॉस और पेटरेल्स
VII. गोरिल्ला और उनका निवास

समझौता ज्ञापन (एमओयू) जो अभी तक अपने उद्देश्यों के संरक्षण को लेकर संपन्न हुए हैं:

I. साइबेरियन क्रेन
II. स्लेंडर- बिल कर्लू
III. अफ्रीका के अटलांटिक तट के समुद्री कछुए
IV. हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री कछुए
V. ग्रेट बस्टर्ड की मध्य यूरोपीय जनसंख्या
VI. बुखारा हिरण
VII. एक्वाटिक वार्बलर
VIII. अफ्रीकी हाथी की पश्चिम-अफ्रीकी आबादी
IX. साईगा एंटीलोप
X. प्रशांत द्वीप राज्यों के केटासियन
XI. डुगोंग्स
XII. भूमध्य मोंक सील
XIII. रूडी-हेडेड गूस (एक पक्षी)
XIV. चरागाह पक्षी

इसके अलावा, सीएमएस सचिवालय ने मध्य एशियाई फ्लाईवे के लिए एक कार्य योजना की शुरूआत की है जो प्रवासी पक्षियों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में एक है और साहेलो- सहारण, हिरण के संरक्षण और बहाली की एक कार्य योजना है। जबकि शिकारी पक्षियों, प्रवासी शार्क, और पश्चिमी अफ्रीकी जलीय स्तनधारियों के संबंध के साथ समझौते या समझौता ज्ञापनों को विकसित करने की पहल जारी हैं।

पक्षकार सम्मेलन (सीओपी), स्थायी समिति, वैज्ञानिक परिषद और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा उपलब्ध कराए गया एक सचिवालय, सीएमएस परिचालन निकायो में शामिल है। सीओपी सम्मेलन की निर्णय लेने वाली संस्था है। यह प्रवासी प्रजाति के संरक्षण की स्थिति और सम्मेलन के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए हर दो से तीन साल में बैठक करती है और पक्षकारों को मार्गदर्शन और सिफारिशें प्रदान करती है। अभी तक सीओपी की 8 बैठकें हो चुकी हैं।

वाशिंगटन सम्मेलन:

सीआईटीईएस (वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आधारित सम्मेलन) एक बहुपक्षीय संधि है। यह 1963 में प्रकृति संरक्षण के अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) के सदस्यों की बैठक में पारित प्रस्ताव के परिणाम का मसौदा है। सम्मेलन को 1973 में हस्ताक्षर के लिए खोला गया था और 1 जुलाई 1975 सीआटीईएस अस्तिस्व में आया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चत करना था कि जंगली जानवर और पौधों के नमूनों का अंतर्ऱाष्ट्रीय व्यापार जंगली प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा नहीं हैं और समझौते में जानवरों और पौधों की 34,000 से अधिक प्रजातियों के संरक्षण का भी अलग-अलग उल्लेख है।  शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौते (जीएटीटी) का उल्लंघन ना हो, यह सुनिश्चत करने के लिए जीएटीटी के सचिवालय ने मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान विचार-विमर्श किया गया था।

रामसर सम्मेलन

अंतर्राष्ट्रीय महत्व की झीलों पर आधारित सम्मेलन, विशेषकर वाटरफाउल हैबिटेट जो झीलों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य प्रगतिशील अतिक्रमण का मुकाबला करने तथा वर्तमान झीलों के नुकसान एवं भविष्य में झीलों के मौलिक पारिस्थितिक कार्यों तथा उनके आर्थिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, और मनोरंजन के मूल्य को पहचानना है। इसका नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर है। अंतर्राष्ट्रीय महत्व के झीलों की रामसर सूची में अभी 2,065 साइटें शामिल हैं।

जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आधारित सम्मेलन (यह सीएमएस या बॉन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है, बॉन समझौते के साथ भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है) का लक्ष्य स्थलीय, समुद्री और एवियन (उड़ने वाली) प्रजातियों का संरक्षण करना है।
बॉन सम्मेलन
जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आधारित सम्मेलन (यह सीएमएस या बॉन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है, यहां पर बॉन समझौते के साथ भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है) का लक्ष्य स्थलीय, समुद्री और एवियन (उड़ने वाली) प्रजातियों का उनकी संपूर्ण सीमा में संरक्षण करना है। यह एक अंतर-सरकारी संधि है जो वैश्विक स्तर पर वन्य जीवन और निवास के संरक्षण के साथ जुड़े संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तत्वावधान में संपन्न हुई थी। जब से यह सम्मेलन अस्तित्व में आया है तब से अफ्रीका, मध्य और दक्षिण अमेरिका, एशिया, यूरोप और ओशिनिया से 100 से अधिक दलों के इसमें शामिल होने से इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। 1979 में बॉन में सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए थे (इसलिए नाम) और 1983 में यह अस्तित्व में आया था।
अभी तक सीएमएस के तत्वाधान में सात समझौतों संपन्न हो चुके हैं। ये इस प्रकार हैं:
I. यूरोपीय चमगादड़ की आबादी
II. भूमध्य सागर, काला सागर और समीपवर्ती अटलांटिक क्षेत्र के केटासियन
III. बाल्टिक और उत्तरी समुद्र की छोटी केटासियन
IV. वैडन सागर के सील
V. अफ्रीकी-यूरेशियाई प्रवासी जल पक्षी
VI. एलबेट्रॉस और पेटरेल्स
VII. गोरिल्ला और उनका निवास
समझौता ज्ञापन (एमओयू) जो अभी तक अपने उद्देश्यों के संरक्षण को लेकर संपन्न हुए हैं:
I. साइबेरियन क्रेन
II. स्लेंडर- बिल कर्लू
III. अफ्रीका के अटलांटिक तट के समुद्री कछुए
IV. हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री कछुए
V. ग्रेट बस्टर्ड की मध्य यूरोपीय जनसंख्या
VI. बुखारा हिरण
VII. एक्वाटिक वार्बलर
VIII. अफ्रीकी हाथी की पश्चिम-अफ्रीकी आबादी
IX. साईगा एंटीलोप
X. प्रशांत द्वीप राज्यों के केटासियन
XI. डुगोंग्स
XII. भूमध्य मोंक सील
XIII. रूडी-हेडेड गूस (एक पक्षी)
XIV. चरागाह पक्षी
इसके अलावा, सीएमएस सचिवालय ने मध्य एशियाई फ्लाईवे के लिए एक कार्य योजना की शुरूआत की है जो प्रवासी पक्षियों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में एक है और साहेलो- सहारण, हिरण के संरक्षण और बहाली की एक कार्य योजना है। जबकि शिकारी पक्षियों, प्रवासी शार्क, और पश्चिमी अफ्रीकी जलीय स्तनधारियों के संबंध के साथ समझौते या समझौता ज्ञापनों को विकसित करने की पहल जारी हैं।
पक्षकार सम्मेलन (सीओपी), स्थायी समिति, वैज्ञानिक परिषद और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा उपलब्ध कराए गया एक सचिवालय, सीएमएस परिचालन निकायो में शामिल है। सीओपी सम्मेलन की निर्णय लेने वाली संस्था है। यह प्रवासी प्रजाति के संरक्षण की स्थिति और सम्मेलन के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए हर दो से तीन साल में बैठक करती है और पक्षकारों को मार्गदर्शन और सिफारिशें प्रदान करती है। अभी तक सीओपी की 8 बैठकें हो चुकी हैं।
वाशिंगटन सम्मेलन:
सीआईटीईएस (वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आधारित सम्मेलन) एक बहुपक्षीय संधि है। यह 1963 में प्रकृति संरक्षण के अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) के सदस्यों की बैठक में पारित प्रस्ताव के परिणाम का मसौदा है। सम्मेलन को 1973 में हस्ताक्षर के लिए खोला गया था और 1 जुलाई 1975 सीआटीईएस अस्तिस्व में आया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चत करना था कि जंगली जानवर और पौधों के नमूनों का अंतर्ऱाष्ट्रीय व्यापार जंगली प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा नहीं हैं और समझौते में जानवरों और पौधों की 34,000 से अधिक प्रजातियों के संरक्षण का भी अलग-अलग उल्लेख है।  शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौते (जीएटीटी) का उल्लंघन ना हो, यह सुनिश्चत करने के लिए जीएटीटी के सचिवालय ने मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान विचार-विमर्श किया गया था।
रामसर सम्मेलन
अंतर्राष्ट्रीय महत्व की झीलों पर आधारित सम्मेलन, विशेषकर वाटरफाउल हैबिटेट जो झीलों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य प्रगतिशील अतिक्रमण का मुकाबला करने तथा वर्तमान झीलों के नुकसान एवं भविष्य में झीलों के मौलिक पारिस्थितिक कार्यों तथा उनके आर्थिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, और मनोरंजन के मूल्य को पहचानना है। इसका नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर है। अंतर्राष्ट्रीय महत्व के झीलों की रामसर सूची में अभी 2,065 साइटें शामिल हैं।