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ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली

ब्रह्मपुत्र दुनिया में सबसे बड़ी नदी घाटियों में से एक है जो मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रेणी के चमयुंगडुंग  ग्लेशियर से  शुरू होती  है  यहाँ से यह दक्षिणी तिब्बत के सूखे  और सपाट क्षेत्र में लम्बाई में लगभग 1,200 किलोमीटर की दूरी के लिए पूर्व की ओर बहती है जहां इसे संग्पो जिसका अर्थ है 'शोधक' के रूप में जानी जाती  है ।  तिब्बत में नदी राँगो संग्पो इसकी   दाहिनी किनारे की  प्रमुख सहायक नदी है। यह नमचा बरवा (7755 मीटर) के पास मध्य हिमालय में एक गहरी खाई बनाने के बाद एक उपद्रवी  और गतिशील नदी के रूप में उभर कर आती  हैं।
Aug 3, 2016 14:48 IST

ब्रह्मपुत्र दुनिया में सबसे बड़ी नदी घाटियों में से एक है जो मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रेणी के चमयुंगडुंग ग्लेशियर से शुरू होती है यहाँ से यह दक्षिणी तिब्बत के सूखे और सपाट क्षेत्र में लम्बाई में लगभग 1,200 किलोमीटर की दूरी के लिए पूर्व की ओर बहती है जहां इसे संग्पो ( जिसका अर्थ है 'शोधक' )के रूप में जानी जाती है । तिब्बत में नदी राँगो संग्पो इसकी  दाहिनी किनारे की प्रमुख सहायक नदी है। यह नमचा बरवा (7755 मीटर) के पास मध्य हिमालय में एक गहरी खाई बनाने के बाद एक उपद्रवी और गतिशील नदी के रूप में उभर कर आती हैं।

यह नदी सियांग या डिहनग के नाम से तलहटी से उभर कर आती हैं। यह भारत में दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हुई अरुणाचल प्रदेश के सादिया शहर के पश्चिम से प्रवेश करती है। इसके मुख्य बाएं किनारे की सहायक नदियों दिबांग या सिकंग और लोहित है, इसके बाद यह ब्रह्मपुत्र के रूप में जानी जाती है।

यह असम घाटी के माध्यम से अपने 750 किलोमीटर की लंबी यात्रा में कई सहायक नदियों को प्राप्त करती है। इसकी बाएं किनारे की प्रमुख सहायक नदियों है - बरही दिहिंग, धनसारी (दक्षिण) और कलंग जबकि दाहिने किनारे की महत्वपूर्ण सहायक नदिया है - सुबनसिरी, कामेंग, मानस और संकोश । सुबनसिरी जिसका मूल तिब्बत में है एक पूर्वगामी नदी है।

ब्रह्मपुत्र धुबरी के पास बांग्लादेश में प्रवेश करती है और दक्षिण की ओर बहती है। बांग्लादेश में तिस्ता इसको दाहिने किनारे पर मिल जाती है जहां ये यमुना नदी के रूप में जानी जाती है। यह अंत में पदमा नदी के साथ विलीन हो जाती है जो बंगाल की खाड़ी में गिरती है । ब्रह्मपुत्र बाढ़, चैनल शिफ़्टिंग और किनारे के कटाव के लिए अच्छी तरह से जानी जाती है। यह सच है कि इसकी सहायक नदिया बडी हैं और इसके द्वारा जलग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा का कारण इन नदियों का बड़ी मात्रा में अपने साथ अवसादों को लाना है।