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ब्रिक्स (BRICS): ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और सदस्य देश

ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत और चीन, दक्षिण अफ्रीका) नमक संस्था की शुरूआत 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ 'नील, द्वारा की गई थी। यह संगठन विश्व के पांच बड़े विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व करती है । इस संगठन का विश्व की कुल जनसंख्या और आर्थिक उत्पादन में बहुत बड़ा योगदान है। शुरुआत में यह संगठन सिर्फ ब्रिक (BRIC) के नाम से जाना जाता था परन्तु 2011  में इसमें दक्षिण अफ्रीका के शामिल हो जाने पर यह ब्रिक्स बन गया ।
May 30, 2016 15:34 IST
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ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत और चीन, दक्षिण अफ्रीका) की शुरूआत 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ 'नील, द्वारा की गई थी। ब्राजील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के विकास की संभावनाओं पर एक रिपोर्ट, जो वैश्विक उत्पादन और जनसंख्या के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। इस सफल निर्णायक पहल में देशों और उनके शासनाध्यक्षों के स्तर पर वार्षिक शिखर सम्मेलनों के माध्यम से चर्चा की गई। पहला शिखर सम्मेलन 2009 में येकातेरिनबर्ग (रूस) में आयोजित किया था जिसमें ब्रिक्स देशों ने गहराई से आपस में संवाद किया। 2011 में ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में करने के साथ इसका विस्तार किया गया और यह ब्रिक्स बन गया। संक्षिप्त में कहा जाए तो इन देशों की पहचान अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में एक उभरते हुए राजनीतिक-कूटनीतिक इकाई के रूप में बनी जहां वित्तीय बाजारों का अनुरूप मूल अवधारणा से अलग था।

येकातेरिनबर्ग शिखर सम्मेलन के बाद, पांच वार्षिक शिखर सम्मेलनों (ब्रासीलिया, 2010, सान्या, 2011, नई दिल्ली, 2012, डरबन, 2013, और फ़ोर्टालेज़ा, 2014, उफ़ा (रूस), 2015  ) का आयोजन किया जा चुका है जबकि अगला सम्मलेन भारत में 2016 में आयोजित किया जायेगा । सदस्य देशों के नेताओं द्वारा कम से कम एक वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया है। डरबन में शिखर सम्मेलनों का पहला चक्र पूरा कर लिया गया है। अभी तक प्रत्येक सदस्य देश के नेताओं ने बैठक की मेजबानी कर ली है। आम सहमति के क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान ब्रिक्स को एक वृद्धिशील ढंग से विकसित किया गया है। इसके सदस्य देशों ने आम सहमति के क्षेत्रों में दो मुख्य स्तंभों को मजबूत करने पर जोर दिया है जो हैं:

(I) आर्थिक और राजनीतिक प्रशासन पर ध्यान देने के साथ बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय; और (ii) सदस्यों के बीच सहयोग। पहले स्तंभ के बारे में बात की जाए तो इसके तहत वैश्विक शासन के ढांचे, विशेष रूप से आर्थिक और वित्तीय क्षेत्रों में सुधार लाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जी -20, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक जैसी संस्थाएं इस तरह के सुधारों पर विशेष जोर दे रही हैं और इसके साथ-साथ राजनीतिक संस्थाओं, जैसे-संयुक्त राष्ट्र ने भी सुधारों पर जोर दिया है।

इंट्रा-ब्रिक्स सहयोग को भी प्रमुखता मिल रही है और एक व्यापक एजेंडा विकसित किया गया है, जिसमें वित्त, कृषि, अर्थव्यवस्था और व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय अपराध का मुकाबला करने, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, कॉर्पोरेट और शैक्षिक संवाद तथा सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस संदर्भ में, एक नए मोर्चे के रूप में वित्तीय क्षेत्र के सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपने छठे शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स ने एक नए ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना की जिसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे और ब्रिक्स देशों की सतत विकास परियोजनाओं तथा अन्य विकासशील देशों को वित्तीय मदद प्रदान करना था। नई संस्था की स्थापना 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर की पूंजी के साथ शुरू की गई।

समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर:-

सहयोग पर इस समझौता ज्ञापन ("एमओयू") पर ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) ने हस्ताक्षर किए जिसमें क्रमश: निम्नलिखित निर्यात ऋण बीमा एजेंसियों को शामिल किया गया है:

  • ब्राज़ीलियन गारंटी एजेंसी (एजेंसिया ब्रासिलेरिया गेसटोरा डे फंडोस गंरटीडोर्स ई गरंटीएस एस.ए.- एबीजीएफ): यह ब्राजील सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है जिसका उद्देश्य बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्रों में सक्रिय रूप से बीमा की गारंटी प्रदान करना है। एबीजीएफ का पंजीकृत कार्यालय ब्राजील में हैं जिसका पता है- सेक्टर डे अंटारक्यूईया सुल, क्वाड्रा 3, बोल्को 0, 11º, अंडर, ईडी- आरगस रिजिनयस, सीईपी  सीईपी 70.079-900 - ब्रासीलिया -डीएफ, ब्राजील है।
  • भारतीय निर्यात ऋण गारंटी इंडिया लिमिटेड ("ईसीजीसी")- यह पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक निर्यात ऋण बीमा संगठन का एक निगम है। ईसीजीसी की स्थापना भारत में निर्यातकों और बैंकों को बीमा प्रदान करने के लिए की गई। इसका लक्ष्य व्यापार को प्रोत्साहित कर सुविधाजनक बनाना तथा भारत व अन्य देशों के बीच व्यापार को विकसित करना था। ईसीजीसी का पंजीकृत कार्यालय का पता है: एक्सप्रेस टावर, 10 वीं मंजिल, नरीमन प्वाइंट, मुंबई - 400 021, भारत।
  • चाईना एक्सपोर्ट एंड क्रेडिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन, पी.आर चाईना ("SINOSURE"): यह एक अधिकृत चीनी निर्यात ऋण बीमा संस्था है जिस पर पूरी तरह से सरकार का स्वामित्व है। SINOSURE का पंजीकृत कार्यालय पता है- फॉर्च्यून टाइम्स बिल्डिंग, 11 फेंगहुईयुआन, सिचेंग डिस्ट्रिक्ट, बीजिंग, चीन है।
  • एक्सपोर्ट क्रेडिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ साउथ अफ्रीका लिमिटेड साउथ अफ्रीका ("ECIC")- यह दक्षिण अफ्रीकी सरकार के स्वामित्व वाली एक निर्यात ऋण बीमा कंपनी हैं। इसका पता है: 349 विच हेजल एवेन्यू, हाईवेल्ड एक्सटेंशन 79, सेंचुरियन, 0157, दक्षिण अफ्रीका।

ब्रिक्स बैंक:

जुलाई 2015 में ब्रिक्स देशों - चीन, रूस, ब्राजील, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने एक नए बैंक (नए विकास बैंक) की स्थापना की जिसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों और अन्य उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की सतत विकास की मूलभूत परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है। इस बैंक का प्रमुख कार्य होंगे- किसी देश शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी समस्याओं को दूर करना, ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, वैश्विक फाइनैंशल सेफ्टी नेट को मजबूत करना आदि। एनडीबी के पास आरम्भ में 100 बिलियन डॉलर की आधार राशि रखी रखी गई है, जिसका इस्तेमाल ढांचागत परियोजनाओं के लिए किया जाएगा जो सभी ब्रिक्स देशों के लिए एक प्रमुख मुद्दा हैं। हालांकि, चीन की कई निर्माण कंपनियों की विदेशों में बड़ी परियोजनाओं होने से इससे उन्हें अधिक लाभ मिलेगा। इस बैंक के अलावा, ब्रिक्स के पांच सदस्य भी अलग से 100 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार अलग से स्वैप लाइनों के लिए रिजर्व रखेंगे, जिसका उपयोग कोई भी ब्रिक्स सदस्य एक आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था के तहत कर सकता है। बैंक का मुख्यालय  शंघाई में होगा, और इसके पहला अध्यक्ष भारत से होगा।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि नए विकास बैंक और ब्रिक्स की स्थापना होने से यह अंतरराष्ट्रीय शिखर पर इसमें शामिल विकासशील देशों को और अधिक शक्ति मिलेगी । अब विकसित देशों को इन देशों द्वारा लाए गए प्रस्तावों को सुनने के लिए मजबूर किया जा सकता है।