भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भारतीय पूंजी बाजार को कैसे नियंत्रित करता है?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), का गठन आरंभ में प्रतिभूति बाजार के विकास एवं विनिमय और निवेशकों के संरक्षण से संबंधित सभी मामलों पर गौर करने और इन मामलों पर सरकार को परामर्श देने के लिए सरकार के प्रस्ताव के माध्यम से 12 अप्रैल 1988 को गैर अंशदायी निकाय के तौर पर किया गया था।
Jun 30, 2016 09:41 IST

    भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), का गठन आरंभ में प्रतिभूति बाजार के विकास एवं विनिमय और निवेशकों के संरक्षण से संबंधित सभी मामलों पर गौर करने और इन मामलों पर सरकार को परामर्श देने के लिए सरकार के प्रस्ताव के माध्यम से 12 अप्रैल 1988 को गैर अंशदायी निकाय के तौर पर किया गया था। सेबी को 30 जनवरी 1992 को एक अद्यादेश के माध्यम से वैधानिक दर्जा और अधिकार दिए गए थे।

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    सेबी की संगठनात्मक संरचना

    Jagranjosh

    सेबी का प्रबंधन छह सदस्यों द्वारा किया जाता है– एक अध्यक्ष ( केंद्र सरकार द्वारा नामित), दो सदस्य( केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारी), एक सदस्य( आरबीआई से) और बाकी के दो सदस्यों को केंद्र सरकार नामित करती है। सेबी का कार्यालय मुंबई में है। इसके क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई में स्थित हैं। वर्ष 1988 में सेबी की आरंभिक पूंजी लगभग 7•5 करोड़ रुपये थी जिसे इसके प्रवर्तकों (आईडीबीआई, आईसीआईसीआई, आईएफसीआई) ने दिया था। इस धनराशि का निवेश किया गया था और इससे मिलने वाले ब्याज से सेबी के दैनिक खर्च की पूर्ति की जाती है। भारतीय पूंजी बाजार के लिए सभी वैधानिक शक्तियां सेबी को दी गई हैं।

    सेबी के कार्य

    1. निवेशकों के हितों की रक्षा करना और उपयुक्त उपायों से पूंजी बाजार को विनियमित करना।
    2. शेयर बाजारों और अन्य प्रतिभूति बाजार के व्यापार को विनियमित करना।
    3. शेयर ब्रोकरों, उप–ब्रोकर, शेयर ट्रांस्फर एजेंट्स, न्यासियों, मर्चेंट बैंकरों, बीमा कंपनियों, पोर्टफोलियो मैनेजर आदि के कामकाज को विनियमित करना और उनका पंजीकरण करना।
    4. म्यूचुअल फंडों के सामूहिक निवेश योजनाओं का पंजीकरण और विनियमन।
    5. स्व–नियामक संगठनों को प्रोत्साहन प्रदान करना।
    6. प्रतिभूति बाजारों के कदाचारों को समाप्त करना।
    7. प्रतिभूति बाजारों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित करना और निवेशकों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
    8. प्रतिभूतियों के इनसाइडर ट्रेनिंग की जांच करना।
    9. प्रतिभूति बाजार में व्यापार करने वाले विभिन्न संगठनों के कामकाज की निगरानी करना और व्यवस्थित सौदे सुनिश्चित करना।
    10. उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति को सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान और जांच को बढ़ावा देना। 

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    स्वस्थ पूंजी बाजार को सुनिश्चित करने के लिए सेबी द्वारा किए गए फैसले

    पूंजीबाजार की साख को फिर से स्थापित करने के लिए सेबी ने कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं–

    1. पब्लिक इश्यू जारी करने वाली कंपनियों द्वारा अरुचिकर 'एप्लीकेशन अमाउंट' के उपयोग पर नियंत्रण सेबी के अनुरोध पर व्यावसायिक बैंकों ने स्टॉक इन्वेंस्टमेंट स्कीम (शेयर निवेश योजना) की शुरुआत की जिसके तहत निवेशक को, बैंकों से खरीदे गए, निवेश किए गए शेयर को, उनके शेयर आवेदन के साथ, जमा करना होगा। अगर निवेशक को शेयर/ डिबेंचर आवंटित किया जाता है, तो 'स्टॉक इन्वेस्ट्स' जारी करने वाला बैंक संबंधित कंपनी के खाते में आवश्यक धनराशि का हस्तांतरण करेगा। दूसरे मामले में (अगर शेयर/ डिबेंचर आवंटित नहीं किया जाता), तो निवेशक को निवेश की गई पूंजी पर पूर्व– निर्धारित ब्याज दर मिलेगी। सेबी के इस कदम ने निवेशक को शेयर/ डिबेंचर आवंटित होने तक ब्याज अर्जित करना सुनिश्चित किया।
    2. शेयर की कीमत और प्रीमियम का निर्धारण– सेबी के नवीनतम निर्देशों के अनुसार, भारतीय कंपनियां अपने शेयर मूल्यों एवं उन शेयरों पर प्रीमियम का निर्धारण करने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन निर्धारित मूल्य और प्रीमियम मूल्य बिना किसी भेदभाव के सभी पर समान रूप से लागू होगा। 
    3. बीमा कंपनियां बीमा कंपनी के तौर पर काम करने के लिए न्यूनतम परिसंपत्ति सीमा करीब 20 लाख निर्धारित की गई है। इसके अलावा, सेबी ने बीमा कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर शेयर के मामले में यदि अस्वीकृत हिस्से की खरीददारी में किसी प्रकार की अनियमितता बरती जाती है तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
    4. शेयर दलालों पर नियंत्रण नए नियमों के तहत प्रत्येक ब्रोकर और उप– ब्रोकर को सेबी या भारत के किसी भी स्टॉक एक्सचेंज (शेयर बाजार) से पंजीकरण कराना होगा।
    5. इनसाइडर ट्रेडिंग शेयर मूल्यों में हेर– फेर के लिए भारतीय पूंजी बाजार में कंपनियां और उनके कर्मचारी आमतौर पर कदाचार का रास्ता अपनाते हैं। इस प्रकार के इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के लिए सेबी ने सेबी (इनसाइडर ट्रेडिंग) विनियमन 1992 शुरु किया, जो पूंजी बाजार में ईमानदारी सुनिश्चित करेगा और निवेशकों में पूंजी बाजार में दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा।
    6. म्युचुअल फंड्स पर सेबी का नियंत्रण सेबी ने सरकार और निजी क्षेत्र (यूटीआई को छोड़कर) सभी म्युचुअल फंड्स पर सीधे नियंत्रण करने के लिए सेबी (म्युचुअल फंड्स) विनियमन 1993 की शुरुआत की। इस नियम के तहत, म्युचुअल फंड लाने वाली कंपनी के पास 5 करोड़ रुपये मूल्य की शुद्ध परिसंपत्ति होनी चाहिए जिसमें प्रवर्तकों की ओर से कम– से–कम 40% का योगदान होना चाहिए।
    7. विदेशी संस्थागत निवेशकों पर नियंत्रण भारतीय पूंजी बाजार में हिस्सा लेने के लिए सेबी ने सभी विदेशी संस्थागत निवेशकों को सेबी में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। सेबी ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

    निष्कर्षः इसलिए उपरोक्त चर्चा के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भारत के पूंजी बाजार के सुचारु संचालन में सेबी – बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ताकि निवेशकों का बेशकीमती पैसा उन्हें कम अनिश्चितता के साथ अच्छा रिटर्न दिला सके।

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