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भारतीय बैंकिंग उद्योग: चुनौतियां और अवसर

वर्तमान में सभी बैंकों के द्वारा अपने ग्राहकों को इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग जैसी विभिन्न सेवाओं के माध्यम से उनके खातों के सन्दर्भ में अनेक जानकारियों उपलब्ध करायी जा रही हैं.
Nov 4, 2014 14:13 IST
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जैसा कि हम जानते हैं कि वर्तमान में सभी बैंकों के द्वारा अपने ग्राहकों को इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग जैसी विभिन्न सेवाओं के माध्यम से उनके खातों के सन्दर्भ में अनेक जानकारियों उपलब्ध करायी जा रही हैं. इस तकनीक के माध्यम से बैंक अपने ग्राहकों को न केवल अनेक सुविधाएं दे रहे हैं वल्कि अपनी रणनीतियों का भी संपादन कर रहे हैं और अपनी परिचालन क्षमता का विस्तार कर रहे हैं.

भारतीय बैंकों के सामने आने वाली चुनौतियां

भारत में बैंकिंग क्षेत्र के पुनर्गठन ने बैंकिंग तंत्र के कार्य को आसान बना दिया है. साथ ही नए कारोबारी माहौल को पैदा किया है. वर्तमान में भारतीय बैंको के समक्ष अपने बैलेंस सीट से जुड़े तथ्यों को बनाये रखने और उससे जुडी जानकारियों को अद्यतन करने के लिए अनेक चुनौतियों विद्यमान हैं. इसके अलावा बैंक वर्तमान में व्यापक तौर पर मौजूद गैर निष्पादित परिसंपत्तियों के बोझ का सामना कर रहे हैं. यदि इन गैर निष्पादित परिसंपत्तियों की वसूली समय से न हो पायी तो बैंको के समक्ष एक बड़ी समस्या उभरेगी. और समय-समय पर राजनितिक हित के लिए ऋण माफ़ी योजना  भी बैंको के समक्ष अनेक चुनौतियां प्रस्तुत हो रही हैं.

उच्च लेनदेन लागत

ध्यातव्य है की भारतीय बैंकों के समक्ष अपने सभी कारोबार को किताबों और कागजो के माध्यम से सम्पादित करना काफी कठिन हो चूका था. लेकिन सूचना प्रोद्योगिकी नें बैंकों के काम को आसान बना दिया. वर्तमान में बैंको की परिचालन क्षमता और ऋण पोर्टफोलियो में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों से जुड़े कार्यों को सम्पादित करने में तकनिकी नें बैंकों की काफी मदद की है. इसके माध्यम से बैंको के कार्यों में तीव्रता आई है.

सूचना प्रौद्योगिकी की क्रांति

भारत में बैंकों के ऊपर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा हैं. चूँकि बड़े स्तर के दबाव और अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए बैंकों के समक्ष बड़े खतरे उभरे हैं. वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-बैंकिंग से जुड़े कारोबार बैंकिग तंत्र के अनुमति से ही सम्पादित हो रहे हैं और अपने ग्राहकों को सुविधाएं देने के मामले में आभासी बैंकिंग (वर्चुअल बैंकिंग) बनते जा रहे हैं.

समय पर तकनीकी उन्नयन

वर्तमान में बाजार में ऊपलब्ध प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए,  बैंकों के लिए यह अपरिहार्य हो गया है कि सेवाओं को उन्नत किया जाये और अपने ग्राहकों को अनेक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराएं और बैंकिंग से जुड़े अनेक लाभकारी नीतियों के बारे में समय-समय पर उन्हें अवगत कराते रहें.

तीव्र प्रतिस्पर्धा

भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार ने भारतीय बैंकिंग उद्योग को विदेशी बैंकों और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रतिभागियों के लिए खुला छोड़ रखा है. विदेशी बैंकों को भी भारत में अपनी दुकान स्थापित करने की अनुमति दी गई है. इस क्षेत्र में बहुत सारे लोग और संगठन जैसे विदेशी बैंक, प्राइवेट बैंक और कई अन्य गैर सरकरी वित्तीय संस्थाएं इस क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी हैं और अपनी बैंकिग गतिविधियों को अंजाम दे रही हैं. गला काट प्रतिस्पर्धा बैंकों के समक्ष अनेक चुनौतियों को प्रस्तुत की हैं और इसी का परिणाम है कि बैंक अपने ग्राहकों को अनेक सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं. इसके अलावा अनेक ऐसी ग्राहक सुविधा से जुड़े नीतियों का प्रतिपादन कर रही हैं.

गोपनीयता और सुरक्षा

ई बैंकिंग क्षेत्र में कई ऐसे तथ्य हैं जिसकी वजह से सुरक्षा संकट की स्थिति पैदा हो सकती है.

• लिक्विडिटी, बाजार जोखिम,
• ब्याज दर से सम्बंधित जोखिम
• कानूनी जोखिम
• उधार जोखिम

बैंकिंग उद्योग में सुनहरे अवसर

• बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था
• बैंकिंग क्षेत्र में की जा रही लापरवाही  
• ग्राहक की उधारी दर में वृद्धि  
• बैंकों की संख्या में वृद्धि
• पैसे की आपूर्ति में वृद्धि
• सरकार द्वारा निर्धारित ऋण दरों में कमी
• ग्राहकों के खाते में शेष राशि की चेकिंग
• ग्राहकों के खातों को अद्यतित करना