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भारत की खनिज पेटियाँ

भारत विश्व के खनिज सम्पन्न देशों में से एक है, लेकिन भारत के सभी क्षेत्रों में खनिज नहीं पाये जाते हैं| भारत के खनिज कुछ खास क्षेत्रों में ही पाये जाते हैं और खनिज सम्पन्न इन क्षेत्रों को ‘भारत की खनिज पेटियाँ’ कहा जाता है| भारत में मुख्य रूप से उत्तरी-पूर्वी पठारी क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम पठारी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र नाम की खनिज पेटियाँ पायी जाती हैं|
Apr 8, 2016 12:25 IST
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भारत विश्व के खनिज सम्पन्न देशों में से एक है| भारत की खनिज संपन्नता का एक मुख्य कारण यह है कि यहाँ प्राचीन से नवीन तक लगभग सभी क्रम की चट्टानें पायी जाती हैं| भारत के अधिकतर धात्विक खनिजों की प्राप्ति धारवाड़ क्रम की चट्टानों से होती है और कोयला मुख्य रूप से गोंडवाना क्रम की चट्टानों में मिलता है| भारतीय प्रायद्वीप कठोर प्राचीन चट्टानों से निर्मित है और इसीलिए भारत के अधिकतर धात्विक खनिजों खनिजों की प्राप्ति इसी क्षेत्र से होती है, जबकि उत्तर भारतीय मैदान जलोढ़ निर्मित होने के कारण धात्विक खनिजों की दृष्टि लगभग महत्वहीन है| भारत में पेट्रोलियम की प्राप्ति आंतरिक अवसादी चट्टानों व तटीय क्षेत्रों से की जाती है|

भारत विश्व के खनिज सम्पन्न देशों में से एक है, लेकिन भारत के सभी क्षेत्रों में खनिज नहीं पाये जाते हैं| भारत के खनिज कुछ खास क्षेत्रों में ही पाये जाते हैं और खनिज सम्पन्न इन क्षेत्रों को ‘भारत की खनिज पेटियाँ’ कहा जाता है| भारत में मुख्य रूप से उत्तरी-पूर्वी पठारी क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम पठारी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र नाम की खनिज पेटियाँ पायी जाती हैं|
उत्तरी-पूर्वी पठारी क्षेत्र

इसमें छोटानागपुर का पठारी क्षेत्र (झारखंड),ओडिशा, पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ के खनिज सम्पन्न भाग शामिल हैं| इस क्षेत्र में विविध खनिज मिलते हैं, लेकिन उनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण धात्विक खनिज, जैसे-लोहा, बाक्साइट व मैंगनीज आदि, हैं| धात्विक खनिज और कोयले की उपलब्धता के कारण यहाँ भारी उद्योगों का काफी विकास हुआ है|

दक्षिण-पश्चिम पठारी क्षेत्र

यह पेटी कर्नाटक, गोवा ,केरल और तमिलनाडु तक विस्तृत है| इस पेटी में उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क, मैंगनीज व चूना पत्थर पाया जाता है| इसके अलावा केरल में मोनाजाइट निक्षेप पाये जाते हैं| यह पेटी खनिजों के मामले उतनी विविधतापूर्ण नहीं है जितनी कि उत्तर-पूर्वी पेटी| यहाँ कोयले का लगभग अभाव पाया जाता है, केवल तमिलनाडु के नेवेली में ही निम्न गुणवत्ता वाला लिग्नाइट कोयला पाया जाता है|

उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र

इस पेटी का विस्तार राजस्थान में अरावली से लेकर गुजरात तक है| यहाँ धारवाड़ क्रम कि चट्टानों से खनिजों कि प्राप्ति होती है| इस पेटी में जस्ता, तांबा मुख्य खनिज हैं, इसके अलावा संगमरमर, चुना पत्थर, बलुआ पत्थर, जिप्सम, ग्रेनाइट आदि इमारती पत्थर भी यहाँ से प्राप्त होते हैं| चूना पत्थर व डोलोमाइट की उपलब्धता के कारण यहाँ सीमेंट उद्योग का विकास हुआ है और जस्ते व तांबे की उपलब्धता के कारण प्रगलन संयंत्रों की स्थापना की गयी है| गुजरात व राजस्थान के बेसिनों से पेट्रोलियम खनिजों की भी प्राप्ति होती है|

ऊपर वर्णित तीन प्रमुख खनिज पेटियों के अलावा भी भारत में खनिज मिलते हैं लेकिन उनका महत्व खनिज पेटी के रूप में न होकर एकल खनिज क्षेत्र के रूप में ही अधिक है, उदाहरण के लिए,असम व मुंबई हाई से पेट्रोलियम की प्राप्ति, हिमालयी क्षेत्र से तांबे, कोयले, कोबाल्ट आदि की प्राप्ति, कृष्णा व गोदावरी बेसिन से प्राकृतिक गैस की प्राप्ति|