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भारत में चिकित्सा शिक्षा प्रणाली के विकास में भारतीय चिकित्सा परिषद की क्या भूमिका है?

भारतीय चिकित्सा परिषद की स्थापना भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1933 के तहत वर्ष 1934 में की गयी थी | बाद में वर्ष 1956 में इसकी जगह एक नए अधिनियम को पारित किया गया | इस अधिनियम को भी पुनः वर्ष 1964, 1993 और 2001 में संशोधित किया जा चुका है | इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में उच्चस्तरीय चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा संस्थानों के लिए एकसमान मानक तय करने और डॉक्टरों का स्थायी या अस्थायी पंजीकरण था |
Mar 4, 2016 17:17 IST
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भारतीय चिकित्सा परिषद (Medical Council of India-MCI) की स्थापना भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1933 के तहत वर्ष 1934 में की गयी थी | इसकी स्थापना का उद्देश्य भारत में उच्चस्तरीय चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा संस्थानों के लिए एकसमान मानक तय करने और डॉक्टरों का स्थायी या अस्थायी पंजीकरण था |  बाद में यह महसूस किया गया कि देश में चिकित्सा शिक्षा के तीवरा विकास और नयी चुनौतियों के कारण यह अधिनियम अप्रभावी हो गया है और वर्ष 1956 में इसकी जगह एक नए अधिनियम को पारित किया गया | इस अधिनियम को भी पुनः वर्ष 1964, 1993 और 2001 में संशोधित किया जा चुका है |

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भारतीय चिकित्सा परिषद के लक्ष्य

  1. स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा सुविधा के लिए एकसमान मानकों का पालन करना
  2. भारत में स्थापित देशी व विदेशी चिकित्सा संस्थानों को मान्यता प्रदान करने हेतु मानक तय करना
  3. भारत में डॉक्टरों द्वारा प्रैक्टिस करने के लिए पंजीकरण को अनिवार्य बनाना
  4. चिकित्सा शिक्षा के मामले में आपसी सहमति के मामलों पर अन्य देशों के साथ तालमेल स्थापित करना

अतः भारतीय चिकित्सा परिषद का लक्ष्य भारत में नैतिकतापूर्ण चिकित्सा प्रणाली की स्थापना में सहयोग प्रदान करना और चिकित्सा व्यवसाय के गलत उद्देश्य से प्रयोग करने वालों को दंडित करना है | 

भारतीय चिकित्सा परिषद की संरचना

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भारतीय चिकित्सा परिषद के कार्य एवं भूमिका

  1. स्नातकस्तरीय चिकित्सा शिक्षा के लिए एकसमान मानक तय करना और उनका पालन  करना |
  2. भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों में दी जा रही स्नातकोत्तर (Postgraduate) चिकित्सा शिक्षा का नियमन करना | भारत में स्नातकोत्तर (Postgraduate) चिकित्सा शिक्षा के लिए एक अन्य संविधायी निकाय (Statutory body) राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (Board of Examinations) है |
  3. भारत के चिकित्सा संस्थानों द्वारा प्रदान की गयी डिग्रियों को मान्यता प्रदान करना |
  4. भारत में स्थापित विदेशी चिकित्सा संस्थानों को मान्यता प्रदान करना |
  5. चिकित्सा महाविद्यालयों को मान्यता प्रदान करना |
  6. डॉक्टरों का स्थायी या अस्थायी पंजीकरण करना या उसे रद्द करना |
  7. सभी पंजीकृत डॉक्टरों निर्देशिका (Directory) तैयार करना, जिसे ‘भारतीय चिकित्सा रजिस्टर’ कहा जाता है |

भारतीय चिकित्सा परिषद का भ्रष्टाचार निवारक तंत्र 

भारतीय चिकित्सा परिषद  की भ्रष्टाचार निवारक तंत्र का मुखिया मुख्य सतर्कता अधिकारी होता है | मुख्य सतर्कता अधिकारी भारतीय चिकित्सा परिषद  के अध्यक्ष और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को विभिन्न अधिनियमों व नियमों द्वारा निर्धारित  परिषद के उद्देश्यों व लक्ष्यों को प्राप्त करने और पारदर्शिता  को बनाये रखने में सहयोग प्रदान करता है |

भारतीय चिकित्सा परिषद का पता

अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, भारतीय चिकित्सा परिषद, सेक्टर-8, पॉकेट-14,द्वारका, नई दिल्ली-110077 |

मुख्य सतर्कता अधिकारी (Chief Vigilance Officer), भारतीय चिकित्सा परिषद, सेक्टर-8, पॉकेट-14,द्वारका, नई दिल्ली-110077 |