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भारत में रोज़गार का परिदृश्य

भारत में 1983 से 2004-05 के दौरान कर्मचारियों का क्षेत्रवार आवंटन यह दिखाता है कि भारत में रोज़गार से संबंधित संरचनात्मक परिवर्तन बहुत सुस्त रहा।
Sep 10, 2014 15:48 IST
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भारत में 1983 से 2004-05 के दौरान कर्मचारियों का क्षेत्रवार आवंटन यह दिखाता है कि भारत में रोज़गार से संबंधित संरचनात्मक परिवर्तन बहुत सुस्त रहा। 2004-05 में कुल कर्मचारियों में से 56.67 प्रतिशत प्राथमिक क्षेत्र लगे हुए थे। साथ ही तृतीय क्षेत्र मे 24.62 प्रतिशत व औद्योगिक क्षेत्र 18.07 प्रतिशत लोगो को रोज़गार उपलब्ध करा रहा था। हालांकि तृतीय क्षेत्र मे अनियमित वृध्दि हुई लेकिन रोज़गार में इसका योगदान सकल घरेलू उत्पाद के हिसाब से बहुत कम था।

यह बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य है कि सेवा क्षेत्र में भी सबसे ज्यादा रोज़गार वृध्दि-दर, बीमा,वित्त एंव व्यापार सेवाओं की है ,इसके बाद व्यवसाय,रेस्टोरेंट,होटल व परिवहन आदि आते हैं। सामुदायिक व सामाजिक सेवाओं मे रोज़गार की वृध्दि-दर सबसे ज्यादा कम है। आर्थिक सुधारो के बाद भी अर्थव्यास्था में  श्रम को रोज़गार उपल्बध कराने वाली वृध्दि में तेज़ी से गिरावट दर्ज की गई जोकि 0.40 से 0.15  तक पहुच गई थी। यह बिना रोज़गार की वृध्दि को दर्शाती है।

इसके विपरीत 1999-2000 से 2004-05 के दोरान वृध्दि की रोज़गार लोच 0.15 से बढ़कर 0.51 हो गयी। केवल तृतीय क्षेत्र के एक उप-क्षेत्र को छोड़कर सेवा क्षेत्र के सभी उप-क्षेत्रों में रोज़गार लोच (employment elasticity) में बढ़त देखी गयी । इसी के साथ रोज़गार की लोच 0.15 से बढ़कर 0.51 हो गयी।