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भारत में संरचना / आयु संरचना

किसी देश की आबादी की आयु संरचना आर्थिक दृष्टिकोण से उस देश की उत्पादक आबादी को बताती है। 15-60 वर्ष के आयु वर्ग की आबादी कामकाजी आबादी के तौर पर जानी जाती है। 0-14 वर्ष और 60 वर्ष से अधिक के आयु वर्ग की आबादी गैर– कामकाजी/ आश्रित आबादी होती है। किसी देश के लिए कामकाजी आबादी का अधिक अनुपात उसके आर्थिक विकास के लिए लाभकारी होता है। भारत में, 0-14 वर्ष की आयु वर्ग की आबादी अभी भी अधिक है और 60 वर्ष से अधिक की आबादी का प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है। यह उच्च जीवन प्रत्याशा और मृत्यु दर में कमी को दर्शाता है।
Jun 28, 2016 09:58 IST
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किसी देश की आबादी की आयु संरचना आर्थिक दृष्टिकोण से उस देश की उत्पादक आबादी को बताती है। 15-60 वर्ष के आयु वर्ग की आबादी कामकाजी आबादी के तौर पर जानी जाती है। 0-14 वर्ष और 60 वर्ष से अधिक के आयु वर्ग की आबादी गैर– कामकाजी/ आश्रित आबादी होती है। किसी देश के लिए कामकाजी आबादी का अधिक अनुपात उसके आर्थिक विकास के लिए लाभकारी होता है। भारत में, 0-14 वर्ष की आयु वर्ग की आबादी अभी भी अधिक है और 60 वर्ष से अधिक की आबादी का प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है। यह उच्च जीवन प्रत्याशा और मृत्यु दर में कमी को दर्शाता है।

जनसांख्यिकीय अंतर

यह किसी देश के जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अंतर बताता है। जनसांख्यिकीय संक्रांति में, आरंभिक और अंतिम चरणों के दौरान जनसांख्यिकीय अंतर छोटा होता है जबकि मध्य चरण में यह बड़ा हो जाता है।

जनसांख्यिकीय विभाजन

आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए यह किसी देश के सामने 15 और 64 वर्षों के बीच की आबादी का उच्च हिस्सेदारी के अवसर को संदर्भित करता है। ऐसी स्थिति तब आती है जब किसी देश में प्रजनन दर कम होती है, जिसका अर्थ है 15 वर्ष की आयु से नीचे की आश्रित आबादी का कम होना। 64 वर्ष की उम्र से अधिक के लोगों की आबादी बुजुर्ग पीढ़ी में, कम जीवन प्रत्याशा के कारण, कम होती है। दूसरी तरफ, 15-64 के बीच आबादी उच्च होती है। ऐसा पिछली पीढ़ी में उच्च जन्म दरों की वजह से होता है। यह निर्भरता अनुपात को कम कर देता है ( आबादी का हिस्सा उत्पादक रोजगार में शामिल नहीं होता और दूसरों पर निर्भर करता है) और इसलिए, आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।

काम करने वाली बड़ी आबादी का यह अर्थ भी है कि घरेलू बचत दर उच्च है (चूंकि आश्रित आबादी बचत में बढ़ोतरी नहीं करता लेकिन उसे कम जरूर कर देता है) और इसलिए, निवेश और आर्थिक विकास उच्च होता है। पूर्वी एशिया के कई देश अपने जनसांख्यिकी अंश का प्रयोग कर उच्च आर्थिक विकास दर प्राप्त करने में सक्षम थे। जनसांख्यिकीय अंश सिर्फ तभी उपयोगी हो सकता है जब इसमें सहायक राष्ट्रीय नीतियों जैसे–साक्षरता में सुधार, रोजगार प्रदान करना, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र आदि हों। देश में युवा आबादी की उच्च हिस्सेदारी के कारण सामाजिक अशांति, अपराध और उच्च तलाक दर आदि जैसे नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं।

आबादी

आयु– वर्ग

1961

1971

1981

1991

2001

2011

0-14

41

41.2

39.5

37.7

34.3

30.2

15-64

56

55.5

57

58.4

61.4

64.8

65 और उपर

3

3.3

3.5

3.9

4.3

5

जनसांख्यिकीय लाभांशः भारत

संख्या कुल आबादी में आबादी के हिस्से का प्रतिशत बता रहे हैं।

  • जनसांख्यिकीय लाभांश तीन तरीकों से आर्थिक विकास में मदद करता है।
  • कामकाजी आबादी में उच्च बचत दर होती है जिसका अर्थ है उच्च निवेश और विकास ।
  • कम प्रजनन का अर्थ है महिलाओं के पास काम करने की आजादी है (बच्चों की देखभाल का कम बोझ), जो आर्थिक उत्पादन को बढ़ावा देता है। साथ ही यह लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देता है।
  • कम बच्चों के साथ, लोग अपने स्वास्थ्य पर अधिक खर्च करते हैं, जिससे उत्पादकता में सुधार होता है।

जनसंख्या पिरामिड

जनसंख्या पिरामिड पुरुष और महिला आबादी के साथ एक आबादी के विभिन्न आयु– वर्गों का चित्रात्मक चित्रण होता है। क्षैतिज अक्ष (horizontal axis) आबादी की निरपेक्ष संख्या को दर्शाता है। इसके एक तरफ पुरुष आबादी और दूसरी तरफ महिला आबादी होती है। लंबवत अक्ष (vertical axis) एक समान खंडों में बंटा होता है जो अलग– अलग आयु– वर्गों का इस प्रकार प्रतिनिधित्व करता है जिसमें देश/ इलाके की पूरी आबादी शामिल हो जाए।