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भारत में संविधान सभा का निर्माण

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर पहली बार, वर्ष 1935 में एक संविधान सभा की मांग की थी.
Aug 30, 2014 17:00 IST
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर पहली बार, वर्ष 1935 में एक संविधान सभा की मांग की थी. यह विचार एम.एन. रॉय के दिमाग की उपज था. ब्रिटिश सरकार ने 1940 के 'अगस्त प्रस्ताव' में कांगेस की इस बात को माना था. अंततः वर्ष 1942 में 'क्रिप्स प्रस्ताव' के तहत कांग्रेस की इस मांग को स्वीकार कर लिया गया.

संगठन

'कैबिनेट मिशन योजना' के तहत संविधान सभा, नवम्बर 1946 में अस्तित्व में आया.

इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार थीं:

1. कुल संख्या = 389.
2. इन सीटों में से 93 सीट देशी रियासतों को और 296 सीट शेष ब्रिटिश भारत के लिए आवंटित किए गए थे.
3. प्रत्येक प्रांत और सामंती राज्य को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गईं थीं.
4. ब्रिटिश भारत के अंतर्गत सभी सीटों को मुसलमानों, सिखों और सामान्य लोगो के बीच विभाजित किया गया था.
5. प्रत्येक समुदाय से 4 प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधान सभा में मतदान द्वारा किया गया था.
6. रियासतों के प्रमुखों को यह अधिकार दिया गया था की वे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव स्वयं कर सकें.

चुनाव जुलाई अगस्त, 1946 में आयोजित की गई.

• कांग्रेस नें 208 सीटें जीतीं.
• मुस्लिम लीग नें 73 सीटें जीती.
• छोटे समूहों और निर्दलीय समूहों नें 15 सीटें जीती.
• पहली बैठक केवल 211 सदस्यों के साथ 9 दिसंबर 1946 को आयोजित किया गया था जिसका (मुस्लिम लीग नें बहिष्कार किया था.)
• रियासतों नें चुनाव से दूर रहने का फैसला किया था अतः उनकी सीटें खाली रह गईं.

हालांकि, 3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना की स्वीकृति के बाद अधिकांश रियासतों के लोग इसमें शामिल हो गए. इस योजना के बाद एक अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जिसमे संविध्हन सभा को पूरी तरह से एक संप्रभु निकाय घोषित किया गया और उसे विधानसभा के रूप में स्वीकार किया गया.

कार्य

संविधान सभा नें संविधान का मसौदा तैयार किया:

• मई 1949 में राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता का अनुमोदन किया गया.
• 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज अपनाया.
• 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गीत अपनाया.
• राष्ट्रीय गान 24 जनवरी, 1950 को अपनाया गया.
• 24 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद निर्वाचित हुए.

मसौदा समिति

मसौदा समिति को प्रारूप समिति भी कहा जाता है. संविधान सभा कई समितियों को सम्मिलित किये हुए थी. इसके अंतर्गत सदन समिति, प्रक्रिया समिति और अन्य कई समितियां थी. लेकिन सबसे प्रमुख समिति थी मसौदा समिति अर्थात प्रारूप समिति.

इसका गठन 29 अगस्त, 1947 को किया गया था और नए संविधान का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा गया था.

समिति के सात सदस्य थे:

1. डॉ बी आर अम्बेडकर (अध्यक्ष)
2. एन गोपालस्वामी अय्यंगर
3. डॉ कश्मीर एम मुंशी
4. टी टी कृष्णमाचारी
5. सैयद मोहम्मद सादुल्ला
6. एन माधव राव
7. अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर

संविधान का पहला मसौदा फरवरी 1948 में प्रकाशित किया गया था.  लोगों ने इस मसौदे पर आठ महीने तक चर्चा की थी. विचार विमर्श के बाद, सुझावों और प्रस्तावित संशोधनों पर विचार किया गया और एक दूसरा  मसौदा विधानसभा द्वारा तैयार किया गया था. दूसरा मसौदा अक्टूबर 1948 में प्रकाशित किया गया था. मसौदा समिति ने कुल 141 दिनों तक चर्चा की थी और मसौदे को तैयार करने में कम से कम छह महीने का समय लिया था.

संविधान के लागू होने और प्रवर्तन होने का समय क्रमशः क्रमशः, 26 नवंबर, 1949 और 26 जनवरी 1950 को था. हालांकि, कुछ भागों के प्रस्ताव को 26 नवम्बर 1949' को ही लागू कर दिया गया था. बाकी के प्रावधानों को बाद के काल में क्रमशः लागू किया गया था.

एक आलोचना

कुछ ऐसे आधार हैं जिनके आधार पर आलोचकों नें संविधान सभा का मूल्यांकन किया था जोकि प्रमुख हैं.

1. कुछ सदस्यों का मानना था की संविधान सभा में नियुक्त किये लोग पूरी तरह से भारत की जनता द्वारा निर्वाचित नहीं किये गए जोकिथे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर मान्य किया जाना चाहिए था, अतः संविधान सभा एक प्रतिनिधि सभा नहीं था.
2. आलोचकों का यह भी मानना था की संविधान सभा ब्रिटिश सरकार के द्वारा बनाई गई है और उसी सरकार की अनुमति के साथ इसने अपने सभी सत्र को आयोजित किया था, अतः यह एक संप्रभु सभा नहीं था.
3. ग्रानविले ऑस्टिन नें इसे 'एक एक पार्टी वाले देश में एक पार्टी की सरकार वाला ' संविधान सभा कहा है. आलोचकों नें अपने विचारों को साझा करके यह विचार व्यक्त किया है की विधानसभा में कांग्रेस का ही केवल वर्चस्व.
4. कुछ आलोचकों का यह मानना था की यह सिर्फ और सिर्फ एक हिन्दू सभा थी. जोकि देश के एक मात्र बड़े समुदाय का प्रतिनिधित्व करता था.

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