Search

भीमबेटका पाषाण आश्रयः तथ्यों पर एक नजर

भीमबेटका की गुफाएं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में हैं। ये पाषाणी आश्रय मध्य भारतीय पठार के दक्षिणी छोर पर विंध्य पर्वतमाला के तलहटी में हैं। डॉ. वी.एस. वाकाणकर (प्रख्यात पुरातत्वविदों में से एक), ने 1958 में इन गुफाओं की खोज की थी। 'भीमबेटका' शब्द, 'भीम बाटिका' से बना है। इन गुफाओं का नाम महाभारत के पांच पांडवों में से एक 'भीम' के नाम पर रखा गया है। भीमबेटका का अर्थ है– भीम के बैठने का स्थान।
Jul 26, 2016 18:16 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon

भीमबेटका की गुफाएं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में हैं। ये पाषाणी आश्रय मध्य भारतीय पठार के दक्षिणी छोर पर विंध्य पर्वतमाला के तलहटी में हैं। डॉ. वी.एस. वाकाणकर (प्रख्यात पुरातत्वविदों में से एक), ने 1958 में इन गुफाओं की खोज की थी। 'भीमबेटका'  शब्द, 'भीम बाटिका' से बना है। इन गुफाओं का नाम महाभारत के पांच पांडवों में से एक 'भीम' के नाम पर रखा गया है। भीमबेटका का अर्थ है– भीम के बैठने का स्थान।
 
भीमबेटका के पाषाण आश्रय का स्थानः

Jagranjosh

Image source:www.mp-tourism.com

भीमबेटका के पाषाण आश्रय की तस्वीरें:

Jagranjosh

Image source:www.travelblog.org

भीमबेटका की गुफा में बनी तस्वीरें– 

Jagranjosh

Image source:ddlogo.blogspot.com 

Jagranjosh

Image source:www.gettyimages.co.uk

सम्बंधित लेख पढने के लिए नीचे क्लिक करें....

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के लिए 15 भारतीय स्थलों की दावेदारी

यूनेस्को द्वारा घोषित भारत के 32 विश्व धरोहर स्थल

भीमबेटका के पाषाण आश्रय के बारे में तथ्यः

1. ये पाषाण आश्रय मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में अब्दुल्लाहगंज शहर के पास एवं रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है।

2. भीमबेटका पाषाण आश्रय पाषाण काल का एक पुरातात्विक स्थल है।

3. वर्ष 2003 में इन पाषाण आश्रयों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था।

4. पूरे इलाके में 600 से अधिक गुफाएं हैं।

5. इन गुफाओं में की गई चित्रकारी और ऑस्ट्रेलिया के सवाना क्षेत्र के आदिवासी शैल चित्रों, कालाहारी रेगिस्तान के बौनों द्वारा की गई चित्रकारी, और फ्रांस के पाषाण युग की लैसकॉक्स गुफा चित्रकारी में जबरदस्त समानता देखने को मिलती है।

6. इन चित्रों में हमारे पूर्वजों की रोजमर्रा की जीवनशैली और दैनिक गतिविधियों को दिखाया गया है।

7. जन्म, दाहसंस्कार, नत्य, धार्मिक संस्कार, शिकार के दृश्य, पशु युद्ध और विनोदपूर्ण स्थितियों जैसी विविध सामुदायिक गतिविधियों को भी इन चित्रों में दर्शाया गया है।

8. गैंडे, बाघ, जंगली भैंसा, भालू, हिरण, सुअर, शेर, हाथी, छिपकली आदि जैसे पशुओं की तस्वीरों को भी उकेरा गया है।

9. बेहद आश्चर्य की बात है कि भीमबेटका के चित्रों के रंग समय के साथ बदरंग नहीं हुए हैं।

10. इन चित्रों में आमतौर पर प्राकृतिक लाल और सफेद रंगों का प्रयोग किया गया है। हरा और पीला रंग भी इस्तेमाल किया गया है।

11. ये रंग मैगनीज, हेमाटाइट, लकड़ी के कोयला, मुलायम लाल पत्थर, पौधों की पत्तियों और पशुओं की चर्बी मिलाकर तैयार किए गए थे।

12. पशुओं की विशाल रेखीय चित्र पाषाण काल के चित्रों के ट्रेडमार्क हैं। समय के साथ ये चित्र छोटे, सटीक और अधिक उत्कृष्ट होते चले गए।

13. इनमें से सबसे पुराना चित्र करीब 12,000 वर्ष पुराना है, जबकि नवीनतम चित्र करीब 1000 वर्ष पुराने हैं।

14. भीमबेटका की करीब 600 गुफाओं में से पर्यटकों के लिए सिर्फ 12 गुफाएं खोली गई हैं।

15. ये गुफाएं एक टूटे हुए आईने के रंगीन टुकड़ों जैसे हैं जो हमारे पूर्वजों के जीवन की समृद्धी को दर्शाते हैं।

भारतीय इतिहास पर क्विज हल करने के लिए यहाँ क्लिक करें