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मध्य यूरोपीय पहल (सीईआई): यूरोपीय एकीकरण के लिए मंच

मध्य यूरोपीय पहल (सीईआई) सबसे पुराना और बड़ा है उप- क्षेत्रीय सहयोग की पहल मे जो की मध्य और पूर्वी यूरोप में उभरा साम्यवादी व्यवस्था के पतन के बाद। इसकी स्थापना 1989 में ऑस्ट्रिया, इटली, हंगरी और यूगोस्लाविया द्वारा की गयी, चतुर्भुज सहयोग के रूप में। मध्य यूरोपीय पहल की उत्पत्ति क्वाड्रगोनल के निर्माण में निहित है। 1990 में वेनिस में हुए पहले शिखर सम्मेलन में, चेकोस्लोवाकिया को भर्ती कराया गया और पहल का बदल कर पंचभुजी रखा गया।
Aug 2, 2016 10:42 IST
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सेंट्रल यूरोपियन इनिशिएटिव (सीईआई) एक सबसे पुरानी और बड़ी उप- क्षेत्रीय संस्था है जिसकी स्थापना 1989 में ऑस्ट्रिया, इटली, हंगरी और यूगोस्लाविया द्वारा की गयी | मध्य यूरोपीय पहल की उत्पत्ति क्वाड्रगोनल के निर्माण में निहित है। 1990 में वेनिस में हुए पहले शिखर सम्मेलन में, चेकोस्लोवाकिया को भर्ती कराया गया और पहल का बदल कर पंचभुजी रखा गया।

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1991 में, पोलैंड के प्रवेश के साथ यह हेक्सागोनल बन गया। 1992 मे संगठन का नाम बदल कर सेंट्रल यूरोपियन इनिशिएटिव (सीईआई ) रखा गया। इसी अवसर पर, मैसेडोनिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, क्रोएशिया और स्लोवेनिया को भर्ती करा गया सदस्य राज्यों के रूप में। चेकोस्लोवाकिया के भंग होने के बाद 1993 में चेक गणराज्य और स्लोवाकिया को सीईआई में भर्ती कराया गया। 1996 में अल्बानिया, बेलारूस, बुल्गारिया, माल्डोवा, रोमानिया और यूक्रेन पूर्ण सदस्यों के रूप सीईआई में शामिल हो गए। वर्तमान सदस्यता प्राप्त होती है यूगोस्लाविया के संघीय गणराज्य के आसंजन से (बाद में सर्बिया के राज्य संघ और मोंटेनेग्रो और उसके बाद सर्बिया से) 2000 में और मोंटेनेग्रो से 2006 में।

सीईआई के विशेष कार्य और उद्देश्य

यूरोपीय एकीकरण को एक ठोस योगदान प्रदान करने के लिए, सीईआई बहुपक्षीय कूटनीति और परियोजना प्रबंधन को जोड़ती है दोनों को दाता और प्राप्तकर्ता के रूप में, साथ ही यूरोपीय स्थूल क्षेत्रों को भी जोड़ती है।

सीईआई के सामरिक उद्देश्ये निम्नलिखित हैं :

• सीईआई के सदस्य राज्यों का समर्थन करना यूरोपीय एकीकरण की दिशा में उनके पथ पर;
• यूरोपीय संघ के मानकों पर सीईआई सदस्य राज्यों के संरेखण को बढ़ावा देना
• छोटे और मध्यम आकार के परियोजनाओं को लागू करना

इस संदर्भ में, राजनीतिक सहयोग का यह उद्देश्य है की देशों और उनके संस्थानों को लचीला, व्यावहारिक मंच क्षेत्रीय सहयोग के लिए प्रदान कर सके, जबकि वह अपना ध्यान केंद्रित करते हैं यूरोपीय संघ (ईयू ) के लिए एक भविष्य में परिग्रहण तैयार करने के लिए। ऐसा करने में, विशेष ध्यान दिया गया है गैर यूरोपीय संघ सीईआई के सदस्य राज्यों की क्षमता निर्माण पर, जो की धन्यवाद करते हैं अपने आदर्श स्थान के लिए, अपनाई गयी है कि कैसे हस्तांतरण और अनुभव के आदान-प्रदान उन देशों में जो यूरोपीय संघ के सदस्य हैं और वे जो नहीं हैं। सीईआई सक्रिय रूप से लगे हुए है विभिन्न क्षेत्रों मे परियोजनाओं के समर्थन में, इसके अलावा, वित्तीय संसाधन जुटाने से अधिक से अधिक संभावनाएं उपलब्ध होंगी ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं को अध्ययन, वित्तपोषण और क्रियान्वित किया जा सकेगा।

सीईआई सक्रिय रूप से विभिन्न क्षेत्रों में कई परियोजनाओं का समर्थन करता है और वित्तीय संसाधन जुटाने के माध्यम और उपलब्ध कराने के लिए कई क्षेत्रो में जैसे की अध्ययन ,वित्तपोषण, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं की अधिक से अधिक संभावनाएं को क्रियान्वित करने में लगे हुए है।

सहयोग के क्षेत्र

एक ज्ञान आधारित समाज की ओर

1. अनुसंधान और नवाचार
2. आजीवन शिक्षा और प्रशिक्षण
3. सूचना समाज

एक सतत अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा में

1. परिवहन, रसद और पहुंच
2. ऊर्जा दक्षता और नवीकरण ऊर्जा
3. जलवायु पर्यावरण और ग्रामीण विकास
4. एसएमई और व्यवसाय विकास

एक विशेष समाज के प्रति

1. सांस्कृतिक सहयोग
2. मीडिया
3. नागरिक समाज

सीईआई की संगठनात्मक संरचना

सीईआई के कार्य करने की पद्धति बहुत लचीला है जिससे वो अंतर सरकारी , अंतर- संसदीय और व्यापार में सहयोग देकर सबको बढ़ावा दे सके।

सरकारी आयाम : यह राजनीतिक और आर्थिक दिशा प्रदान करता है और यह सीईआई के संगठनात्मक और वित्तीय निर्देशों के लिए जिम्मेदार है ।
संसदीय आयाम : सीईआई राष्ट्रीय संसदों का प्रतिनिधि संसदीय असेंबली , संसदीय समिति और जनरल समितियों के ढांचे मेंसहयोग करते और मिलते हैं।
व्यापार आयाम : सीईआई सदस्य देशों के व्यापारिक समुदायों को बढ़ावा देता है। उनके आपस में उल्टी विनियोग विधि का , आदानों को बढ़ावा देने का, खुले विचार विमर्श करने का और राजनीतिक नेतृत्व के लिए सिफारिशों का एक सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रोल निभाता है ।