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महान अकबर

भारत में मुगल शासन का  आगमन  सांस्कृतिक समृद्धि व नैतिक परिवर्तन लाया | अकबर का इतिहास 16वी सदी की तारीखों में लिखा गया | इसने भारत पर 1556 से 1605 तक शासन किया | वह महान हुमायूँ का पुत्र था जिसने  भारत पर 26 वर्षों तक शासन किया | व्यापक रूप से मुगल, बाबर के नेतृत्व में भारत को लूटने आए परंतु वे अन्य शासकों की तरह क्रूर नहीं थे जिन्होनें भारत को लूटा | वास्तव में, मुगलों के शासन काल के दौरान भारत ने बेहतरीन उन्नति की |
Oct 13, 2015 17:38 IST
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जलाल-उद-दीन मोहम्मद अकबर  एक नाम, जो अपने आप में विरासत है, का जन्म राजा हुमायूँ और बेगम हमीदा बानो के हुआ, जब वे वर्ष 1542 में निर्वासन में रह रहे थे |अकबर की रुचि सभी युद्ध तकनीकों को सीखने में थी और वह पूरी तरह से पढ़ने  और लिखने में उदासीन था | वास्तव में वह बिलकुल भी पढ़ा लिखा नहीं था फिर भी वह सभी चीजों के बारे में जानने का इच्छुक था | बैरम खान के मार्गदर्शन में जलाल को  13 वर्ष की बहुत ही छोटी  आयु में शहँशाह अकबर के शीर्षक से नवाज़ा गया | बैरम खान सबसे वफ़ादार और योग्य सेना प्रमुख था जोकि शुरुआत में हुमायूँ के सेना में सेनापति था और उनकी मृत्यु के बाद, बैरम खान ने हेमू की बढ़ती हुई तानाशाही को समाप्त करने में अकबर की मदद की | बैरम की कमान में अकबर की सेना ने हेमू को 1556 AD में पानीपत के द्वितीय  युद्ध में पराजित  किया था |   

प्रशासन

अकबर को बहुत सक्षम सत्तारूढ़ तकनीक के लिए जाना जाता था | वह जिससे भी वह मिलता था उससे ज्ञान एकत्र करना चाहता था | उनका अपनी प्रजा से विनम्रता से बात करने का तरीका उनकी सबसे प्रमुख विशेषता थी |

अकबर अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध था  परंतु वह रणनीतिक तरीके से निरपेक्ष भी था | इतनी विशाल भूमि और विभिन्न धर्मों के देश पर शासन   उसने अपनी योग्यता के दम किया  |   

अकबर के शासन में धर्म

  • अकबर कट्टर मुसलमान नहीं था बल्कि उसे सभी धर्मों के प्रति सहनशीलता के लिए जाना जाता था | इसी कारण वह लोगों के बीच प्रसिद्ध था |
  • अकबर ने कई धर्मों में विवाह किए जिसके द्वारा वह एकता और एकजुटता का संदेश देता था |
  •  “सभी की एकता” में अपने विश्वास को मजबूत करने के लिए अकबर ने दीन-ए-इलाही के सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसके द्वारा उसने “सभी धर्म समान हैं” के सिद्धांत को फैलाया |

कला व संस्कृति

एक समर्पित  शासक होने के साथ अकबर कला और संस्कृति का  महान संरक्षक था | वह कवियों व गायकों और कला से जुड़े लोगों के साथ का आनंद लिया करते था |

इसके दिल्ली में और उसके आसपास के किले  व महल, बेजोड़ कारीगरी की श्रेष्ठ कृतियाँ हैं |  उनमे से कुछ हैं फ़तेहपुर सीकरी, इलाहाबाद का किला, और आगरा का किला इत्यादि | अकबर संगीत व कविताओं का महान अनुरागी था, इसका दरबार महान कलाकारों, विद्वानों, कवियों, और गायकों इत्यादि का अनूठा मिश्रण था जोकि अकबर व उसकी सभा मे उल्लास बनाए रखते थे |

 संस्कृति के लिए उसके इस प्यार ने उसके दरबार को नौ रत्नों से सुशोभित किया, जिन्होनें कला और ज्ञान के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, वे निम्न हैं –

  1. बीरबल (महेश दास ) दरबार का विदूषक
  2. मियां तानसेन (तन्ना मिश्रा ) दरबार का गायक    
  3. अबुल फजल (काल गणक ) जिसने अन –ए-अकबरी लिखी
  4. फैज़ी (दरबार का कवि )
  5. महाराजा मान सिंह ( सेना सलाहाकार )
  6. फ़कीर अजीउद्दीन (सूफी गायक )
  7. मिर्ज़ा अज़ीज़ कोको (गुजरात का सूबेदार )
  8. टोडरमल ( वित्तीय सलाहाकर )
  9. अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ( हिन्दी छन्दों के लेखक )

अकबर के जीवन में अन्य विशेषताएँ

कुछ ओर प्रमुख आदतें  जो लोगों को राहत देतीं थीं जिसके लिए अकबर को याद किया जाता था, वे हैं :

  • अकबर के शासन काल में जज़िया कर को समाप्त कर दिया गया |
  • इसने पढे लिखे हिन्दू पंडितों को महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर नियुक्त किया |
  • वह आम लोगों से बात करते थे व उनकी परेशानियों को दीवान-ए-आम में सुना करते थे |
  • वह हिन्दू, मुसलमान, और ईसाई विद्वानों से दीवान-ए-खास में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करते थे |

अकबर के शासन का अंत

1605 में 63 वर्ष की आयु में अकबर रक्ततिसार (पेचिश) से बुरी तरह ग्रस्त हो गए जो ठीक नहीं किया जा सका और इसने अकबर का जीवन ले लिया | अकबर को सम्मानपूर्वक तरीके से आगरा के किले में दफ़ना दिया गया |