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महान चोल मंदिरः विश्व धरोहर स्थल के बारे में जानकारी

महान चोल मंदिरों का निर्माण चोल साम्राज्य के शासकों ने करवाया था। ये मंदिर पूरे दक्षिण भारत और आस– पास के द्वीपों में फैले हैं। इन स्थानों पर 11वीं और 12वीं सदी में बने तीन मंदिर– गंगाईकोंडाचोलीश्वरम का बृहदेश्वर मंदिर (राजेन्द्र प्रथम द्वारा निर्मित,1035 में बन कर तैयार हुआ), तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर और दारासुरम का ऐरावतेश्वर मंदिर( राजराजा द्वितीय द्वारा बनवाया गया)   हैं।
Aug 10, 2016 10:56 IST
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महान चोल मंदिरों का निर्माण चोल साम्राज्य के शासकों ने करवाया था। ये मंदिर पूरे दक्षिण भारत और आस– पास के द्वीपों में फैले हैं। इन स्थानों पर 11वीं और 12वीं सदी में बने तीन मंदिर– गंगाईकोंडाचोलीश्वरम का बृहदेश्वर मंदिर (राजेन्द्र प्रथम द्वारा निर्मित, 1035 में बन कर तैयार हुआ), तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर और दारासुरम का ऐरावतेश्वर मंदिर (राजराजा द्वितीय द्वारा बनवाया गया) हैं। ये मंदिर वास्तुकला, मूर्तिकला, चित्रकला और पीतल की ढलाई के काम में चोलों की शानदार उपलब्धियों को दर्शाते हैं।

महान चोल मंदिरों की तस्वीरें:

क. तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर परिसर के बारे में:

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(तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर)

Image Source:undiscoveredindiantreasures.blogspot.com

1. तंजावुर के शैव मंदिर को बृहदेश्वर और दक्षिणामेरू मंदिर भी कहते हैं।

2. इसका निर्माण चोल सम्राट राजराजा (985-1012 ई.) ने करवाया था।

3. यह ग्रेनाइट की चट्टानों से बना है।

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4. इसे 'दक्षिण भारत में भवन कला के विकास में मील का पत्थर' माना जाता है। इसका विमान ' भारतीय वास्तुकला की कसौटी का मूल' माना जाता है।

5. यह मंदिर करीब 240.9 मीटर लंबा (पूर्व– पश्चिम) और 122 मीटर चौड़ा (उत्तर– दक्षिण) इलाके में फैला है।

6. दीवारों पर आदमकद में बने चित्रों में सरस्वती, दुर्गा, भीक्षांत, वीरभद्र, कालांतक, शिव और अर्द्धनारीश्वर के आलिंगन रूप को दर्शाया गया है।

ख. पेराम्बलूर जिले के गंगाईकोंडाचोलापुरम के बृहदेश्वर मंदिर के बारे में

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(गंगाईकोंडाचोलीश्वरम का बृहदेश्वर मंदिर)

Image Source:www.pinterest.com

1. महान चोल राजा राजराजा प्रथम (985-1014 ई.) के प्रख्यात पुत्र राजेन्द्र प्रथम (1012 ई. -1044 ई.) ने इस स्थान को चोल साम्राज्य की नई राजधानी बनाने के लिए चुना था।

2. उत्तर के प्रदेशों पर जीत के उपलक्ष्य में इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में करवाया गया था।

3. इस मंदिर के वास्तुकार ने तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर के निर्माण के दौरान की गई गलतियों को सुधारा और हारा तत्वों (hara elements) को उचित तरीके से बदल कर और सही स्थान पर रखा एवं मंदिर को मनभावन उंचाई दिलाई |

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4. इस मंदिर की मूर्तियां अद्भुत गुणवत्ता वाली हैं। इसमें नृत्य करते अडवालन (नटराज), दक्षिणामूर्ती, अर्द्धनारी, गणेश, हरिहर ( दक्षिण की दीवार के आलों पर), गंगाधर, लिंगोद्भव, विष्णु, सुब्रह्मण्या, विष्णु– अनुग्रहमूर्ती (पश्चिम दीवार), दुर्गा और ब्रह्मा, हैं।

5. भोगशक्ति औऱ सुब्रह्मण्या की कांसे की मूर्तियां चोल धातु मूर्तियों की अद्भुत मिसाल है।

6. एक ब्रिटिश अधिकारी ने कोल्लीडम नदी पर बांध बनवाने के लिए पत्थरों के स्रोत के रूप में इस मंदिर को सर्वश्रेष्ठ स्रोत चुना था इसलिए उसने इस मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था। लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध की वजह से वह ऐसा नहीं कर सका।

ग. ऐरावतेश्वर मंदिर ( राजराजा द्वितीय द्वारा निर्मित), दारासुरम-

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(ऐरावतेश्वर मंदिर)

Image Source:undiscoveredindiantreasures.blogspot.com

ऐरावतेश्वर मंदिर (राजराजा द्वितीय द्वारा निर्मित), दारासुरम के तथ्यः

1. इसका निर्माण चोल राजा राजराजा द्वितीय (1143ई. -1173 ई.) ने करवाया था, इस मंदिर को चोल वास्तुकला का नगीना माना जाता है।

2. तंजावुर और गंगाईकोंडाचोलापुरम के बृहदेश्वर मंदिरों की तुलना में इसका आकार बहुत छोटा है।

3. इस मंदिर में पवित्र स्थल और अक्षीय मंडप हैं। शिलालेख से पता चलता है कि सामने बना मंडप राजगंभीरन तिरुमंडपम नाम का मंडप है जो अद्वितीय है। इस मंडप के स्तंभ बहुत ही सुसज्जित हैं।

4. इस मंदिर में कई प्रकार की मूर्तियां थीं, जैसे अलग– अलग भाव में ऋषि पत्नियों के साथ भीक्षाटन, को अब तंजावुर के कला संग्रहालय में संरक्षित कर रखा गया है।

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