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मानव विकास सूचकांक क्या है

मानव विकास सूचकांक (HDI) जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, और आय सूचकांकों का एक संयुक्त सांख्यिकी  सूचकांक है जिसे मानव विकास के तीन आधारों द्वारा तैयार किया जाता है । इसे अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक द्वारा बनाया गया था, जिसका 1990 में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन द्वारा समर्थन किया गया, और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित किया गया । UNDP ने मानव विकास सूचकांक की गणना के लिए एक नई विधि की शुरुआत की है। निम्नलिखित तीन सूचकांक इस्तेमाल किये जा रहे हैं: 1. जीवन प्रत्याशा  सूचकांक  (लम्बा व स्वस्थ जीवन) 2. शिक्षा सूचकांक (शिक्षा का स्तर) 3. आय सूचकांक (जीवन स्तर)
Mar 8, 2016 13:03 IST
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मानव विकास सूचकांक (HDI) जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, और आय सूचकांकों का एक संयुक्त सांख्यिकी  सूचकांक है जिसे मानव विकास के तीन आधारों द्वारा तैयार किया जाता है । इसे अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक द्वारा बनाया गया था, जिसका 1990 में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन द्वारा समर्थन किया गया, और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित किया गया । UNDP ने मानव विकास सूचकांक की गणना के लिए एक नई विधि की शुरुआत की है। निम्नलिखित तीन सूचकांक इस्तेमाल किये जा रहे हैं:
1. जीवन प्रत्याशा  सूचकांक  (लम्बा व स्वस्थ जीवन)

2. शिक्षा सूचकांक (शिक्षा का स्तर)

3. आय सूचकांक (जीवन स्तर)

अपने 2010 की मानव विकास विवरण में, UNDP ने मानव विकास सूचकांक की गणना के लिए एक नई विधि का उपयोग शुरू किया है । निम्नलिखित तीन सूचकांकों इस्तेमाल किये जा रहे हैं:

1. जीवन प्रत्याशा सूचकांक

2. शिक्षा सूचकांक: इसमें शामिल है

a. विद्यालय सूचकांक के औसत वर्ष
b. विद्यालय सूचकांक के प्रत्याशित वर्ष

3. आय सूचकांक

यूएनडीपी द्वारा जारी रिपोर्ट (2015) में भारत ने मानव विकास सूचकांक में थोड़ी प्रगति की है. भारत का एचडीआई इंडेक्स में 130 वां स्थान है. हालांकि अब भी यह निचले पायदान पर है. मानव विकास सूचकांक के 2014 के लिए तैयार रिपोर्ट में 188 देशों के लिए जारी यह रिपोर्ट मुख्य रूप से लोगों के जीवन स्तर को दर्शाती है.
जीवन प्रत्याशा में सुधार और प्रति व्यक्ति आय बढने से एचडीआई में भारत की स्थिति सुधरी है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा आज जारी मानव विकास रिपोर्ट, 2015 में 188 देशों की सूची में भारत 130वें स्थान पर हैं. यह रैंकिंग 2014 के लिए है.ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत 131वें स्थान से 130वें सथान पर आया है. वर्ष 2009 से 2014 के बीच भारत का एचडीआई रैंक छह स्थान सुधरा है.

रिपोर्ट के साथ जारी एक नोट में कहा गया है, ‘‘भारत का एचडीआई मूल्य 2014 में 0.609 रहा और 188 देशों एवं क्षेत्रों की सूची में 130वें स्थान रहा. इसके साथ देश मानव विकास पैमाने पर मध्यम श्रेणी के देशों में आ गया है.' इसके अनुसार, ‘‘1980-2014 के बीच भारत का एचडीआई मूल्य 0.362 से बढकर 0.609 पर पहुंचा है. यह 68.1 प्रतिशत वृद्धि को बताता है. औसतन सालाना वृद्धि 1.54 प्रतिशत रही.' सूची में नार्वे पहले स्थान पर है जबकि आस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश तथा पाकिस्तान सूची में 142वें और 147वें स्थान पर हैं. ब्रिक्स देशों में भारत सबसे नीचे है. ब्रिक्स के अन्य देश ब्राजील, रुस, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका हैं I

एचडीआई देश में मूल मानव विकास उपलब्धियों का औसत मापक है. यह मानव विकास के तीन मूल आयामों लंबा और स्वस्थ्य जीवन, ज्ञान तक पहुंच और उपयुक्त जीवन स्तर.में दीर्घकालीन प्रगति के आकलन को मापता है.जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 2014 में 68 वर्ष रहा जो पिछले 67.6 तथा 1980 में 53.9 वर्ष था.प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) 2014 में 5,497 डालर रही जो 2014 में 5,180 डालर तथा 1980 में 1,255 डालर थी. 1980 से 2014 के बीच देश की प्रति व्यक्ति जीएनआई में 338 प्रतिशत की वृद्धि हुई I

यूएनडीपी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में 2011 से स्कूली पढाई के प्रत्याशित वर्ष 11.7 वर्ष के स्तर पर बने हुए हैं. साथ ही स्कूली पढाई की का औसत वर्ष 2010 से 5.4 के स्तर पर कायम है l वर्ष 1980 से 2014 के बीच देश में लोगों का जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 14.1 वर्ष बढ़ है. वहीं इसी दौरान स्कूली शिक्षा का औसत वर्ष 3.5 साल तथा प्रत्याशित वर्ष 5.3 वर्ष बढ़ा है |

Jagranjosh

Image source: clatbook.com

सारांश: इस सूचकांक की इस बात पर आलोचना की जाती है कि यह सिर्फ तीन मापदंडों के आधार पर देशों की रैंकिंग जरी करता है I जो कि गलत है अतः इसे और भरोसेमंद बनाने के लिए इसमें व्यापक परिवर्तनों की अतिशीघ्र जरुरत है I