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मानव विकास

बड़ा या अधिक उन्नत बनने के लिए विकास एक गुणात्मक और मात्रात्मक प्रक्रिया का संयोजन है| 'प्रगति' और 'विकास' नए शब्द नहीं हैं, लेकिन समय की अवधि के साथ परिवर्तन के संदर्भ में देखें जाते हैं| विकास एक मात्रात्मक और मूल्य तटस्थ है जिसका मतलब है कि यह एक सकारात्मक या नकारात्मक परिवर्तन हो सकता है जबकि प्रगति का एक गुणात्मक परिवर्तन हमेशा सकारात्मक मूल्य है|
Jul 26, 2016 14:37 IST
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बड़ा या अधिक उन्नत बनने के लिए विकास एक गुणात्मक और मात्रात्मक प्रक्रिया का संयोजन है| 'प्रगति' और 'विकास' नए शब्द नहीं हैं, लेकिन समय की अवधि के साथ परिवर्तन के संदर्भ में देखें जाते हैं|

Jagranjosh

फर्क यह है की विकास एक मात्रात्मक और मूल्य तटस्थ है जिसका मतलब है कि यह एक सकारात्मक या नकारात्मक परिवर्तन हो सकता है|  हो सकता है  कि ये परिवर्तन या तो सकारात्मक (वृद्धि दर्शाता है) या नकारात्मक (एक कमी का संकेत है) हो, जबकि प्रगति का एक गुणात्मक परिवर्तन हमेशा सकारात्मक मूल्य है| इसका मतलब प्रगति  तब तक   संभव नही है जब तक की मौजूदा परिस्थितियों में सकारात्मक वृद्धि हो या फिर कोई नई परिस्थितियों का संयोजन हो| जब सकारात्मक वृद्धि होती है तब प्रगति होती है परन्तु यह जरूरी नहीं की सकारत्मक वृद्धि होने पर हमेशा प्रगति हो| अक्सर प्रगति तब होती है जब गुणात्मक परिवर्तन सकारात्मक हो|

किसी देश की प्रगति उसकी आर्थिक विकास के स्तर पे मापा गया है| मतलब यह की देश की जितनी बड़ी आर्थिक स्तर, उतना ही विकसित देश मना जाता था, भले ही इस विकास से आम लोगों के जीवन में कोई फर्क न पड़ा हो|

देश में लोग गुणवत्ताह के साथ जो जीवन का आनंद ले रहे हैं, जो अवसर उनके पास मौजूद हैं और आजादी का आनंद ले रहे हैं ये सब ही प्रगति के महत्वपपूर्ण पहलू हैं| ये विचार नया नहीं है| ये विचार साफतौर पर सबसे पहले अस्सीौ के अंतिम दशक और नब्बेय के शुरूआती दौर में आया था|

मानवीय विकास की विचारधारा डॉ. महबूब उल हक़ द्वारा प्रस्तावित की गई थी| उनका मुताबिक मानवीय विकास वो विकास है जो लोगो के समक्ष विकल्प बढ़ाए और उनका जीवल बेहतर बनाए| अतः, सब विकास लोगों के आस पास ही घूमता है| विकल्प  कभी स्थायी नहीं रहते हमेशा बदलते रहते हैं| विकास का मूल उदेश्य है जहां लोगों को सार्थक जीवन जीने के लिए परिस्थितियां बनाई जाए

जीवन का कुछ उद्देश्य जरूर होना चाहिए, इसका मतलब लोग स्वस्थ होन चाहिए, अपने हुनर को निखार सकें, सामाजिक भागीदारी और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की छूट| एक लम्बा और स्वस्थ जीवन, ज्ञान हासिल करने के लिए सक्षम होना और एक सभ्य जीवन जीने के लिए पर्याप्त साधन होना मानव विकास के बहुत महत्वपूर्ण पहलू हैं| इसीलिए, संसाधनों का उपयोग, स्वस्थ्य और शिक्षा मानव विकास में महत्वपूर्ण शेत्र हैं| इन सभी पहलुओं को मापने के लिए  उपयुक्त संकेतक विकसित कर लिए गए हैं|

अक्सर, लोगो के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता और स्वतंत्रता नही होती | यह उनके ज्ञान प्राप्त करने की  असमर्थता, गरीबी, सामाजिक भेदभाव संस्थाओं की अक्षमता और अन्य करणों की वजह से भी हो सकता हैं| इससे उन्हें स्वस्थ्य जीवन जीने से, शिक्षा प्राप्त करने से और सभ्य जीवन जीने से रोकता है| स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों के उपयोग के क्षेत्रों में लोगों की क्षमताओं का निर्माण उनके विकल्प के विस्तार करने में महत्वपूर्ण  है| अगर लोगो की इन क्षेत्रों में क्षमता नही है, तो उनके विकल्प भी सीमित रहेंगे। उदाहरण के लिए, एक अशिक्षित बच्चा डॉक्टर बनने का निर्णय नही ले सकता क्यूंकि उसकी विकल्प शिक्षा के अभाव में सीमित रह गए| उसी प्रकार, अक्सर गरीब वर्ग के लोग बीमारी के लिए चिकित्सा उपचार नही ले पाते क्यूंकि उनके विकल्प साधनों के अभाव की वजह से सीमित राह जाते हैं

मानव विकास के स्तंभ

मानव विकास के चार स्तंभ हैं जिनके बारे माईन नीचे चर्चा की जा रही है:

निष्पक्षता - मतलब उपलब्ध अवसरों को बिना पक्षपात के सभी लोगो तक पहुचाना, और वह अवसर बिना किसी लिंग, जाती, और अाय भेदभाव के उपलब्ध होन चाहिए|

स्थिेरता - अवसरों की उपलब्धता में निरंतरता को दर्शाता है| सतत मानव विकास करवाने के लिए, हर पीढ़ी को समान अवसर होना चाहिए| सभी पर्यावरण वित्तीय और मानव संसाधन भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रयोग किए जाने चाहिए| इन संसाधनों में से किसी के भी दुरूपयोग से भविष्य की पीढ़ियों को कम अवसर मिलेंगे|

उत्पाहदकता -  मानव श्रम उत्पादकता या मानव काम के लिहाज से है कि लगातार लोगों में क्षमताओं के निर्माण से समृद्ध किए जाने को दर्शाता है| अंत में, यह लोग हैं, जो राष्ट्रह की वास्तविक संपत्ति है| इसलिए, उनके ज्ञान को बढ़ाने के प्रयासों, या बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं अंततः बेहतर कार्य कुशलता के लिए योगदान करेंगी|

अधिकारिता - स्वतंत्रता और क्षमता में वृद्धि से ही उनकी विकल्पि चुनने की क्षमता बढ़ती है और अधिकारिता आती है| सुशासन और उन्मुख नीतियां लोगों को सशक्त करने के लिए आवश्यक हैं| सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों के सशक्तिकरण के लिए विशेष महत्व का है|