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मानसून उत्पत्ति सम्बन्धी जेट-स्ट्रीम संकल्पना

ऊपरी वायुमंडल (9 से 18 किमी.) में प्रवाहित होने वाली तीव्र वायु-प्रणाली को ‘जेट स्ट्रीम’ कहा जाता है| गर्मियों के मौसम में पछुआ जेट स्ट्रीम के उत्तर की ओर खिसकने और भारत के ऊपर पूर्वी जेट स्ट्रीम के प्रवाहित होने का संबंध मानसून की उत्पत्ति से है|
Apr 25, 2016 17:53 IST
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मानसून उत्पत्ति संबंधी जेट स्ट्रीम सिद्धान्त अपेक्षाकृत नवीन और विश्वसनीय सिद्धान्त है| ऊपरी वायुमंडल (9 से 18 किमी.) में प्रवाहित होने वाली तीव्र वायु-प्रणाली को ‘जेट स्ट्रीम’ कहा जाता है| जेट विमानों की उड़ान में सहायक होने के कारण इन्हें ‘जेट स्ट्रीम’ नाम दिया गया है| ये पवनें सामान्यतः पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं, लेकिन कुछ स्थानीय परिस्थितियों के कारण गर्मियों में पूर्वी जेट स्ट्रीम का उद्भव भी हो जाता है| ऊपरी वायुमंडल में प्रवाहित होने वाली ये पवनें धरतलीय मौसम की दशाओं को प्रभावित करती हैं|

मानसून उत्पत्ति संबंधी अन्य संकल्पनाएँ:

  1. मानसून का भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्त
  2. मानसून की तापीय संकल्पना

मानसून के आगमन में जेट स्ट्रीम की भूमिका

सर्दियों के मौसम में भारत या एशिया के ऊपर ‘पछुआ जेट स्ट्रीम’ (जिसे उपोष्ण जेट स्ट्रीम या Subtropical Jet Stream भी कहा जाता है) प्रवाहित होती है, लेकिन तिब्बत हिमालय की उपस्थिति के कारण यह उत्तरी व दक्षिणी दो शाखाओं में बंट जाती है| इसकी उत्तरी शाखा हिमालय व तिब्बत के पठार के उत्तर में प्रवाहित होती है और दक्षिणी शाखा हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है|

जब तक पछुआ जेट स्ट्रीम भारत के ऊपर से प्रवाहित होती है, तब तक भारत पर उच्च दाब बना रहता है और वह धरातलीय वायु को ऊपर उठने से रोकती है| इसीलिए मई के मौसम में, जब उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक उच्च ताप पाया जाता है तब भी ऊपरी वायुमंडल में पछुआ जेट स्ट्रीम की उपस्थिति के कारण धरातलीय वायु ऊपर नहीं उठ पाती है| धरातलीय पवनों के ऊपर न उठ पाने के कारण उच्च ताप के बावजूद धरातलीय निम्न दाब नहीं बन पाता है और न ही मानसूनी पवनें भारत की ओर आकर्षित हो पाती हैं| पछुआ जेट स्ट्रीम के कारण हवाएँ उत्तर से दक्षिण की ओर अर्थात उत्तर-पूर्वी मानसून के रूप में प्रवाहित होती हैं|

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Image courtesy: rossway.net

गर्मियों के मौसम में जब सूर्य कर्क रेखा के ऊपर स्थित होता है तो पछुआ जेट स्ट्रीम भी उत्तर की ओर खिसक जाती है और हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होने वाली पछुआ जेट स्ट्रीम की धारा लुप्त हो जाती है| पछुआ जेट स्ट्रीम के लुप्त होते ही भारत के ऊपर पूर्वी जेट स्ट्रीम प्रवाहित होने लगती है| पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति तिब्बत के पठार के गर्म होने से पठार के ऊपर की वायु के ऊपर उठने से होती है, लेकिन पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति अत्यधिक अनियमित होती है|

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तिब्बत के पठार के गर्म होने से पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति

पछुआ जेट स्ट्रीम के लुप्त होने और पूर्वी जेट स्ट्रीम के प्रवाहित होने के कारण ही उत्तर-पश्चिम भारत की धरातलीय गर्म पवनें ऊपर उठने लगती हैं और उच्च निम्न दाब का निर्माण हो जाता है, जिसे भरने के लिए मानसूनी पवनें भारत की ओर आकर्षित होती है और मानसून का आगमन हो जाता है| 

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