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मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और वियना सम्मेलन (वियना संधि)

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन क्षरण को रोकने KE LIYE बनाया गया है/ इस प्रोटोकॉल के माध्यम से उन पदार्थों के उत्पादन को कम करना है जो कि ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार है। इस संधि पर 16 सितंबर, 1987 को हस्ताक्षर किए गये थे और यह 1 जनवरी, 1989 से यह प्रभावी हो गयी, जिसकी पहली बैठक मई 1989 में हेलसिंकी में हुयी थी। तब से अभी तक इसमें सात संशोधन 1990 (लंदन), 1991 (नैरोबी), 1992 (कोपेनहेगन), 1993 (बैंकाक), 1995 (वियना), 1997 (मॉन्ट्रियल), और 1999 (बीजिंग) हो चुके हैं।
Dec 23, 2015 14:36 IST
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मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन क्षरण को रोकने KE LIYE बनाया गया है/ इस प्रोटोकॉल के माध्यम से उन पदार्थों के उत्पादन को कम करना है जो कि ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार है। इस संधि पर 16 सितंबर, 1987 को हस्ताक्षर किए गये थे और यह 1 जनवरी, 1989 से यह प्रभावी हो गयी, जिसकी पहली बैठक मई 1989 में हेलसिंकी में हुयी थी। तब से अभी तक इसमें सात संशोधन 1990 (लंदन), 1991 (नैरोबी), 1992 (कोपेनहेगन), 1993 (बैंकाक), 1995 (वियना), 1997 (मॉन्ट्रियल), और 1999 (बीजिंग) हो चुके हैं।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने ओजोन क्षयकारी पदार्थों या तत्वों के कुल वैश्विक उत्पादन और खपत की गिरावट में उल्लेखनीय योगदान दिया है जिसका प्रय़ोग विश्व भर में कृषि, उपभोक्ता और अद्यौगिक क्षेत्रों में प्रयोग किया गया। 2010 के बाद से, प्रोटोकॉल के एजेंडे का ध्यान हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (HCFCs) को कम  करने पर केंद्रित है जिनका मुख्य रूप से ठंडे और प्रशीतन अनुप्रयोगों और फोम उत्पादों के निर्माण में प्रयोग किया जाता है।

ओजोन लाभ के अतिरिक्त, HCFCs का फेज आउट एजेंडा दृढ़ता से जलवायु शमन और ऊर्जा दक्षता पर जोर देता है। जलवायु लाभ कम या बिना ग्लोबल वार्मिंग की क्षमता के साथ पदार्थों का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है और निश्चित प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऊर्जा दक्षता में सुधार प्राप्त किया जा सकता है।

रणनीति:

विश्व बैंक की रणनीति, परियोजना की गतिविधियों में ओजोन और जलवायु कार्यसूची को बेहतर तरीके से परिलक्षित करके एचसीएफसी चरण के लिए पर्यावरणीय लाभ को अधिकतम करने पर केंद्रित है

बैंक द्वारा वित्तपोषित ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम में एचसीएफसी का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से बेहतर कार्य करना है जबकि गैर-एचसीएफसी उपकरणों की बढ़ती मांग तथा वैकल्पिक तकनीकों के संभावित जलवायु प्रभाव के बारे में उपयोगकर्ताओं को जानकारी देना है। परियोजनाओं में प्रौद्योगिकी के उपयोग का प्रदर्शन करने के लिए रणनीति निर्माताओं और सेवा क्षेत्र के साथ सीधे काम करने का भी समर्थन करती है जिससे प्रर्दशन में सुधार, कम ऊर्जा की खपत को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है जबकि इससे जलवायु को लाभ मिलता है। विशेष रूप से कुछ विकासशील देशों में, वाणिज्यिक उपलब्धता और वैकल्पिक समाधान की लागत का मुद्दा इसे HCFCs को कम करना कुछ निर्माताओं के लिए चुनौती बन सकता है।

विश्व बैंक के द्वारा कार्यक्रमों और प्रस्तावों की एक श्रृखंला के अंतर्गत तकनीकी सहायता के  माध्यम से तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना है  साथ ही इन उपायों को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने की जरुरत पर भी बल देने पर बल दिया गया है । विश्व बैंक की एक तीन साल की शहरी ऊर्जा कुशल परिवर्तन पहल, शहर प्रमुखों से शहर में ऊर्जा दक्षता के नियोजन को सुद्रण करने में मदद करती है यह योजना इमारतों तथा लक्षित शहरी क्षेत्रों को डिजाइन करने में सहायता उपलब्ध करती है।

इस प्रोटोकॉल के समर्थकों को इस बात का भरोसा है कि अगर  इस अन्तर्राष्टीय समझौते का पालन किया जाता है तो 2050 तक ओजोन परत फिर से हासिल हो सकती है। इसके व्यापक तरीके से अपनाने और लागू करने के कारण इसे असाधारण अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की एक मिशाल के रूप में मान्यता मिल चुकी है । संयुक्त राष्ट्र के पूर्व प्रमुख कोफी अन्नान ने कहा "शायद यह आज की तारीख में इकलौता सबसे सफल अन्तर्राष्ट्रीय समझौते का मॉन्ट्रिलय प्रोटोकॉल है"। इस संधि को 197 देशों द्वारा समर्थन दिया गया है । यूरोपीय संघ ने इस  प्रोटोकॉल को संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे व्यापक और महत्वपूर्ण संधि का दर्जा दिया है

वियना संधि (कन्वेंशन)

यह ओजोन परत के संरक्षण के लिए एक बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता है। इस पर 1985 के वियना सम्मेलन में सहमति बनी और 1988 में यह लागू किया गया। 196 देशों (सभी संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के साथ- साथ ही होली सी, नियू और कुक आइलैंड्स) के साथ-साथ यूरोपीय संघों द्वारा इसे मंजूर किया जा चुका है।

वियना संधि, ओजोन परत की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के लिए एक ढांचे के रूप में कार्य करता है। हालांकि, इसमें सीएफसी के इस्तेमाल के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी न्यूनता के लक्ष्य शामिल नहीं हैं, ओजोन रिक्तीकरण का मुख्य कारण रासायनिक कारक हैं। उपरोक्त बातें मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में रखी गयीं हैं।