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मौलिक अधिकारों एवं नीति निर्देशक सिद्धांतों का तुलनात्मक अध्ययन

मौलिक अधिकार हमें राजनीतिक अधिकार प्रदान करते हैं जो कि व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक होते हैं जबकि राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के माध्यम से हमें सामाजिक और आर्थिक अधिकार प्राप्त होते हैं| इन तत्वों का कार्य एक जन-कल्याणकारी राज्य (welfare state) की स्थापना करना है |
Sep 30, 2016 14:44 IST
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मौलिक अधिकार हमें राजनीतिक अधिकार प्रदान करते हैं जो कि व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक होते हैं जबकि राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के माध्यम से हमें सामाजिक और आर्थिक अधिकार प्राप्त होते हैं| इन तत्वों का कार्य एक जन-कल्याणकारी राज्य (welfare state) की स्थापना करना है। मौलिक अधिकारों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 से 35 में एवं नीति निर्देशक सिद्धांतों को अनुच्छेद 36 से 51 में उल्लेख किया गया है|

भारतीय राजनीति और शासन: समग्र अध्ययन सामग्री

मौलिक अधिकारों और निर्देशक सिद्धांतों के बीच तुलनात्मक अंतर:

  क्र.सं.

 मौलिक अधिकार

 निर्देशक सिद्धांत

  1.

 ये नकारात्मक अधिकार हैं, क्योंकि इनमें से कुछ बातें राज्यों के लिए  निषेध है|

ये सकारात्मक अधिकार हैं, क्योंकि इनमें से कुछ बातें राज्यों के लिए बाध्यकारी है|

  2.

ये अधिकार न्यायोचित हैं अर्थात कानूनी तौर पर इन अधिकारों का उल्लंघन होने पर अदालतों के द्वारा इन्हें पुनः लागू किया जा सकता है|

ये अधिकार गैर-न्यायोचित हैं अर्थात कानूनी तौर पर इन अधिकारों का उल्लंघन होने पर अदालतों के द्वारा इन्हें पुनः लागू नहीं किया जा सकता है|

  3.

इन अधिकारों का लक्ष्य देश में राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करना है|

इन अधिकारों का लक्ष्य देश में सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है|

  4.

इन अधिकारों के साथ कानूनी प्रतिबंध जुड़े हुए हैं|

इन अधिकारों के साथ कानूनी और राजनीतिक प्रतिबंध जुड़े हुए हैं|

  5.

ये अधिकार व्यक्तियों के लोक-कल्याण को बढ़ावा देते हैं, इसलिए इन्हें व्यक्तिगत और व्यक्तिवादी अधिकार कहा जाता है|

ये अधिकार समाज-कल्याण को बढ़ावा देते हैं, इसलिए इन्हें समाजवादी अधिकार कहा जाता है|

  6.

इन अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए किसी भी कानून की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ये अधिकार स्वतः लागू होते हैं|

इन अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए कानून की आवश्यकता होती है, क्योंकि ये अधिकार स्वतः लागू नहीं होते हैं|

  7.

मौलिक अधिकारों को अदालतों के द्वारा असंवैधानिक या अवैध घोषित कर प्रतिबंधित किया जा सकता है|

निर्देशक सिद्धांतों को अदालतों के द्वारा असंवैधानिक या अवैध घोषित कर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है| हालांकि, अदालतें किसी कानून की वैधता को इस आधार पर बरकरार रख सकते हैं कि उसे किसी निर्देश के प्रभाव को बढ़ाने के लिए अधिनियमित किया गया था।

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