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राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्रः महामारी विज्ञान एवं संक्रामक रोगों का नियंत्रण

राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान (National Institute of Communicable Diseases (NICD)) नई दिल्ली में है। अब इसका नाम बदल कर राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र कर दिया गया है। इसकी स्थापना भारत सरकार ने भारतीय मलेरिया संस्थान (एमआईआई) की गतिविधियों के विस्तार एवं पुनर्व्यवस्थित करने के लिए 30 जुलाई 1963 को की थी। यह संस्थान भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन है।
Jun 27, 2016 14:37 IST
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राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान (National Institute of Communicable Diseases (NICD)) नई दिल्ली में है। अब इसका नाम बदल कर राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र कर दिया गया है। इसकी स्थापना भारत सरकार ने भारतीय मलेरिया संस्थान (एमआईआई) की गतिविधियों के विस्तार एवं पुनर्व्यवस्थित करने के लिए 30 जुलाई 1963 को की थी। पुनर्व्यवस्थित संस्थान की स्थापना महामारी विज्ञान के विभिन्न विषयों एवं संचारी रोगों पर नियंत्रण में शिक्षण और अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय केंद्र विकसित करने के लिए की गई थी।

यह संस्थान भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन है। केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा के जन स्वास्थ्य उप– कैडर का अधिकारी इसका निदेशक होता है और वही संस्थान का प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रमुख भी होता है।

संस्थान का मुख्यालय दिल्ली में है और देश में इसकी आठ शाखाएं निम्नलिखित स्थानों पर हैं– अलवर (राजस्थान), बेंगलुरु (कर्नाटक), कोझीकोड (केरल), कुन्नूर (तमिलनाडु), जदगलपुर (छत्तीसगढ़), पटना (बिहार), राजमुंदरी (आंध्र प्रदेश) और वाराणसी (उत्तर प्रदेश)।

संस्थान के मुख्यालय में कई तकनीकी विभाग हैं जैसे– महामारी विज्ञान और परजीवी रोग केंद्र (महामारी विज्ञान विभाग, परजीवी रोग विभाग), सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग, पशुजन्य रोग विभाग, एचआईवी/ एड्स  और संबंधित रोग केंद्र, चिकित्सा कीटविज्ञान केंद्र और वेक्टर प्रबंधन, मलेरिया विभाग और समन्वय, जैव रसायन और जैव प्रौद्योगिकी विभाग।

संक्षिप्त मिशन कथनः

राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (एनआईसीडी) दक्षिण अफ्रीकी सरकार, एसएडीसी देशों और अफ्रीकी महाद्वीप के लिए नीतियों एवं कार्यक्रमों की योजना बनाने में सहायता करने और संचारी रोग समस्याओं एवं मुद्दों के प्रति उचित प्रतिक्रिया के समर्थन के लिए क्षेत्रीय प्रासंगिक संचारी रोगों हेतु ज्ञान का संसाधन और विशेषज्ञ होगा।

एनआईसीडी की व्यापक नीतियां:

एनआईसीडी की स्थापना जन स्वास्थ्योन्मुख, प्रयोगशासा– आधारित, राष्ट्रीय सुविधा के तौर पर काम करने के लिए की गई है जो देश में अकादमिक केंद्रों में मौजूद सूक्ष्म जीवविज्ञान/ विषाणु विज्ञान प्रयोगशाला से स्वतंत्र हो कर काम करेगी। एनआईसीडी ने मरीजोन्मुख नैदानिक इकाई के बजाए जन स्वास्थयोन्मुख दृष्टिकोण अपनाया है और यह संस्थान की सेवा प्रतिबद्धताओं, अनुसंधान नीतियों और शिक्षण में भी दिखाई देगा।

एनआईसीडी के उद्देश्यः

  • संचारी रोगों की जन स्वास्थ्य निगरानी के लिए दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रीय अंग बनना।
  • चालू एवं व्यवस्थित तरीके से संचारी रोगों के आंकड़ों को एकत्र करना, उनका विश्लेषण करना और उनकी व्याख्या करना।
  • नई संक्रामक रोगों की आपातस्थिति के लिए और पूर्व में नियंत्रित किए जा चुके संक्रामक रोगों के फिर से उभरने या वापस लौटने या विदेशी संक्रामक रोगों के आयात पर लगातार एवं व्यवस्थित निगरानी करना।
  • संक्रामक रोगों पर समय से एवं कुशलतापूर्वक प्रतिक्रिया देने में सक्षम होने के क्रम में संक्रामक रोगों की उसके आरंभिक चरण में ही पहचान करना या अन्वेषण, अनुसंधान और आंकड़ों का विश्लेषण कर महामारी की आशा व्यक्त करना।
  • क्षेत्रीय जन स्वास्थ्य संचारी रोगों की समस्याओं से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रत्यक्ष और प्रासंगिक अनुसंधान करना और उनकी निगरानी एवं प्रबंधन करना।
  • एनआईसीडी द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों एवं जानकारी की जररूत जिन लोगों को है उन्हें त्वरित एवं लगातार मुहैया कराने के लिए औपचारिक संरचना की स्थापना करना।
  • राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर संचारी रोगों में क्षमता निर्माण करना।
  • राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सरकारी एवं निजी क्षेत्र में संचारी रोग प्रयोगशाला के लिए संदर्भ कार्य प्रदान करना।

एनआईसीडी के केंद्रः

राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (एनआईसीडी) कार्यात्मक केंद्रों के रूप में संगठित किए गए है। ये संचारी रोग के खतरों के प्रति एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को सक्षम करने के लिए सूक्ष्मजीवविज्ञान और महामारी विज्ञान दोनों ही के क्षेत्र में विशेषज्ञता लाते हैं।

  1. सेंटर फॉर वैक्सीन एंड इम्यूनोलॉजी
  2. सेंटर फॉर ट्यूबरकुलोसिस
  3. सेंटर फॉर एचआईवी एंड एसटीआई
  4. सेंटर फॉर इमर्जिंग एंड जूनोटिक डिजिजेज
  5. सेंटर फॉर एन्टेरिक डिजिजेज
  6. सेंटर फॉर ऑपरचुनिस्टिक, ट्रॉपिकल एंड हॉस्पिटल इंफेक्शंस
  7.  सेंटर फॉर रेस्पाइरेटरी डिजिजेज एंड मेनिनजाइटिस
  8. डिविजन ऑफ पब्लिक हेल्थ, सर्विलांस एंड रिस्पॉन्स
  9. साउथ अफ्रीकन रीजनल ग्लोबल डीजिज डिटेक्शन प्रोग्राम

एनआईसीडी में अनुसंधानः

एनआईसीडी की गतिविधियों में अनुसंधान एक महत्वपूर्ण तत्व है और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष श्रेणी के वैज्ञानिक संस्था के तौर पर एनआईसीडी के विकास का आधार है। साथ ही यह वैज्ञानिक कर्मियों को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने की भी कुंजी है।

एनआईसीडी द्वारा किए जाने वाले अनुसंधान का उद्देश्य सूक्ष्म– जीवों की पहचान से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देने और पहुंचाने की योग्यता के कारकों की पहचान एवं विषाक्तता, पारिस्थितिकी, महामारी व्यवहार, वितरण एवं वितरण को प्रभावित करने वाले कारक, हस्तक्षेप एवं प्रभावकारिता की निगरानी के साथ– साथ हस्तक्षेपों की जैविक प्रतिरोध का पता लगाना है।

अनुसंधान के नतीजे इलाके में संक्रामक रोगों की समस्याओं को समझने में स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक जानकारी प्रदान करने में मदद करने के साथ– साथ संक्रामक रोगों पर योजना करने एवं उनके प्रबंधन में भी मदद करते हैं।