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वचनपत्र (Promissory Notes)

परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 4, के तहत एक वचनपत्र निर्माता द्वारा हस्ताक्षर किया गया एक बिना शर्त का उपक्रम है.
Dec 2, 2014 15:23 IST
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परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 4, के तहत एक वचनपत्र निर्माता द्वारा हस्ताक्षर किया गया एक बिना शर्त का उपक्रम है, जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति को या किसी व्यक्ति के आदेश पर या उसके वाहक को देने में किया जाता है.

आवश्यक तत्व

एक वचनपत्र के अंतर्गत निम्नलिखित तत्व होने चाहियें:

  1. यह लिखित रूप में होनी चाहिए: सिर्फ भुगतान करने के लिए किया गया एक मौखिक वादा ही एक वचनपत्र नहीं होता है. लिखने का तंत्र या प्रणाली (या तो पेंसिल या मुद्रण या स्याही आदि में) नगण्य होता है, लेकिन इसे इस रूप में होना चाहिए की यह आसानी से विकृत नहीं किया जा सकता है.
  2. यह निश्चित रूप से एक स्पष्ट समझ या भुगतान करने के लिए एक एक्सप्रेस वादा के रूप में होना चाहिए: भुगतान करने के लिए एक एक्सप्रेस उपक्रम होना चाहिए. बस एक रसीद ही इस सन्दर्भ में पर्याप्त नहीं है.
  3. भुगतान करने के लिए वादा निरपेक्ष होना चाहिए: एक सशर्त उपक्रम किसी एक परक्राम्य सूत्र के परक्राम्य चरित्र को मिटा देता है. नतीजतन, भुगतान करने के लिए वायदा किसी बाहर की घटना या आपात की घटना पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. यह पूरी तरह से देय होना चाहिए
  1. यह निर्माता के द्वारा हस्ताक्षर होना चाहिए:यह उस व्यक्ति के द्वारा जोकि भुगतान देने के लिए प्रतिवद्ध हैं, के द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए. यहाँ तक की इसे वाय्दाकर्ता के द्वारा स्वतः लिखा जाना चाहिए. साधन पर हस्ताक्षर के स्थान के सन्दर्भ में या हस्ताक्षर के फार्म के सन्दर्भ में कोई भी सीमा नहीं होना चाहिए. यह साधन के किसी भी हिस्से में हो सकता है. इस सन्दर्भ में विधिक जरुरत यह है कि इसे व्यक्ति की पहचान के साथ साम्यता स्थापित होना चाहिए. साथ ही उसे समझौते के साथ बंधा हुआ होना चाहिए.
  2.  निर्माता निश्चित होना चाहिए: नोट पर व्यक्ति की पहचान स्पष्ट होना चाहिए. साथ ही भुगतान करने के सन्दर्भ में भी जबाबदेही होनी चाहिए. यदि कोई व्यक्ति इस सन्दर्भ में अपने छद्म नाम का इस्तेमाल करता है तो उसे निर्माता के तौर पर जबाबदेह होना चाहिए.
  3. आदाता की पहचान निश्चित होनी चाहिए: साधन पर साफ़ तौर पर यह इंगित रहना चाहिए कि जिसके सन्दर्भ में बात की जा रही है वह विश्वसनीय है. प्राप्तकर्ता नाम से या पदनाम द्वारा निर्धारित किया जा सकता है.
  4. पैसे का भुगतान या सिर्फ पैसे का भुगतान करने के सन्दर्भ में वायदा का सुनिश्चित होना चाहिए. पैसे का अर्थ है सिर्फ कानूनी निविदा न कि दुर्लभ और पुराने सिक्कों का जखीरा. इस सन्दर्भ में यह एक वचनपत्र का प्रतिनिधित्व नहीं करता है.
  5. राशि निश्चित होना चाहिए: एक वचनपत्र के सन्दर्भ में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें निश्चितता होनी चाहिए. इस सन्दर्भ में सिर्फ व्यक्ति की ही महता नहीं होती बल्कि राशि की भी महत्ता होती है.
  6. अन्य औपचारिकतायें: आमतौर पर अन्य औपचारिकताओं के सन्दर्भ में तिथि.संख्या, अंक आदि पर भी विचार किया जाता है. इनका उल्लेख यद्यपि प्रोमिसरी नोट में दिया गया रहता है लेकिन कानूनी रूप से यह आवाश्यक नहीं है. इस सन्दर्भ में साधन पर दी गयी तिथि मायने नहीं रखती है बल्कि उस पर दी गयी राशि का समय से या समय के बाद भुगतान पर निर्भर करता है.