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विश्व बधिर दिवस

सितंबर 1951 में रोम, इटली में विश्व बधिर संघ की स्थापना हुई|
Sep 18, 2014 16:14 IST
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विश्व बधिर दिवस प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि लोगों में यह जागरूकता पैदा करने का प्रयास करता है कि किस प्रकार बधिर समाज में अपना योगदान देकर देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि में सहायक होता है| सितंबर 1951 में रोम, इटली में विश्व बधिर संघ की स्थापना हुई|  यह एक अंतरराष्ट्रीय संघ है जिसने इस अंतरराष्ट्रीय दिवस की शुरुआत 1958 से की| यह संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पहचाना जाता है तथा उसकी इकाइयों के साथ कार्य करके यू एन चार्टर के अनूरूप बधिर व्यक्तियों के मानव अधिकारों को सुनिश्चित करने का प्रयास करता है|

इतिहास:

ग्रेनविल रिचर्ड सेमूर रेडमंड का जन्म फिलाडेल्फ़िया, पेन्सिलवेनिया के एक जाने माने परिवार में हुआ था| ढाई वर्ष की आयु में ज्वर पीड़ित हुए जिसके इलाज के बाद उन्होने अपनी सुनने की क्षमता खो दी| बाद उनका परिवार सैन जोस के पूर्वी तट की ओर बस गया जहाँ उन्होने अपने विद्यालय की शिक्षा बधिरों के विद्यालय बार्क्ली स्कूल से पूरी की|

वहाँ उन्होने कला, चित्रकारी तथा पॅंटमाइम (एक प्रकार का संगीत हास्य कला) सीखी| उनकी चित्रकारी मशहूर थी तथा उन्होने कैलिफ़ोर्निया स्कूल ऑफ डिजाइन से एक चित्रकार के रूप में स्नातक किया| 1905 तक यह एक लैंडस्केप चित्रकार के रूप में जाने लगे थे|

एक बधिर व्यक्ति एक साधारण व्यक्ति से कई मायनों में ज़्यादा प्रतिभावान होता है तथा यह विश्व बधिर दिवस इसी बात को बाल देने के लिए मनाया जाता है|

बधिर दिवस का उद्देश्य:

बधिर दिवस का उद्देश्य जो की अब एक साप्ताह के रूप में मनाया जाने लगा है, यह है कि बधिरों में स्वस्थ जीवन, स्वाभिमान, गरिमा इत्यादि भावनाओं को बाल मिल सके|
इसका एक उद्देश्य साधारण जनता तथा सबन्धित सत्ता का बधिरों की क्षमता, उपलब्धि इत्यादि की तरफ ध्यान आकर्षित करना भी है| इसमें बधिरों के द्वारा किए गये कार्यों की सराहना की जाती है तथा उसे प्रदर्शित किया जाता है|

कई संगठन जैसे स्कूल, कॉलेज, अन्न्या संस्थाएँ इसके लिए लोगों में बधिरपन हेतु जागरूकता बढ़ाने का कारया करती हैं| कई आयोजन किए जाते हैं जो की बधिर की समस्याओं इत्यादि से संबंध रखती है|

संचार की समस्या:

हालाँकि चिन्ह भाषा हज़ारों वर्षों से अस्तित्व में है फिर भी आज भी साधारण लोगो से इस भाषा में संचार स्थापित करना एक चुनौती ही है| इस भाषा का अध्यन एवं अध्यापन दोनो ही आती आवश्यक है जिससे की बधिरों की संस्कृति, समस्याएँ इत्यादि में संचार स्थापित किया जा सके|

अंतरराष्ट्रीय बधिर साप्ताह:

- सर्वप्रथम हुमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि यह दिवस बधिरों को सांत्वना देने के लिए नहीं बल्कि उनके जीवन में एक परिवर्तन लाने के लिए मनाया जाता है|
- बधिर होना किसी प्रकार की अपागता या कमज़ोरी नही है| सुनने की क्षमता में कमी वाले लोग सही क्षमता वालों से ज़्यादा बुद्धिमान होते है बस अंतर इतना होता है कि इनकी संचार का मIध्यम अलग होता है|
-  इनके लिए हम किसी भी प्रकार के नये आयोजन अपने क्षेत्रों में भी कर सकते है| किसी भी प्रकार के सूचनाएँ जो इनसे संबंधित हो उसे सोशल मीडिया के द्वारा बता सकते हैं कई लुभावने पोस्टर्स बना सकते है या कई अन्य कार्य भी किए जा सकते हैं|
- बधिरों के ज्ञान को बढ़ावा देते हुए कई वर्कशॉप या सभा का आयोजन कर सकते हैं जिसमें कि इनके द्वरा प्रयोग की जाने वाली भाषा को साधारण जनता को भी बताया जा सके|
- बधिरों को तकनीकी से अवगत करा सकते हैं जिससे की उनका जीवन पहले से ज़्यादा सुगम व सरल हो सके|