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विश्व बन्धुत्व और क्षमायाचना दिवस

यह दिवस लोगों के मध्य विद्यमान कटुता को दूर करता है.
Sep 20, 2014 17:37 IST
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क्या आपने कभी झिझक के साथ माफी मांगते हुए सुना है? अब समय आ गया है की आप इसके बारे में जाने और लोगो को भी जागरूक करें कि साल का एक ऐसा दिन 14 सितम्बर विश्व बन्धुत्व और क्षमायाचना दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है.

विश्व बन्धुत्व क्या है?.

भाईचारा आज वर्तमान समय में एक आदर्श बन गया है. भाईचारा एक परिवार की तरह होता है. हम स्कूल वन्धुत्व चिकित्सा वन्धुत्व, इंजीनियरिंग वन्धुत्व, आदि के बारे में जानते हैं. इसके अलावा भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पर वन्धुत्व को बढ़ावा दिया जाता है. भाईचारा लोगों के एक समूह के माध्यम से सम्पादित किया जाता है. भाईचारा को हम पार्टियों, शिक्षण, गतिविधियों एवं अन्य कई गतिविधियों में देख सकते हैं. भाईचारा के संपादन के समय अक्सर यह देखा जाता है कि कडवाहट की गतिविधि भी सम्पादित हो जाती है. विश्व वन्धुत्व और क्षमायाचना दिवस के बहुत किसी भी गलत कार्यों को सुधारने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. यह दिवस लोगो के मध्य विद्यमान कटुता को दूर करता है. साथ ही लोगो को संयुक्त रूप में रहने के लिए प्रोत्साहित भी करता है. इसके अलावा यह समाज में व्याप्त विषमता और कटुता को समाप्त करने में सहायक है और समाज में परिवर्तन लाने में मददगार है.

ईश्वर मानव की गलतियों को माफ करता है.

हम सभी नें ध्यान की शक्ति, सकारात्मक सोच की शक्ति और कई अन्य शक्तियों की शक्ति के बारे में सुना है. हालांकि, खेद कहने की शक्ति स्वयं में काफी शक्तिशाली है. महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी पश्चाताप और कार्यवाही दिल से की जानी चाहिए और वर्तमान में इसके अत्यंत जरुरत भी है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि जोभी व्यक्ति यह कार्य करता है उसके दिल में अथाह दया का सागर भरा होता है. निःसंदेह माफ़ी मांगने की शाक्ति एक ऐसी शक्ति होती है जोकि पल भर में बहुत बड़ी दूरियों को भी समाप्त कर देती है. साथ ही समाज के मध्य विद्यमान दूरियों को मिटाती है.
वर्तमान में विविध संगठन, व्यक्तियों का समूह और समाज के अनेक वर्गों के द्वारा इस दिवस का आयोजन किया जा रहा है. लेकीन सबसे बड़ी बात तो यह है कि इसके संपादन के पीछे मूल उद्देश्य समाज के विकास का होना चाहिए. तभी हम एक संगठित समाज का निर्माण कर सकते हैं.

हमें आज इन नैतिक तत्वों के प्रति अपने आप को याद दिलाना है और दुनिया के हर कोने में हमें अपने तरीके से इस जश्न को मनाने की जरूरत है. माफ़ी मांगने में बड़ी शक्ति होती है, अर्थात इस शब्द को कह देने भर से शान्ति का अपने-आप स्थापन हो जाता है. इस शब्द के कहने भर से दूरियां मिट जाती हैं और लोगो के मध्य मतभेद मिट जाता है. जैसे ही आप किसी से माफ़ी मांगते हैं उसी वक्त आपके सकारात्मक व्यक्तित्व और स्वस्थ्य दिमाग के बारे में जानकारी हो जाती है.

इस दिन को लोगो के मध्य से दूरियों को मिटाने में इस्तेमाल किया जाना चाहिए. अतः समय आ गया है कि संघर्ष को समाप्त किया जाये और आगे बढ़ा जाये.

 

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