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वेल्हा (गोवा) में चर्च और आश्रमः तथ्यों पर एक नजर

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा राज्य के वेल्हा में चर्च और आश्रम पुर्तगाली शासन के युग से ही हैं। 16वीं और 17वीं शताब्दी के बीच पुराने गोवा में व्यापक स्तर पर चर्चों और गिरजाघरों का निर्माण किया गया था, इनमें शामिल हैं– बेसिलिका ऑफ बोम जीसस, सेंट कैथेड्रल, सेंट फ्रांसिस असीसी के चर्च और आश्रम, चर्च ऑफ लेडी ऑफ रोजरी, चर्च ऑफ सेंट. ऑगस्टीन और सेंट कैथरीन चैपल।
Aug 8, 2016 11:43 IST
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भारत के पश्चिमी तट पर स्थित इस राज्य के वेल्हा (पुराने) गोवा के चर्च और आश्रम, पुर्तगाली शासन के युग से ही हैं। 16वीं और 17वीं शताब्दी के बीच पुराने गोवा में व्यापक स्तर पर चर्चों और गिरजाघरों का निर्माण किया गया था, इनमें शामिल हैं– बेसिलिका ऑफ बोम जीसस, सेंट कैथेड्रल, सेंट फ्रांसिस असीसी के चर्च और आश्रम, चर्च ऑफ लेडी ऑफ रोजरी, चर्च ऑफ सेंट. ऑगस्टीन और सेंट कैथरीन चैपल। इन चर्चों और आश्रमों को 1986 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

वेल्हा (पुराने) में चर्चों और आश्रमों के बारे में तथ्यों पर एक नजरः

गोवा की खूबसूरती चर्चों में प्रदर्शित कई प्राचीन उत्कृष्ट कलाकृतियों की उपस्थिति में दुगनी हो जाती है। गोवा के आश्रमों और चर्चों पर पुर्तगाल की संस्कृति का बहुत प्रभाव है। उनकी वास्तुकला कल्पना और पुनर्जागरण शैली का संयोजन हैं। इन चर्चों को बनाने में मुख्य रूप से चूना प्लास्टर और लैटेराइट का प्रयोग किया गया है।

इन चर्चों में रखे गए अधिकांश चित्र लकड़ी के बॉर्डर से घिरे हैं। ये संत जेवियर के मकबरे को सजाने के लिए इस्तेमाल किए गए फूलों के डिजाइन जैसे ही हैं। पत्थर की कुछ मूर्तियों के अलावा बाकी सभी मूर्तियां लकड़ी की बनी हैं और उन पर उत्कृष्ट नक्काशी की हुई है। यहां वेदी को सजाने में इस्तेमाल किए जाने वाले प्रभु यीशु, मां मैरी और संतों की कुछ उत्कृष्ट पेंटिंग्स भी हैं।

बेसिलिका ऑफ बोम जीसस (The Basilica of Bom Jesus):

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Image Source:iamgoan.wordpress.com

बोम जीसस का शाब्दिक अर्थ है "शिशु यीशु" या "अच्छा यीशु"। द बोम जेसु बेसिलिका या बोम जीसस बेसिलिका पुराने गोवा में स्थित है। पुराना गोवा पुर्तगाल के शासन के आरंभिक दिनों में उसकी राजधानी हुआ करता था। यहां गोवा की राजधानी पंजिम से दस किलोमीटर की दूरी पर एक चर्च है।

सेंट फ्रांसिस के आश्रम के पास स्थित यह स्थान सेंट फ्रांसिस जेवियर के पार्थिव शरीर  और कब्र के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि सेंट फ्रांसिस जेवियर पुर्तगाली काफिले के साथ भारत आए थे और उन्होंने भारत में ईसाई धर्म का प्रचार– प्रसार किया था। वे सोसायटी ऑफ जीसस से जुड़े थे।

से कैथेड्रल (Se Cathedral)-

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Image Source:www.zoomcar.com

से कैथेड्रल गोवा का सबसे लोकप्रिय और प्राचीन धार्मिक स्थान है। से कैथेड्रल पूरे एशियाई क्षेत्र का सबसे बड़ा चर्च है। उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि यह चर्च 80 वर्षों में बन कर तैयार हुआ था। यह चर्च सिकंदरिया की कैथरीन को समर्पित है। यह पुराने गोवा में स्थित है। पूरे विश्व के ईसाई समुदाय द्वारा उच्च सम्मान और पवित्रता के इस स्थल का दौरा कर आप पुर्तगाली कला, मूर्तिकला और उनकी राजसी गौरव का आसानी से अनुभव कर सकते हैं। यूनेस्को ने ‘से कैथेड्रल’ को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है।

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चर्च ऑफ सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी (Church of St. Francis of Assisi):

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Image Source:indianreligioustemple.blogspot.com

से कैथेड्रल के पश्चिम दिशा में सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी चर्च स्थित है। इसे शुरुआत में प्रार्थनाघर के तौर पर बनाया गया था। वर्ष 1521 में इसका पुनर्निर्माण किया गया और पूर्ण रूप से काम करने वाले चर्च का रूप दिया गया। 2 अगस्त 1602 को इस चर्च को प्रभु यीशू को समर्पित किया गया। फ्रांसीसी भिक्षुक आश्रमों का प्रयोग अपने निवास स्थान के तौर पर करते थे और वर्ष 1559 में इन आश्रमों का जीर्णोद्धार किया गया था। हालांकि, 1835 में पुर्तगाल प्रशासन ने इन आश्रमों को बंद कर दिया था। वर्ष 1964 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस चर्च को संग्रहालय बना दिया था। इस चर्च में मूर्तियों, पेंटिंग और कलाकृतियों का विशाल खजाना है।

चर्च में मोजेक– कोरिंथियन शैली और टस्कन संस्कृति का मिला जुला स्वरुप देखने को मिलता है। पहली शैली का प्रयोग चर्च की आंतरिक सज्जा में जबकि बाद की शैली का प्रयोग चर्च के बाहरी हिस्सों की सज्जा में किया गया है। चर्च के भीतरी दीवारों को बाइबल की महत्वपूर्ण विचारों और जटिल फूलदार डिजाइनों से सजाया गया है। चर्च के सामने वाले हिस्से में संत माइकल की मूर्ति है। इसके अलावा एक चैपल में कुर्सी पर सेंट फ्रांसिस असीसी के लकड़ी की मूर्ती भी सजा कर रखी गई है।

अजंता की गुफाएँ-

चर्च ऑफ लेडी ऑफ रोजरी (Church of Lady of Rosary)-

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Image Source:http://www.bookingadvisor.com

द लेडी ऑफ रोजरी चर्च मोंटे सैंटो या पवित्र पहाड़ी के पश्चिम की तरफ स्थित है। कई ऐतिहासिक तथ्य यह बताते हैं कि यह वही स्थान हैं जहां अलफांसो डी अलबुकरी ने अपनी सेना तैयार की थी और 1510 में विजेता बन कर उभरा था। इस स्थान पर 1950 की अवधि के कुछ शिलालेख भी मिले हैं। वर्ष 1543 में इस इलाके को फिर से बनाया गया और चर्च का रूप दिया गया। बाद में इसे देखभाल के लिए फ्रांसिसियों के हवाले कर दिया गया था। यह चर्च लोगों के उच्च सम्मान और भावना का प्रतीक है क्योंकि यह सेंट फ्रांसिस जेवियर द्वारा दी जाने वाली शिक्षा का केंद्र था। उन्होंने एक छोटी सी घंटी की आवाज सुनकर वहां इकठ्ठा होने वाले स्थानीय लोगों को पढाना शुरु किया था।

इस चर्च के भीतर और बाहर का डिजाइन बहुत सहज है। ‘ग्रेसिया डी सा गोवा के पहले राज्यपाल में से एक थे। उन्होंने समाधि के सामने एक पत्थर रखा था। यह पत्थर "Manueline" वास्तुकला शैली और फिर पुर्तगाली शैली का शास्त्रीय उदाहरण है। भीतर का डिजाइन बहुत सामान्य है और इसमें पांच वेदियां हैं। लेडी ऑफ रोजरी या नोस्सा सेनहोरा डी रोजारीयो की तस्वीर मुख्य वेदी पर रखी गई है। 

लाला पांडा (Red panda– Ailurus fulgens)

चर्च ऑफ सेंट. ऑगस्टिन (Church of St. Augustine):-

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Image Source:https://commons.wikimedia.org/

सेंट. ऑगस्टिन चर्च का निर्माण बारह (12) ऑगस्टिन संन्यासियों ने 3 सितंबर 1572 को गोवा पहुंचने के बाद 1572 में किया था। यह चर्च 1962 में पूरा हुआ। वर्तमान में आश्रम और चर्च दोनों ही क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं। वर्ष 1835 तक यह चर्च बहुत मजबूत था। फिर पुर्तगाल के प्रशासन द्वारा धार्मिक आदेश पारित किए जाने के बाद यह उपेक्षित हो गया। वर्ष 1842 में इसके मेहराब के गिरने से यह बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इस प्राचीन स्मारक का एक मात्र बचा हुआ हिस्सा घंटाघर है जो बिना किसी घंटे के आज भी खड़ा है। घंटाघर के घंटे को हटा दिया गया था और वर्ष 1841 से 1871के बीच इसे अगुआदा लाइट हाउस किले पर लगाया गया था। इसके बाद उसे पंजिम स्थित चर्च ऑफ लेडी ऑफ इम्युकुलेट कॉन्सेप्शन को दे दिया गया। यह अभी भी वहां सही तरीके से काम कर रहा है।

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