वैदिककालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं महिलाओं की स्थिति का संक्षिप्त विवरण

आर्यों एवं वैदिक काल के बारे में जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद और वेदांग हैं| यहाँ, हम “वैदिककालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं महिलाओं की स्थिति का संक्षिप्त विवरण” प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|
Dec 6, 2016 12:49 IST

    आर्यों एवं वैदिक काल के बारे में जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद और वेदांग हैं| "आर्यन" शब्द का अर्थ ऐसे भाषाई समूह से है जिनका आगमन दक्षिणी यूरोप से मध्य यूरोप तक फैले सपाट मैदान (Steppe) क्षेत्र में हुआ था

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    आर्य सबसे पहले ईरान आए और 1500 ई.पू. के कुछ समय बाद उन्होंने भारत में प्रवेश किया| ऋग्वेद में वर्णित कई बातें “जेन्दावेस्ता” (ईरानी भाषा की सबसे प्राचीन पुस्तक) से मिलती-जूलती है। यहाँ, हम “वैदिककालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं महिलाओं की स्थिति का संक्षिप्त विवरण” प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

    ऋग्वैदिककालीन राजनीतिक स्थिति

    1. कबीलेया जनके संरक्षक को मुखिया कहा जाता था|

    2. सभा, समिति, विदथ और गण कबीलों की विधानसभाएं थी जिनमें सैन्य और धार्मिक कार्यों के निर्वहन के विचार-विमर्श किया जाता था|

    3. उस समय कुछ गैर-राजतंत्रीय राज्य (गण) भी थे जिसके प्रमुख को गणपतिया ज्येष्ठकहा जाता था|

    ऋग्वैदिककालीन सामाजिक स्थिति

    1. “जन” का स्वामित्व उन लोगों के पास होता था जो अपने जनजाति के प्रति वफादारी दर्शाते थे|

    2. परिवार “पितृसत्तात्मक” था और लोग पुत्र-प्राप्ति की इच्छा रखते थे|

    3. उस समय परिवार का आकर बड़ा होता था| उस समय बेटे, पोते और भतीजे के लिए एक शब्द और दादा एवं नाना के लिए भी एक ही शब्द का प्रयोग करने के संकेत मिलते हैं|

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    ऋग्वैदिककालीन समाज का विभाजन

    1. भारतीय क्षेत्र में पहली बार “वर्ण” शब्द का इस्तेमाल आर्यों के आगमन के बाद किया गया था| ऋग्वेद के अनुसार “वर्ण” शब्द का प्रयोग केवल “आर्यों” या “दासों” के “गौर” या “कृष्ण” वर्ण के लिए किया जाता था ना कि “ब्राह्मणों” या “क्षत्रियों” के लिए|

    2. सर्वप्रथम “शूद्र” शब्द का उल्लेख ऋग्वेद के दशवें मण्डल में किया गया था|

    3. समाज का चार वर्णों में विभाजन “पुरूषसूक्त” के संकलन के बाद किया गया था|

    ऋग्वैदिककालीन देवता

    1. प्रारम्भिक वैदिक धर्म प्रकृति और प्राकृतिक घटनाओं पर आधारित था|

    2. प्रजा, पशु और धन के लिए बलि दी जाती थी, लेकिन यह धार्मिक उत्थान से संबंधित नहीं था|

    ऋग्वैदिककाल में महिलाओं की स्थिति

    1. महिलाएं सभा और विदथ में पुरुषों के साथ शामिल होने के लिए स्वतंत्र थी|

    2. महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त था| उस समय के समाज में बाल विवाह और सती प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के भी स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं| लड़कियों के लिए शादी की उम्र 16-17 साल थी।

    3. उस समय विधवा पुनर्विवाह और नियोगी (लेविरैट) प्रथा का भी चलन था| नियोगी (लेविरैट) प्रथा में निःसंतान विधवा एक बेटे के जन्म तक अपने देवर के साथ रहती थी|

    4. उस समय बहुविवाह और एकल विवाह दोनों का चलन था|

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