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शाहजहां की दक्कन नीति

अकबर ने अपने शासन काल के सीमित समय के अन्दर दक्कन के केवल एक छोटे से हिस्से पर ही विजय प्राप्त किया था जिसमें खानदेश और बरार शामिल थे.
Sep 4, 2014 13:47 IST
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अकबर ने अपने शासन काल के सीमित समय के अन्दर दक्कन के केवल एक छोटे से हिस्से पर ही विजय प्राप्त किया था जिसमें खानदेश और बरार शामिल थे. दक्कन में चार राज्य थे. अर्थात बीजापुर का आदिल शाह, गोलकुंडा का क़ुतुबशाह, अहमदनगर का निजाम शाह, और बीदर का बरीदशाह थे. ये सभी दक्कन के प्रमुख राज्य भारतीय इतिहास में प्रमुख भूमिका का निर्वहन किये थे. इन चार राज्यों में से अहमदनगर के निजामशाह के ऊपर बार-बार आक्रमण किया गया था लेकिन अहमदनगर के सक्षम सेनापति मलिक अम्बर के कुशल सेनापतित्व में मुग़ल सेना को पराजय का सामना करना पड़ा.

मलिक अंबर

मलिक अंबर एक इथियोपियाई दास, था. वह अहमदनगर के निजामशाह के अधीन रीजेंट के रूप में कार्य करते हुए 1607 ईस्वी से 1626 ईस्वी के बीच काफी महत्वपुर स्थान प्राप्त कर लिया था. उसे मुर्तजा शाह की ताकत को बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है.

वह अपनी गुरिल्ला युद्ध पद्धति के लिए चर्चित था और यही कार्य उसने मराठों को प्रशिक्षित करने के लिए किया था. वास्तव में,  उसने मराठों की एक अश्वारोही सेना का निर्माण भी किया था जो बाद में महान मराठा साम्राज्य के रूप में परिवर्तित हो गया.

शाहजहां 1616 ईस्वी में दक्कन आया और मालिक अम्बर को पराजित किया. बाद में शाहजहाँ नें उसे अपना जागीरदार बनाने के लिए मजबूर किया. वर्ष 1635 में, शाहजहां नें व्यक्तिगत रूप से दक्कन अभियान किया और निजामशाह और बीजापुर राज्यों पर विजय प्राप्त की.

औरंगजेब जोकि शाहजहां का तीसरा पुत्र था, को 1655 ईस्वी में दक्कन का गवर्नर बना दिया गया.