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शेरशाह सूरी

शेरशाह  सूरी का असली नाम फरीद था. वह 1486 ईस्वी में पैदा हुआ था.
Aug 22, 2014 16:13 IST
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शेरशाह सूरी का असली नाम फरीद था. वह 1486 ईस्वी में पैदा हुआ था. उसके पिता एक अफगान अमीर जमाल खान की सेवा में थे. जब वह युवावस्था में था तब वह एक अमीर बहार खान लोहानी के सेवा में रहा था. बहार खान के अधीन ही जब वह काम कर रहा था तभी उसने अपने हाथो से एक शेर की हत्या की थी जिसकी वजह से बहार खान लोहानी ने उसे शेर खान की उपाधि दी थी. 

बहार खान लोहानी के शासन के अन्य अमीरों के जलन के कारण शेर शाह को दरबार से बाहर निकाल दिया गया. इस तरह शेर शाह मुग़ल शासक बाबर के दरबार में चला गया. इस दौरान उसने अपनी सेवा के बदले में एक जागीर भी हासिल की. बाबर की सेवा के दौरान शेर शाह ने मुगलों शासको और उनकी सेनाओ की बहुत सारी ताकतों और कमियों का गहराई से मूल्यांकन किया.

जल्दी ही उसने मुगलों के खेमे को छोड़ दिया और बहार खान लोहानी का प्रधानमंत्री बन गया. बहार खान लोहानी की मृत्यु के बाद वह बहार खान लोहानी के समस्त क्षेत्र का इकलौता मालिक बन गया.

चौसा और कन्नौज की लड़ाई

शेरशाह सूरी ने मुग़ल सेना एवं उसके शासक हुमायूँ को चौसा के युद्ध में पारजित किया और दिल्ली के सिंहासन पर कब्जा किया. उसने मुग़ल शासक हुमायूँ को दिल्ली से बहार निर्वासन में जाने के लिए मजबूर भी कर दिया. 

प्रशासनिक सुधार

शेरशाह सूरी ने अपने साम्राज्य के अन्तर्गत अनेक प्रशासनिक सुधार किए थे जिनका उल्लेख निम्नवत है.

उसने अपने पूरे साम्राज्य को 47 सरकारों (डिवीजनों) में विभाजित किया. सरकार पुनः परगना में विभाजित थे. अधिकारियों का वह वर्ग जो परगना स्तर के शासन कार्य में सहभागिता अपनाते थे उन्हें शिकदार कहा जाता था. शिकदार परगाना स्तर के सभी नियमो और कानूनों का प्रमुख था.

परगना स्तर के अन्य अधिकारियों का जिक्र निम्नवत है.

• मुंसिफ परगना स्तर के सभी राजस्व का संकलन करता था. इस स्तर के सभी कर सम्बंधित कार्यो का वह प्रमुख होता था.

• अमीर इस स्तर के सभी सिविल केसों की सुनवाई करता था.

• क़ाज़ी या मीर-ए-अदल इस स्तर पर सभी क्रिमिनल केसों की सुनवाई के लिए नियुक्त किया जाता था.

• मुकद्दम की नियुक्ति सभी प्रकार के दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए किया जाता था.

अन्य सुधार

• रुपया(चाँदी का सिक्का) को भारत में जारी करने वाला प्रथम शासक शेर शाह सूरी था. उसके इसे जारी करने के बाद यह मुग़ल शासको के परवर्ती काल तक चलता रहा.

• शेरशाह सूरी  ने अपने शासन काल में पट्टा व्यवस्था को जारी किया जिसके अंतर्गत राजस्व से सम्बंधित सभी प्रकार के प्रावधानों का जिक्र रहता था.

• उसने जागीर व्यवस्था के स्थान पर कबूलियत व्यवस्था को लागू किया. कबूलियत व्यवस्था के अंतर्गत किसानो और सरकार के मध्य एक समझौता सम्पन्न किया जाता था.

• शेरशाह सूरी ने शासनिक, प्रशासनिक और सामरिक दृष्टि से गंगा के मैदानो के किनारे-किनारे अनेक सड़को का निर्माण करवाया था.

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